Triphala Churna Ke Fayde – त्रिफला चूर्ण के फायदे

Triphala Churna Ke Fayde – हमारे देश में आयुर्वेदिक चिकित्‍सा कई सौ सालों से चली आ रही है। सालों से आयुर्वेद में जड़ी-बूटियों का प्रयोग रोगों के उपचार में किया जाता है। इन्हीं जड़ी-बूटियों में से त्रिभला चूर्ण भी एक जड़ी-बूटी है। जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत भी लाभदायक है।

त्रिफला चूर्ण एक जड़ी-बूटियों का मिश्रण है जिसमें एक से अधिक बूटियों को मिलाया जाता है। चरक संहिता ग्रन्थ में त्रिफला चूर्ण से होने वाले फायदों के बारे में विस्तार से बताया गया है।

इसको तैयार करने के लिए आंवले, हरीतकी (हरण) एवं विभीतकी (बहेडा) का प्रयोग किया जाता है। इस मिश्रण का प्रयोग कई प्रकार के रोगों के इलाज के लिए किया जाता है। हम इस लेख में त्रिभला चूर्ण क्या है और इसके फायदों के साथ ही इसके उपयोग व इससे होने वाले नुकसान के बारे में बात करेंगे।

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त्रिफला चूर्ण क्या है ?- What is Triphala Churna?

त्रिफला चूर्ण एक जड़ी बूटी नही हैं यह एक जड़ी बूटियों का आयुर्वेदिक मिश्रण है जिसे आंवला, विभीतकी और हरीतकी अर्थात हरड़ को मिलाकर तैयार किया जाता है।

त्रिफला संस्कृत के शब्दों से मिलकर बना है जिसका अर्थ होता है त्रि यानी तीन और फला अर्थात फल। इसका अर्थ यह हुआ कि त्रिफला कोई जड़ी-बूटि या फल नहीं है, बल्कि तीन तरह की चीजों के मिश्रण से बना चूर्ण है।

त्रिफला चूर्ण का नाम ही इसी कारण से पड़ा है इसमें तीन फलों का मिश्रण होता है। आयुर्वेद में त्रिफला चूर्ण बहुत अधिक महत्वपूर्ण माना गया है क्‍योंकि यह शरीर को शक्‍ति प्रदान करता है और इसे स्‍वस्‍थ बनाए रखने में बहुत फायदेमंद है। यह हमें बीमारियों से भी बचाने में मदद करता है।

आगे हम त्रिफला चूर्ण प्रयुक्त होने वाली जड़ी-बूटियों के बारे में बताने जा रहे हैं जो निम्न हैं –

1. आंवला –

आंवला एक समान्य फल है जो पूरे देश में आसनी से मिल जाता है।  इसमें प्रचूर मात्रा में फाइबर, एंटीऑक्‍सीडेंट एवं खनिज पदार्थ पाये जाते हैं और यह विटामिन सी का सबसे बढिया स्रोत भी है। आंवले का सेवन करना हमारे पेट के लिए बहुत ही फायदेमंद है और यह पेट में होने वाले कब्‍ज से भी बचाता है। आंवला में पाये जाने वाले गुण हमें संक्रमण से भी लड़ने में मदद करते हंै। यह हमारे लिए निम्न प्रकार से फायदेमंद होता है –

  • इसमें पाया जाने वाला विटामिन-सी एनीमिया के मरीजों के लिए काफी फायदेमंद है।
  • गर्मी में शरीर को ठंडा रखने में मदद करता है।
  • पेट खराब होने अर्थात दस्त में यह लाभकारी है।
  • आंवला लिवर, हृदय व फेफड़ों के लिए भी अच्छा साबित हो सकता है।
  • विटामिन सी की प्रूचर मात्रा होने के कारण यह त्वचा के लिए लाभकारी है।

2. विभीतकी –

विभीतकी को बहेड़ा भी कहा जाता है। यह पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में मिल जाता है। आयुर्वेद एवं चिकित्सा प्रणाली में इसका प्रयोग दर्द निवारक, एंटीऑक्‍सीडेंट और लिवर के इलाज के लिए किया जाता है। श्वास से जुड़े रोगों के उपचार में इसका प्रयोग काफी लाभदायक है। डायबिटीज के उपचार के लिए भी यह फायदेमंद है। इसके कई और फायदे हो सकते हैं जो निम्न हैं –

