Tratak Kriya in Hindi | त्राटक क्रिया के फायदे

Tratak Kriya in Hindi — क्या आपका अपने मन को केन्द्रित नहीं कर पाते हैं यह हर समय इधर—उधर भटकता ही रहता है। कितना भी प्रयास करने के बावजूद आप इसको स्थिर नहीं कर पाते हैं। इस मन के भटकाव का असर आपके काम और जीवन में पढ़ता हे। यदि ऐसा है तो आपके लिए त्राटक क्रिया Tratak Kriya फायदेमंद हो सकती है। इस ध्यान क्रिया के द्वारा आप अपने मन को केन्द्रित कर सकते हैं।

त्राटक क्रिया Tratak Kriya सभी ध्यान क्रियाओं में सबसेे प्रभावशाली हैै पर यह क्रिया बहुत ही कठिन मानी जाती है। मगर हम इस लेख में इसको करने की बहुत ही सरल विधि बताने जा रहे हैं। आइये जानते हैं त्राटक क्रिया क्या है और इसको करने की विधि क्या है।

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त्राटक क्रिया क्या है — What is Tratak Kriya in Hindi

त्राटक ध्यान की एक विशेष क्रिया है। जिसमें ध्यान करने का मूल आधार एकाग्रता है। त्राटक संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है। जिसमें ‘त्र’ का अर्थ तीन से है और ‘टक’ का अर्थ एक टक देखना। इस तरह हम त्राटक को तीसरी आंख या आज्ञा चक्र जिसको शिवजी के तीसरे नेत्र की भांति ही तीसरा नेत्र कहते हैं। अर्थात अपने ध्यान को उसी तीसरे नेत्र में केन्द्रित करना त्राटक क्रिया का लक्ष्य है साधक, साध्य और साधन को आपस में जोड़ना जिससे अपना और परमात्मा का आत्म दर्शन हो सके।

त्राटक क्रिया करने का तरीका — Steps of Tratak Kriya in Hindi

आगे इस लेख में अब Tratak Kriya को कैसे किया जाता है उसके बारे में बात करते हैं। हम यहां आपको इसको करने के बहुत ही सरल एवं उपयोगी उपाय बताने जा रहे हैं — 

  • सबसे पहले आपको एक शांत और हवादार कमरे में बैठना चाहिए जिसमें अन्धेरा हो और वहां आपके अलावा कोई और न हो।
  • अब उस कमरे में मिट्टी के दिये में घी डालकर दीपक जलायें आप मोमबत्ती का भी प्रयोग कर सकते हैं।
  • आप उस कमरे में ध्यान की सहज मुद्रा अर्थात सुखासन की स्थिति में बैठें। अपने सिर एवं पीठ को बिल्कुल सीधा रखें। कुछ देर गहरी और लम्बी सांस ले इससे इधर—उधर भटक रहा आपका मन शांत हो जायेगां
  • उस दिये या मोमबत्ती को अपनी नेत्रों के बराबर की ऊंचाई वाले स्थान पर रखें, ध्यान रहे दिया आपकी बांखों से कम से कम 2 फुट से 3 फुट की दूरी पर हो।
  • अब अपनी आंखों को बंद करें और लंबी सांस लेना शुरू करें। फिर अपनी आंखों को धीरे से खोले और उस जलती हुई लौ पर अपना पूरा ध्यान टीका दें। आपका मन और और आपकी आंखें एक समान उसी लौ या दिये पर होनी चाहिए। ऐसा न हो की आपकी नजरे तो वहां हो पर ध्यान कहीं और।
  • Tratak Kriya को करते समय अपनी पलकों को बिल्कुल न झपकें अब उस दिये को एकटक देखते रहें जब तक कि आपकी आंखें थक ना जाए। शुरूवात में शायद आपको इससे परेशानी का सामना करना पढ़ सकता है फिर धीरे—धीरे आदत सी हो जायेगी।
  • इसको करते समय यह ध्यान दें की उस रोशनी को आंखों में ज्यादा जोर देकर नहीं देखना है।
  • आपको इसका अभ्यास दिन में कम से कम 5 से 8 बार तो करना ही चाहिए जब तक आप इस अभ्यास क्रिया में पूरी तरह से दक्ष न हो जायें। जब आप इसको पूरी तरह करने लगेंगे तो आप सिर्फ 15 या 20 मिनट ही नहीं 1 से 2 घंटे तक भी कर सकते

