पैरों में झनझनाहट – Tingling In The Feet in Hindi- Causes, Symptoms And Treatment in Hindi

आमतौर पर हमें बैठने के दौरान या आराम करने के समय पैरों से जुड़ी एक समस्या का सामाना अक्सर करना पड़ता है जो आम बोलचाल की भाषा में है ‘पैर का सो जाना’ या कहें झुनझुनी चढ़ना। पैरों में होने वाली झनझनाहट काफी आम समस्या है।

इसका कारण है जब हम एक ही जगह पर काफी लम्बे समय से बैठे रहते हैं या एक ही अवस्था में रहते हैं तो यह समस्या उत्पन्न होती है। यह कोई गम्भीर समस्या नहीं है परन्तु यह आपकी पूरी दिनचर्या को प्रभावित का कारण बन सकती है।

इस समस्या से परेशान व्यक्ति एक जगह पर ज्यादा देर बैठ  या खड़ा नहीं रह सकता। इसका होना कामकाज करने वाले लोगों के लिए एक बड़ी समस्या हो सकता है।

क्योंकि उन्हें अक्सर एक ही अवस्था में बैठकर कई घंटों तक कार्य करना पड़ता है जैसे कम्प्यूटर के सामने बैठकर कई घंटों तक काम करना। पैरों में झनझनाहट कहीं भी हो सकती है यह कुर्सी या जमीन पर बैठे—बैठे, यहां तक कि कमोड पर बैठने के समय भी हो सकती है।

इस समस्या से अक्सर बहुत से लोग परेशान रहते हैं अगर आप भी इस समस्या से परेशान हैं और इससे निजात पाना चाहते हैं और इसके लिए आप प्राकृतिक समाधान चाह रहे हैं तो आपको इस लेख को पूरा पढ़ना चाहिए यह आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

इस लेख में हम पैरों में होने वाली झनझनाहट को ठीक करने या उसमें काबू पाने के घरेलू उपायों के बारे में बताने जा रहे है।

झनझनाहट क्या है ? What is Tingling?

पैरों में होने वाली झनझनाहट अक्सर सुई की चुभन की तरह महसूस होती है। मेडिकल भाषा में इसे पैरेस्थेसिया का नाम से जानते हैं। इसके अंतर्गत पैर या हाथ के किसी भी हिस्से का सुन्न पड़ जाना होता है और इससे उस भाग में तेज झनझनाहट का एहसास होता है। यह समस्या कभी—कभी होती है। किसी कारणवश आपको यह समस्या अर्थात पैरेस्थेसिया प्रतिदिन हो रही हो तो आपको डॉक्टर के पास जना चाहिए।

शरीर में झनझनाहट होने के कारण – Causes of Tingling All Body in Hindi

कभी—कभार पैरों एवं हाथों में होने वाली अस्थायी झनझनाहट अक्सर शरीर के उस भाग की नस पर अत्यधिक दवाब या रक्त संचार में उत्पन्न होने वाली रूकावट के कारण होती है। इसके निम्न कारण हो सकते हैं :

  • हर्निएटेड डिस्क, जो नर्व ट्रामा पर दबाव डालती है
  • ऑटोम्यून्यून विकार जैसे  गठिया
  • नस का क्षतिग्रस्त होना
  • रिपिटेटिव मूवमेंट ट्रामा या चोट
  • तंत्रिका तंत्र से जुड़ी बीमारी
  • एस्ट्रोजन का असंतुलन
  • किडनी/गुर्दे, लिवर की बीमारियां
  • ट्यूमर
  • हाइपोथायरायडिज्म
  • शरीर में विटामिन-बी1, बी6, बी12, बी3 या ई की कमी होना
  • कीमोथेरेपी की दवाओं का प्रयोग होना
  • हानिकारक रसायन शरीर में जाना आदि।

पैरों में होने वाली झनझनाहट के लक्षण – Symptoms Of Tingling Sensation in Hindi

पैरों में होने वाली झयनझनाहट के निम्न लक्षण हो सकते हैं —

  • जलन
  • सर्दी
  • सुन्न होना
  • दुर्बलता
  • भारीपन

पैरों की झनझनाहट दूर करने के लिए पौष्टिक भोजन

शरीर में विटामिन की होना झनझनाहट का एक बड़ा कारण है। हमारे शरीर की सम्पूर्ण कार्यप्रणाली को सही प्रकार से चलाने के लिए हमारे प्रतिदिन के भोजन में आवश्यक पोषक तत्वों का होना बेहद आवश्यक है।