  • विभीतकी में दर्द निवारक गुण पाये जाते हैं।
  • दस्त एवं डायरिया में यह लाभकारी है।
  • बालों के लिए इसका प्रयोग किया हेयर टॉनिक के रूप में किया जा सकता है।
  • इसमें एंटी बैक्टीरियल गुण पाये जाते हैं जिससे यह घाव को जल्द भरने व बुखार को ठीक करने में मदद कर सकता है।
  • इसके प्रयोग से हमारे शरीर के इम्यून सिस्टम को मजबूती मिलती है।

3. हरीतकी (हरड़) –

आयुर्वेद विज्ञान में हरड़ को बहुत ही महत्‍वपूर्ण माना जाता है। इसमें एंटीऑक्‍सीडेंट गुण, बढ़ती उम्र के लक्षणों को रोकना एवं सूजन रोधी कम करने वाले गुण पाये जाते हैं। इसके अलावा यह घाव को जल्द ठीक करने में भी मदद करता है। इसके प्रयोग से लिवर सामान्‍य रूप से कार्य करने लगता है। इन सबसे के आलवा यह अन्य रोगों में भी फायदेमंद होता है जो निम्न है –

  • पेट दर्द में लाभकारी है।
  • पाचन शक्ति को बेहतर करता है।
  • लिवर के स्वास्थ के लिए फायदेमंद है।
  • आंखों में होने वाली सूजन को कम कर सकता है।
  • दर्दनिवारक का कार्य करता है एवं घावों को जल्द भरने में मदद करता है।
  • मसूड़ों से निकलने वाले खून को कम करता है।

त्रिफला चूर्ण के फायदे – Triphala Churna Ke Fayde

त्रिफला चूर्ण के हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत सारे फायदे हैं नीचे हम इससे जुड़े कुछ लाभों के बारे में बताने जा रहे हैं –

1. पाचन शक्ति को बढ़ाने में त्रिफला के फायदे

वर्तमान में जंक फूड, गलत खान-पान और तैलीय व ज्यादा मसाले वाले खाने को खाने से पाचन और पेट से जुड़ी परेशानियां हो सकती है। इन समस्याओं को सही करने के लिए आप त्रिफला चूर्ण का प्रयोग कर सकते हैं। त्रिफला चूर्ण Triphala Churna के औषधीय गुण पाचन शक्ति को बढ़ाते हैं इसके साथ यह पेट से जुड़ी समस्याओं से राहत दिलाने में सहायता करते हैं। त्रिफला चूर्ण खाने को सही से पचाने में तो मदद करती ही है साथ ही यह भोजन को शरीर में अवशोषित कराने में भी मदद करता है। यह पेट से जुड़ी हुई अन्य समस्याओं जैसे कब्ज, गैस आदि समस्याओं के समाधान में भी सहयोग करता है।

2. आंखों के लिए त्रिफला के लाभ

हमारे लिए आंख बहुत ही महत्वपूर्ण है, आंखों के न होने पर शायद हमारा जीवन कुछ भी ना रहे इसलिए अन्य अंगों की भांती हमें अपनी आंखों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। त्रिफला चूर्ण आंखों को स्वस्थ्य रखने के लिए टॉनिक का काम करता है। यह आंख के लेंस में पाये जाने वाले ग्लूटाथिओन (एक प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट) के स्तर को बढ़ाने में मदद करता है। विशेषज्ञों के अनुसार त्रिफला के प्रयोग से  मोतियाबिंद के जोखिम को कम किया जा सकता है। Triphala Churna Ke Fayde