त्राटक क्रिया के फायदे — Benefits of Tratak Kriya in Hindi

यह क्रिया एकाग्रता तो बढ़ाने के लिए सबसे सही है। त्राटक क्रिया के अभ्यास से मस्तिष्क निष्क्रिय नसों सक्रिय किया जा सकता है। जिसकी वजह त्राटक क्रिया के साधक की एकाग्रता में बढ़ोत्तरी होती है।

त्राटक क्रिया सिर्फ ध्यान क्रिया नहीं है इसके आपके लिए कई और लाभ हैं जो आपके जीवन को आसान और सरल बना देते हैं।

  • Tratak kriya का अभ्यास करने वाले व्यक्ति के नेत्रों पर गहरा असर होता है इस कारण से आंखों में ऊर्जा का प्रवाह तीव्र हो जाता है और आंखों की रोशनी बढ़नी है साथ इससे जुड़ी अन्य समस्यायें भी को दूर हो सकती है।
  • त्राटक क्रिया का प्रभाव आज्ञा चक्र पर पड़ता है। जिससे आज्ञा चक्र सक्रिय हो जाता है और हमारी एकाग्रता बढ़ती और दूरदृष्टि भी बढ़ जाती है।
  • Tratak kriya के अभ्यास से दिमाग में हो रहे तनाव से मुक्ति मिलती है और इसके अलावा यह हमारे मस्तिष्क हो शांत भी रखता हे। इतना ही नहीं यह माइग्रेन जैसी बिमारियों में भी उपयोगी है।
  • अगर आप किसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए ध्यान नहीं लगा पा रहे हैं तो त्राटक क्रिया का अभ्यास उस उद्देश्य का प्राप्त करने में मदद कर सकती हेै। यह आपके मन एवं मस्तिष्क को एकाग्र कर अपने लक्ष्य तक पहुंचे में मदद करती है।
  • त्राटक​ क्रिया को करने से मस्तिष्क में पैदा होने वाले नकारात्मक विचारों को निकालने में मदद मिलती है। इसके नियमित अभ्यास से से हमारे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बनता है।

त्राटक क्रिया करते समय सावधानियां —  Precautions while doing Tratak Kriya

योग एवं क्रियायें हमारे लिए बहुत ही फायदेमंद होती है मगर जब हम उसको सही प्रकार से करते हैं। इसलिए हम यहां आपको त्राटक क्रिया करते समय बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में बताने जा रहे हैं —

  • अगर आपको आंखों से जुड़ी किसी भी प्रकार की बिमारी है तो आपको इस क्रिया को नहीं करना चाहिए क्योंकि इसको करते समय नेत्रों में ज्यादा जोर पढ़ता है। इसको करने से पहले आपको अपने डॉक्टर से सलाह कर लेनी चाहिए।
  • त्राटक क्रिया को आपने किसी शांत और एकांत कमरे में करना चाहिए। इससे मन को एकाग्र करने में मदद मिलती है।
  • यदि आपको Tratak Kriya का पूरा लाभ चाहिए तो इसे कम से कम 21 दिन से 30 दिनों तक करना चाहिए।
  • यदि आप जिस कमरे में ध्यान लगा रहे हैं उसमें हवा का आवागमन तेज है या पंखे का प्रयोग किया जा रहा है जिससे दिया बुझ सकता है तो दिये को उस स्थान पर रखें जहां वह हवा से प्रभावित न हो सके।
  • यह ध्यान देने योग्य है कि आपको Tratak Kriya क्रिया करने से पहेल किसी योग गुरू से सम्पर्क करना चाहिए यह योग किसी गुरू की निगरानी में हो तो आप इसमें जल्दी दक्ष हो सकते हैं।

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