गले में इन्फेक्शन के लक्षण Throat Infection in Hindi

गले में इन्फेक्शन (Throat Infection in Hindi ) का कारण बैक्टीरिया या वायरस हो सकता है। इनके कारण गले में दर्द, सूजन के साथ ही जलन हो सकती है। गले में होने वाले संक्रमण के मुख्य लक्षण गले में दर्द, खांसी, नाक बहना, बुखार एवं गर्दन में स्थित लसीका ग्रंथि में सूजन आना शामिल है।

यदि आपके गले में इन्फेक्शन बैक्टीरिया की वजह से हुआ है तो इसका उपचार एंटीबायोटिक दवा से हो जायेगा और यदि यह वायरस के कारण होता है तो उसके उपचार की जरूरत नहीं पड़ती क्योंकि वह अपने आप ठीक हो जाती है। फिर भी इन लक्षणों का उपचार डॉक्टर की सलाह के अनुसार कर लेना चाहिए।

गले में होने वाले इंफेक्शन के परीक्षण के लिए आपसे डॉक्टर इसके लक्षणों के बारे में पूछेंगे और आपका शारीरिक परीक्षण भी करेंगे। इसके अतिरिक्त डॉक्टर आपको ब्लड टेस्ट और थ्रोट स्वैब कल्चर आदि जैसे परीक्षण करवाने के लिए कह सकते हैं।

गले के इन्फेक्शन का उपचार करने के​ लिए घरेलू उपचारों का भी सहारा भी लिया जा सकता है। इसके लिए लहसुन, अदरक और शहद का सेवन करना फायदेमंद रहता है इसके साथ ही आप हल्के गर्म पानी में नमक मिलाकर गरारे भी कर सकते हैं।

यह ध्यान देने योग्य बात है कि यदि बैक्टीरिया के कारण  होने वाले गले के इन्फेक्शन का समय पर उपचार न किया जाय तो इसके कारण रूमेटिक फीवर होने का खतरा बढ़ जाता है जिससे आपका हृदय को प्रभावित हो सकता है।

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गले का इन्फेक्शन क्या है – What is Throat Infection in Hindi

सामान्यत: यह (gale me infection) गले में होने वाले संक्रमण या इन्फेक्शन से होता है, यह बैक्टीरिया या वायरस के कारण हो सकता है। इस प्रकार की समस्या आमतौर पर छोटे बच्चों एवं उनको होती है जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है।

गले में होने वाला संक्रमण ऊपरी श्वसन तंत्र में होने वाली सामान्य परेशानी है। गले में होने वाला  सूजन गले के संक्रमण का मुख्य लक्षण होता है। प्रदूषित व गन्दे पानी या भोज्य पदार्थो के खाने से यह बीमारी हो सकती है। प्रदूषित वातावरण में साँस लेने से भी गले में संक्रमण होता है।

गले में इन्फेक्शन के लक्षण – Throat Infection Symptoms in Hindi

गले में इन्फेक्शन होने से पूरा शरीर को प्रभावित होता है। जैसे बुखार, सिरदर्द, बेचैनी और जी मिचलाना आदि। ये सभी लक्षण बैक्टीरियल या वायरल संक्रमण के कारण हो सकता हैं।

यह संक्रमण अलग—अलग व्यक्ति में अलग—अलग लक्षण दिखा सकता है। यह इन्फेक्शन किसी के लिए समान्य किसी के लिए गम्भीर हो सकता है। गले का इन्फेक्शन होने पर कुछ व्यक्तियों में सामान्य लक्षण दिखाई देते हैं जैसे गले में दर्द होना।

दूसरी ओर कुछ  व्यक्तियों में बेहद गंभीर लक्षण नजर आते हैं जैसे तेज बुखार होना इसके अलावा निगलने में कठिनाई महसूस करना। गले में संक्रमण होने पर जो लक्षण दिखते हैं वह निम्न हैं —

  • अचानक से तेज बुखार आ जाना।
  • गले में दर्द के साथ-साथ गला लाल हो जाना।
  • टॉन्सिल सूजन और इसमें मवाद बनने लगना।
  • गले में सफेद परत जम जाना।
  • गले की लसीका ग्रंथि में सूजन आ जाना।
  • छाती या फिर पूरे शरीर पर हल्के लाल रंग के चकत्ते आ जाना।
  • मुंह के अंदर फफोले बन जाना जिससे निगलने में कठिनाई होना।
  • सिर में दर्द होना।
  • ठंड लगना।

गले में इन्फेक्शन के कारण – Throat Infection Causes in Hindi

सबसे पहले हमें यह जानना होगा गले में इन्फेक्शन किस कारण से होता है। यह हम पहले ही बता चुके हैं गले का इन्फेक्शन आमतौर पर बैक्टीरिया या वायरस के द्वारा होता है। तो इसका कारण क्या है?