3- वजन कम करने में त्रिफला चूर्ण के फायदे

आज के समय में हर कोई मोटापे से परेशान है। मगर उनके पास एक्सरसाइज करने का समय ही नहीं है। ऐसे में अगर आप बिना डाइटिंग व बिना एक्सरसाइज किए वजन घटाना चाहते हैं तो उसके लिए त्रिफला मददगार साबित हो सकता है। संशोधित और पैकिंग किए गये खाद्य पदार्थ को पचाना थोड़ा कठिन कार्य होता है। ये  हमारे पाचन तंत्र में मूल रूप में ही निचली आंत के कुछ हिस्सों ऐसे ही रह जाता है जिसके कारण हमारे पाचन तंत्र के काम करने की पूर्ण क्षमता पर असर पड़ता है। इसके कारण से आपको हमेशा भूख महसूसर होती रहती है और जिससे आप अधिक भोजन करते हैं। यही अधिक भोजन करना आपके वजन को बढ़ाता है। इससे निजात पाने के लिए आप त्रिफला चूर्ण Triphala Churna का प्रयोग कर सकते हैं।

त्रिफला पेट में स्थित बड़ी आंत के अंग कॉलन के लिए लाभकारी है, जिससे कॉलन के ऊतकों को मजबूती मिलती है और बढ़ते वजन को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही त्रिफला चूर्ण के प्रयोग से शरीर में पैदा होने वाले विषाक्त तत्व आसानी से शरीर से बाहर मिलते हैं जिससे हमारे शरीर में से अतिरिक्त फैट को कम किया जा सकता है। इसकी कारण से अगर आपको वजन कम करना है तो आपको त्रिफला चूर्ण का प्रयोग करना चाहिए।

4. कब्ज के लिए त्रिफला चूर्ण के फायदे

गलत खानपान के कारण वर्तमान समय में लगभग सभी को कब्ज की समस्या रहती है इसके कारण पेट में गैस व दर्द की समस्या बनी रहती है। ऐसे में त्रिफला चूर्ण का प्रयोग करना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। शोध के अनुसार त्रिफला केे सेवन से गैस, कब्ज और अन्य पेट से जुड़ी समस्याओं में राहत मिल सकती है। त्रिफला में पाये जाने वाले टैनिक और गैलिक एसिड कब्ज की समस्या को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। इसके लिए आपको प्रतिदिन रात को सोने से पहले एक गिलास गर्म पानी में एक बडी चम्मच त्रिफला चूर्ण को मिलाकर इसको पीना चाहिए। परन्तु आपको यह ध्यान रखना चाहिए कि इसके सेवन के बाद आपको कुछ और नहीं खाना है।

5. हृदय के लिए त्रिफला चूर्ण के लाभ

त्रिफला चूर्ण को हृदय के स्वास्थ्य के लिए महत्वूर्ण माना जाता है। इतना ही नहीं यह रक्तचाप को नियंत्रित रखने में भी मदद करता है। एक शोध के अनुसार उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए त्रिफला चूर्ण का प्रयोग किया जा सकता है।

त्रिफला चूर्ण के प्रयोग से शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्र को भी कम किया जा सकता है जिससे हृदय के अन्य रोगों से बचा जा सकता है। त्रिफला के सेवन से आप हृदय रोगों के जुड़े जोखिमों को कम किया जा सकता है। Triphala Churna Ke Fayde

6. बैक्टीरियल एवं वायरल संक्रमण में त्रिफला के फायदे

अगर आपको बैक्टीरियल एवं वायरल संक्रमण होने का खतरा है तो आपको त्रिफला चूर्ण का प्रयोग करना चाहिए। आयुर्वेद में त्रिफला चूर्ण का प्रयोग वायरल और बैक्टीरियल संक्रमणों से शरीर को सुरक्षित करने के लिए किया जाता रहा है। क्योंकि त्रिफला चूर्ण में एंटीबैक्टीरियल, एंटी-वायरल और एंटीपायरेटिक गुण पाये जाते हैं। एंटीपाएरेटिक गुण शरीर को बुखार से बचाने में मदद करता है वहीं दूसरी ओर एंटी-बैक्टीरियल गुण जीवाणुओं से शरीर की रक्षा करता है।

7. रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए त्रिफला के लाभ

किसी भी रोग से लड़ने के लिए हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होनी चाहिए। त्रिफला में इम्यूनिटी बूस्टर मॉडयूल गुण पाये जाते हैं। हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में त्रिफला में पाये जाने वाले विभिन्न एक्टिव कंपाउंड जैसे- गैलिक एसिड और एलेजिक एसिड एंटीऑक्सीडेंट्स की तरह कार्य करते हैं जिससे हमारे  शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और हमें रोगों से लड़ने में मदद करती है।

8. डायबिटीज के लिए त्रिफला चूर्ण के फायदे

डायबिटीज के रोग में त्रिफला चूर्ण फायदेमंद हो सकता है। इसका प्रतिदिन प्रयोग करने से रक्त में ग्लूकोज का स्तर नियंत्रित किया जा सकता है। त्रिफला  में पाये जाने वाले  एंटी-डायबिटिक और हाइपोग्लिसेमिक गुण टाइप-2 प्रकार की डायबिटीज को ठीक करने में सहायक हो सकते हैं।

9- त्वचा के लिए त्रिफला के फायदे

त्रिफला चूर्ण त्वचा से जुड़े रोगों के उपचार में सहायक हो सकता है यह त्वचा में प्राकृतिक चमक तो लाता ही साथ ही त्वचा को स्वस्थ्य रखने में भी मदद करता है। यह त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाता है, छिद्रों को साफ करता है इसके अलावा त्वचा के लिए सबसे अधिक जरूरी चीज वह हमारे रक्त को भी साफ करता है जिससे कारण से हमारी त्वचा स्वस्थ्य एवं चमकदार होती है। इसके प्रयोग से त्वचा में होने वाले चकत्ते, मुँहासे एवं सनबर्न का उपचार किया जा सकता है। Triphala Churna Ke Fayde

त्रिफला चूर्ण में पाया जाने वाला रक्त को साफ करने का गुण त्वचा के लिए बहुत ही लाभदायक है। यदि इसका प्रयोग शहद के साथ किया जाय तो यह त्वचा से संबंधित रोगों को दूर करने में अधिक कारगर हो सकता है। इसमें आंवला एवं हरण होने के कारण इसमें विटामिन बी एवं सी की अधिकता होती है जिससे त्वचा के स्वास्थ्य को सुधारता जा सकता है साथ ही त्वचा की झुर्रियों को रोकने में मदद मिल सकती हैं और आपकी त्वचा अधिक सुन्दर व स्वस्थ्य हो जाती है।

10. बालों के लिए त्रिफला चूर्ण के फायदे

हर किसी महिला व पुरूष की इच्छा होती है कि उसके बाल लंबे, घने व चमकदार हों, इसके लिए त्रिफला चूर्ण फायदेमंद हो सकता है। यह माना गया है कि बालों की ग्रोथ में त्रिफला मदद कर सकता है। किसी वजन है इसमें पाया जाने वाला आंवला । बालों को स्वस्थ्य और मजबूत बनाने के लिए त्रिफला चूर्ण का सेवन तो कर सकते हैं साथ ही इससे बालों को धोया भी जा सकता है। इसके लिए आपको त्रिफला चूर्ण Triphala Churna को हल्के गरम पानी के साथ मिलाकर बालों को धोना चाहिए इससे आपके बाल मजबूत व सुन्दर तो होंगे ही साथ ही सर में हो रही रूसी व डैंड्रफ से भी मुक्ति मिलेगी।

त्रिफला चूर्ण का उपयोग कैसे करें?

उपर हमने त्रिफला चूर्ण के फायदों के बारे में जाना अब ओग इसका प्रयोग कैसे किया जा सकता है इसको जानेंगे।