  • पैरों एवं हाथों की झनझनाहट से लड़ने के लिए आहार :
  • विटामिन-बी : साबुत अनाज, मांस, चिकन, मछली, दूध, अंडे, फलियां और पालक आदि खाद्य पदार्थ विटामिन के अच्छे स्रोत हैं।
  • ताजे फल और सब्जियां जैसे पालक, टमाटर व प्याज एंटीऑक्सीडेंट से परिपूर्ण होते हैं।
  • ब्रोकली – इसमें फाइटोन्यूट्रिएंट्स तत्व होते हैं, जो शरीर में हार्मोन को संतुलित करने का कार्य करते हैं। इसको खाने से शरीर में विटामिन की आपूर्ति होती है।
  • मछली, दही और टोफू में भरपूर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है। इनके सेवन से टिशू व नसों के निर्माण और उनकी मरम्मत में सहायता मिलती है।

पैरों की झनझनाहट को दूर करने के घरेलू उपाय

पैरों में होने वाली झनझनाहट तब तक चिंता का विषय नहीं है जब तक यह किसी अन्य गंभीर बिमारी को जन्म न दे। इससे बचाव के कुछ घरेलू उपाय हम आपको बताने जा रहे हैं —

1. मसाज

शरीर की मसाज थेरेपी झनझनाहट को दूर करने का एक आसान और कारगर उपाय है। मसाज से नसों में रक्त संचार सही प्रकार से होने लगता है और वह ठीक प्रकार से काम करने में सहयोग करती है। मसाज से रक्त संचालन के कारण हमारे तंत्रिका तंत्र में भी सुधार होता है जिससे झनझनाहट की समस्या में फायदा पहुंचता है।

2. दही का प्रयोग

इसके लिए एक कटोरी दही की आवश्यता है

कैसे करें प्रयोग :

प्रतिदिन एक कटोरी दही का प्रयोग करें। आप दिन में एक बार दही को अपने भोजन में शामिल कर सकते हैं। इससे आपको लाभ होगा।

कैसे होता है लाभदायक :

पैरों में होने वाली झनझनाहट से मुक्ति पाने के लिए आप दही को अपने भोजन में प्रयोग कर सकते हैं। दही में मैंगनीज जैसे पोषक तत्व प्रचूर मात्रा में पाए जाते हैं। यह रक्त परिसंचरण को  ठीक से कार्य करने सहायता करता है, इससे हमारी नसें ठीक प्रकार से अपना कार्य करती हैं।

3. दालचीनी

इस समस्या से निजात पाने के लिए दालचीनी का प्रयोग किया जा सकता है इसके लिए निम्न

सामग्री का प्रयोग किया जाता है :

  • एक चम्मच दालचीनी पाउडर
  • एक कप पानी
  • कैसे करें प्रयोग :
  • दालचीनी को एक कप पानी में मिलाएं।
  • अब तुरंत पी लें।

इसका प्रयोग दिन में 1 से 2 बार किया जा सकता है।

कैसे है लाभदायक :

दालचीनी में मैंगनीज और पोटेशियम जैसे पोषक तत्व प्रचूर मात्रा में उपलब्ध होते हैं। जो हमारे रक्त संचार में सुधार लाने का कार्य करते हैं। दालचीनी में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी होते हैं, जो पैरों एवं हाथों की झुनझुनाहट को दूर करने में मदद करते हैं।

4. सेंधा नमक

सेंधा नमक का प्रयोग निम्न प्रकार किया जाता है।

एक कप सेंधा नमक को पानी से भरे हुए टप में मिलाएं।

शरीर के प्रभावित हिस्से को करीब 20-30 मिनट तक इस पानी में रखें। ऐसा करने से लाभ होगा। इसका प्रयोग दिन में एक बार करना चयाहिए।

कैसे होगा लाभदायक :

सेंधा नमक में मैग्नीशियम होता है, मैग्नीशियम शरीर की सूजन और दर्द को कम करने में मदद करता है। सेंधा नमक झाुनझुनाहट पैदा करने वाली क्षतिग्रस्त नसों को ठीक करने में सहायता करता है।

5. एसेंशियल ऑयल

  • साइप्रस का तेल —

सामग्री :

  • 12 बूंद साइप्रस के तेल की
  • 50 एमएल जैतून या फिर नारियल का तेल भी लिया जा सकता है

कैसे करें प्रयोग :

  • साइप्रस के तेल में जैतून या नारियल तेल को अच्छी तरह से मिला लें।
  • इस तेल के मिश्रा को उस प्रभावित क्षेत्र में लगायें जहां झनझनाहट होती हो।
  • कुछ देर तक मसाज करें और ऐसे ही रात भर के लिए छोड़ दें।
  • इसका प्रयोग दिन में एक बार किया जा सकता है।