इसका प्रमुख कारण पहले से ही संक्रमित व्यक्ति जिसके सम्पर्क में हम आते हैं। उस व्यक्ति में इन्फेक्शन पैदा करने वाले बैक्टीरिया या वायरस हमें संक्रमित करते हैं। जब कोई संक्रमित व्यक्ति खांसता, बोलता या छींकता है तो यह बैक्टीरिया या वायरस उसके मुंह से द्रव की सूक्ष्म बूंदों के साथ हवा में मिल जाते हैं।

हमारे सांस लेने के समय हम इन सूक्ष्म बूंदों के सम्पर्क आते हैं तो यह हवा के साथ हमारे  शरीर में चली जाती हैं इसी तरह संक्रमण फैलता हैं। या फिर किसी संक्रमित जगह को छूकर अपने हाथों से मुंह को छू लेने से भी संक्रमण हो सकता है। 

गले में वायरल इन्फेक्शन:

वायरस के द्वारा गले में होने वाले इन्फेक्शन के मुख्य कारण निम्न हैं:

  • फ्लू
  • सर्दी जुकाम
  • चेचक और चिकन पॉक्स

गले में बैक्टीरियल इन्फेक्शन:

बैक्टीरियल इन्फेक्शन वायरल इन्फेक्शन के मुकाबले कम होता है, परन्तु गले में बैक्टीरियल इन्फेक्शन के कुछ लक्षण होते हैं जो निम्न है।

स्ट्रेप थ्रोट – यह गले में बैक्टीरियल इन्फेक्शन का मुख्य लक्षण होता है।

काली खांसी – अगर खांसी के समय ‘हू-हू’ की आवाज आती है तो यह काली खांसी का मुख्य लक्षण होता है।

गले में इंफेक्शन होने की वजह :

  • 5 से 14 साल के बच्चों को बैक्टीरिया के होने वाला संक्रमण होने की सम्भावना अधिक रहती है। उन्हें टॉन्सिल की समस्या अधिक रहती है। 
  • संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क में आने से भी यह होता है। इसका मुख्य कारण स्कूल, डे—केयर सेंटर जहां पर बच्चें एक साथ इकठ्ठा होते हैं ऐसे अधिक संख्या में एक ही जगह पर जमा होने से बिमार बच्चे स्वस्थ्य बच्चों को भी संक्रमित कर देते हैं।
  • गले में होने वाला संक्रमण खासतौर से पतझड़ और वसंत ऋतू के शुरू में अधिक होता है।
  • डायबिटीज के रोगियों को यह जल्दी हो जाता है क्योंकि उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली अधिक कमजोर होती है। 

गले के संक्रमण से बचाव – Prevention of Throat Infection in Hindi

हमेशा दवा से ज्यादा बिमारी से बचाव के उपाय ज्यादा असरदार और जरूरी होते हैं। हम यहां आपको हम यही बताने जा रहे हैं।

अगर आपको यह बिमारी हो तो यह ध्यान दें कि जब तक आप पूरी तरह से स्वस्थ न हो लोगों के संपर्क में कम से कम आयें।

हाथों को बार-बार धोना गले के संक्रमण के अलावा भी कई अन्य संक्रमणों से बचने का सबसे बेहतर तरीका है। अत: आप यदि आप ऐसी जगह पर हों जहां पर संक्रमण फैलने की सम्भावना अधिक है जैसे स्कूल, अस्पताल, मॉल या भीड़ वाले स्थान आदि तो ऐसी स्थिति में आपको बार-बार हाथ धोना चाहिए। इसके लिए आप साबुन या एल्कोल युक्त सेनेटाइजर का उपयोग कर सके हैं। 

इस बात का विशेष रूप से ध्यान अगर आपको छींक आ रही है तो हाथों से नाक को ढक लें इसके पश्चात अपने हाथों को अच्छी तरह से धो लेना चाहिए।

हाथों को साफ पानी व साबुन से कम से कम 20 सेकण्ड तक खूब रगड़ते हुऐ आगे और पीछे से साफ करें।

यदि आपके घर या आपके दोस्तों में से किसी को भी स्ट्रेप थ्रोट हो गया है तो उसके साथ भोजन, बर्तन, रूमाल, तकिया, कपड़े आदि शेयर ना करें।