  • त्रिफला चूर्ण को नींबू पानी के साथ लिया जा सकता है। अगर आपको सीधे त्रिफला चूर्ण का स्वाद पसंद नहीं है तो आप इसके एिल इसका रस बना सकते हैं इसक लिए आपको पानी में त्रिफला चूर्ण, शहद एवं नींबू के रस को साथ में मिला लेना चाहिए। अब इस तैयार मिश्रण का प्रयोग किया जा सकता है। इसे आप रात को सोने से पहले ले सकते हैं।
  • त्रिफला चूर्ण का प्रयोग इसकी चाय बनाकर भी किया जा सकता है। इसके लिए त्रिफला चूर्ण को पानी में उबालकर लेना चाहिए आप चाहे तो इसमे स्वाद के लिए शहद की थोड़ी मात्रा को मिला सकते हैं। अब इसे सुबह शाम चाय की तरह पिया जा सकता है।
  • त्रिफला चूर्ण सिर्फ चूर्ण के रूप में नहीं मिलता इसको आप बाजार से त्रिफला कैप्सूल एवं टैबलेट के रूप में भी प्राप्त कर सकते हैं। मगर इसके प्रयोग से पहले आपको डाॅक्टर की सलाह अवश्य ले लेनी चाहिए।
  • चेहरे को स्वस्थ्य व सुन्दर बनाने के लिए आप त्रिफला के फेस मास्क का प्रयोग कर सकते हैं।

त्रिफला चूर्ण बनाने का तरीका

त्रिफला चूर्ण को आसानी से बाजार से खरीदा जा सकता है। अगर आप इसे घर में बनाना चाहते हैं तो इसे आसानी से बना सकते हैं। अम आपको घर में त्रिफला चूर्ण को कैसे बनाये की पूरी जानकारी देने जा रहे हैं।

सबसे पहले इसमें प्रयोग की जाने वाली सामग्री को जमा करें जो निम्न हैं –

  • हरड़, बहेडा और आंवला इनका एक विशेष अनुपात है जो  1: 2: 4 के अनुपात में होता है। इसका विशेष ध्यान रखें।
  • अगर आप हरड़ को 20 ग्राम लेते हैं तो बहेड़ा को 40 और आंवला को 80 ग्राम लेना होगा।

त्रिफला चूर्ण बनाने की विधि –

  • सर्व प्रथम सभी सामग्रियों को अलग-अलग ओखली में पीसकर बारीक चूण्र बना लेना चाहिए।
  • फिर इस चूर्ण को छान लें।
  • अब इन तीनों के चूर्ण को आपस में मिला लें।
  • इस तैयार मिश्रण को किसी साफ जार में डाल लें।
  • यह मिश्रण ही त्रिफला चूर्ण है जिसका प्रयोग आप प्रतिदिन कर सकते हैं।

त्रिफला चूर्ण की खुराक

किसी भी दवा के फायदे तभी मिलते हैं जब उसकी सही मात्रा ली जाय। इसकी प्रकार त्रिफला चूर्ण का सही फायदा लेने के लिए हमें इसकी सही मात्रा का ज्ञान होना जरूरी है। त्रिफला चूर्ण की खुराक की मात्रा इस बात पर निर्भर करती है कि इसका प्रयोग आप किस रोग के लिए कर रहे है।

जैसे – अगर आप डायबिटीज के रोग के लिए त्रिफला चूर्ण का प्रयोग कर रहे हैं तो आपको रोज 45 दिन तक 5 ग्राम त्रिफला का सेवन करना चाहिए।

दूसरी ओर अगर आप त्वचा से जुड़ी समस्या के लिए इसका प्रयोग कर रहे हैं तो आपको खाने से पहले दो बार 5-5 ग्राम त्रिफला चूर्ण का प्रयोग करना चाहिए। इससे अधिक जानकारी के लिए आपको अपने डाॅक्टर से सलाह करनी चाहिए क्योंकि प्रत्येक रोग के लिए इसकी अलग-अलग मात्रा हो सकती है।

त्रिफला चूर्ण त्वचा से जुड़े रोगों के उपचार में सहायक हो सकता है यह त्वचा में प्राकृतिक चमक तो लाता ही साथ ही त्वचा को स्वस्थ्य रखने में भी मदद करता है।

यह त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाता है, छिद्रों को साफ करता है इसके अलावा त्वचा के लिए सबसे अधिक जरूरी चीज वह हमारे रक्त को भी साफ करता है जिससे कारण से हमारी त्वचा स्वस्थ्य एवं चमकदार होती है।