कैसे होता है लाभदायक

साइप्रस तेल का प्रयोग सूजन और दर्द की समस्या के लिए किया जाता है। इस तेल की नियमित मालिश करना क्षतिग्रस्त नसों के लिए फायदेमंद होता है जिससे नसों से रक्त संचार ठीक से होता है।

लैवेंडर ऑयल —

सामग्री :

  • 12 बूंद लैवेंडर ऑयल की
  • 50 एमएल जैतून ऑयल या नारियल का तेल

कैसे करें प्रयोग :

लैवेंडर ऑयल में जैतून या नारियल तेल को अच्छी तरह से मिला लें।

हाथ-पैरों के प्रभावित क्षेत्र पर इस तेल के मिश्रण से अच्छी तरह मसाज करें। और रात भरे के लिए ऐसे ही छोड़ दें।

इसका प्रयोग दिन में 1 बार किया जा सकता है।

कैसे होता है लाभदायक

तंत्रिका तंत्र संबंधी समस्याओं के लिए लैवेंडर ऑयल एक कारगर एसेंशियल ऑयल है। लैवेंडर ऑयल में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों पाये जाते है, जो नसों की मरम्मत कर दर्द से निजात दिलाते हैं।

6. सेब का सिरका

सामग्री :

  • एक चम्मच सेब का सिरका
  • शहद
  • एक गिलास गर्म पानी

कैसे करें प्रयोग :

  • पानी में सेब का सिरका एवं शहद को अच्छी तरह से मिलाएं।
  • इस मिश्रण को पिएं।
  • इसका प्रयोग दिन में एक बार करें।

कैसे होगा लाभदायक :

सेब के सिरके में एसिटिक एसिड पाया जाता है जो एक कारगर एंटी- इंफ्लेमेटरी की तरह कार्य  करता है। क्षतिग्रस्त नसों की मरम्मत के लिए इसका प्रयोग किया जा सकता है।

सेब के सिरके में कई और जरूरी पौषक तत्व होते हैं जो शरीर में ऊर्जा बढ़ाने में काम आते हैं। पैरों की झुनझुनी से राहत पाने के लिए आप सेब के सिरके का प्रयोग कर सकते हैं।

7. जिन्कगो बिलोबा हर्बल चाय

सामग्री :

  • जिन्कगो बिलोबा चायपत्ती एक-दो चम्मच
  • शहद

कैसे प्रयोग करें :

  • एक गिलास पानी में जिन्कगो बिलोबा चायपत्ती को डालें। और इसे अच्छी तरह उबाल लें।
  • पांच मिलनट उबालने के बाद पानी को कप में डालें और ठंडा होने दें।
  • इसमें शहद को मिला लें।
  • इस तैयार मिश्रण का दिन में दो से तीन बार सेवर करें।

कैसे होगा फायदा :

जिन्कगो बिलोबा चाय का सेवर करना झनझनाहट और सुन्नपन को दूर करने का बेहतरीन उपाय है। इस चाय में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो क्षतिग्रस्त नसों को ठीक करने में मदद करते हैं जिससे रक्त संचार ठीक प्रकार से कार्य करता है।

इस उपायों से उपचार करने में समय लग सकता है। अत: आपको कुछ समय तक इनका प्रयोग करना चाहिए। अगर फिर भी इससे आपको फायदा नहीं होता है तो आप

कायरोप्रैक्टर (यह ऐसी उपचार पद्धति है जिसमें काइरोप्रैक्टर नामक थेरेपिस्ट अपने हाथों के प्रयोग से आपकी हड्डियों, मांसपेशियों और जोड़ों की परेशानियों में राहत प्रदान करने में मदद करते हैं।) के पास जा सकते हैं। इसमें किसी भी दवा व सर्जरी का प्रयोग नहीं किया जाता है।

उपरोक्त उपायों के अलावा भी आप निम्नलिखित बातों का पालन कर सकते हैं :

  • शरीर को पर्याप्त आराम दें।
  • शरीर को एक ही स्थिति में रखने से बचें।
  • रक्त संचार के लिए स्ट्रेचिंग, शोल्डर स्टेशन, गर्दन उठाना, बैक स्ट्रेच व अन्य व्यायाम को अपने जीवन में शामिल करें।
  • अगर आप एक ही जगह पर लंबे समय तक बैठे रहते हैं या काम करते हैं तो आपको 30-60 मिनट तक पैदल चलें।
  • नसों के दवाब को कम करने के लिए रात में कलाई पर रिस्ट बाध कर सोएं।
  • कैफीन युक्त पदार्थो के सेवन से बचें।

पैरों व शरीर के अन्य भागों में होने वाली झनझनाहट को लंबे वक्त तक अनदेखा बिल्कुल न करें, क्योंकि इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। अगर आप इस समस्या से परेशान हैं, उपरोक्त बताये गये उपायों को अपनाकर जरूर

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