इसके प्रयोग से त्वचा में होने वाले चकत्ते, मुँहासे एवं सनबर्न का उपचार किया जा सकता है।

त्रिफला लेने के नियम

त्रिफला को लेने के कुछ नियम है जो निम्न हैं –

  • अगर आप सुबह को त्रिफला चूर्ण लेते हैं तो उसे ‘पोषक’ कहते हैं क्योंकि सुबह किया जाने वाला सेवन शरीर को पोषण प्रदान करता है। जैसे सुबह को लिया जाना वाला पोषण शरीर में विटामिन, लौह, कैल्शियम आदि की कमी को पूरा करता है। प्रातः आप इसको गुड़ के साथ ले सकते हैं।
  • अगर आप इसका सेवन रात के समय कर रहे हैं तो इसे ‘रोचक’ कहा जायेगा। क्योंकि रात को त्रिफला चूर्ण लेना कब्ज के निवारण के साथ ही पेट की सफाई के लिए अच्छा है। रात के समय आप सोने से पहेल इसे गर्म दूध के साथ ले सकते हैं या फिर इसे पानी के साथ मिलाकर भी लिया जा सकता हैं।

त्रिफला की तासीर

त्रिफला चूर्ण की तासीर गर्म होती है। जिसके कारण इसका अधिक मात्रा में सेवन करना नुकसान पहुंचा सकता है।

त्रिफला चूर्ण लेने के नुकसान – Side Effects of Triphala Churna

किसी भी दवा के फायदों के साथ नुकसान भी होते हैं। किसी भी दवा का अधिक सेवन हानिकारण हो सकता है। वैसे तो त्रिफला चूर्ण को सुरक्षित माना जाता है इससे होने वाले साइड इफेक्ट बहुत कम हैं। हम इसका प्रयोग कर सकते हैं। फिर भी इसकी अधिक मात्रा व गलत प्रकार से लेने पर इसके कुछ नुकसान तो हो सकते हैं जो निम्न हैं –

  • त्रिफला चूर्ण लिवर कोशिकाओं में पाए जाने वाले साइटोक्रोम एंजाइम की गतिविधि को रोक सकता है। यह एंजाइम कई प्रकार की दवाओं के फायदों को शरीर को पहुंचाने के लिए आवश्यक होता है। इसी कारण से यदि आप किसी अन्य बिमारी के कारण दवाओं का प्रयोग कर रहे हैं तो आपको त्रिफला चूर्ण का प्रयोग नहीं करना चाहिए या फिर आप डॉक्टरी परामर्श ले सके हैं।
  • अगर आप डिप्रेशन की दवा का प्रयोग कर रहे हैं तो त्रिफला चूर्ण आपकी दवा के असर को कम कर सकता है।
  • त्रिफला की तासीर गर्म होती है अतः गर्भावस्था के दौरान आपको में त्रिफला चूर्ण का प्रयोग नहीं करना चाहिए नहीं तो आपको इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है।
  • त्रिफला चूर्ण में एंटीडायबीटिक गुण पाये जाते है जिसके कारण लो शुगर के  रोगियों को इसका अधिक सेवन नहीं करना चाहिए। इसके अधिक सेवन से उनका शुगर लेवल अधिक कम हो सकता है जो आपके स्वास्थ्य के हानिकारक हो सकता है।
  • त्रिफला चूर्ण के अधिक प्रयोग से आपको डायरिया हो सकता है। इसमें पाय जाने वाला हरड़़ इसके लिए जिम्मेदार है।

त्रिफला चूर्ण को कहां से प्राप्त करें – Best Triphala Churna Brands

बाजार में बहुत से त्रिफला चूर्ण मौजूद हैं। आगे हम सबसे अधिक प्रयोग किये जाने वाले त्रिफला चूर्ण ब्रांड के बारे में आपको बताने जा रहे हैं जो निम्न हैं।

  • डाबर त्रिफला चूर्ण
  • बैद्यनाथ त्रिफला चूर्ण
  • झंडू त्रिफला चूर्ण
  • पतंजली त्रिफला चूर्ण आयुर्वेदिक

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