खांसी करते या छींकते समय अपने मुंह को रूमाल या किसी कपड़े से अवश्य ढक लें।

अगर आप सिगरेट पीते हैं तो आप सिगरेट न पीयें। इससे गले के इन्फेक्शन और बढ़ सकता है।

अपने नियमित आहार में कुछ बदलाव करने से इसको नियंत्रित कर सकते हैं। जैसे — खूब मात्रा में पानी पिए, पानी पीने से आप हाइड्रेट तो रहेंगे ही साथ ही आपका गला भी नम रहेगा, ऐसा भोजन खाएं जो नरम हो जैसे, सूप । खट्टे और अधिक मसाले वाले भोजन को प्रयोग न करें।

गले में इन्फेक्शन का इलाज – Throat Infection Treatment in Hindi

गले में इन्फेक्शन के का इलाज के लिए निम्न उपाय अपनाने चाहिए।

अपनी रोग प्रतिरोधकता क्षमता को मजबूत बनाये रखने के लिए आराम करना बहुत जरूरी होता है। इसके लिए पर्याप्त नींद लें।

एंटीबायोटिक –

यदि आपको बैक्टीरिया के कारण इन्फेक्शन है तो इसके लिए आपको डॉक्टर एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल करने को कहेंगे। यह ध्यान दें यदि आपको पेनिसिलिन (Penicillin) दवा से  एलर्जी  है तो तो डॉक्टर से सलाह कर लें क्योंकि इसके इलाज के लिए खासतौर पर पेनिसिलिन या एमोक्सिलिन दी जाती हैं।

इसके अलावा डॉक्टर आपको एंटीबायोटिक दवाओं के अतिरिक्त कुछ आईबूप्रोफेन (Ibuprofen) और एसिटामिनोफेन (Acetaminophen) दवाएं लेने का सुझाव देते हैं। 

टोंसिल्लेक्टोमी (Tonsillectomy) –

यह एक सर्जिकल क्रिया है इस क्रिया में टॉन्सिल को निकाला जाता है। अर्थात गले के दोनों ओर होने वाली गांठा जिन्हें हम टॉन्सिल कहा जाता है। इनके बिगड़ जाने की स्थिति में सिर्फ आपरेशन ही एक अन्तिम उपाय रह जाता है। आगर आपके बच्चे को बार-बार टॉन्सिला हो जाते हैं तो डॉक्टर टोंसिल्लेक्टोमी करने की सलाह देते हैं।

गले में इन्फेक्शन की दवा – Medicines for Throat Infection in Hindi

गले में इन्फेक्शन के लिए मार्केट में बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे हम कुछ दवाओं के नाम आपको बता रहे हैं पर यह ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना इन दवाओं का प्रयोग न करें। क्योंकि बि​ना डॉक्टर की सलाह से दवा लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

  • Aceclave   
  • Acmox     
  • Acmox DS 
  • Advent     
  • Amox Cl   
  • Amoxyclav 
  • Augmentin 
  • Bactoclav  
  • Blumox Ca 
  • Clamp

गले के संक्रमण का घरेलू उपाय — Home Remedies for Throat Infection in Hindi

मुलेठी का प्रयोग (Mulethi for Throat Infection in Hindi)

मुलेठी गले के संक्रमण के लिए अमृत के समान है। इसके लिए मुलेठी की छोटी-सी गाँठ को कुछ देर मुंह में रखकर चबाएँ। इससे गले की खराश, दर्द व सूजन कम होती है।

नमक के पानी के साथ गरारे करना –

यह सबसे असरदार व पुराना घरेलू उपचार है। नमक में एंटी-बैक्टीरियल गुण पाये जाते हैं। इसके लिए हल्के कम पानी में थोड़ा नमक मिला लें फिर इससे गरारे करें। दिन में कम से कम दो बार तो यह करना चाहिए। इससे गले में स्थित बैक्टीरिया साफ हो जाता है और जलन पैदा करने वाले एसिड बेअसर हो जाते हैं।

मुनक्का से गले के संक्रमण का उपचार

मुनक्के का प्रयोग करने से गले के संक्रमण से राहत मिलती हैं। इसके लिए सुबह लगभग 4 मुनक्के चबाकर खाएं इसके पश्चात पानी ना पिएँ। ऐसा करने से गले में खराश में जल्दी आराम मिलता है।

अदरक एवं लौंग से गला के संक्रमण का घरेलू इलाज

अदरक व लौंग में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं। इसके लिए आप लौंग को मुँह में रखकर चूसें। ऐसा करने से गले के संक्रमण बहुत फायदा होता है। अदरक को एक कप पानी में उबाल लेना चाहिए उसके पश्चात जब यह अदरक का पानी गुनगुना हो जाये तो उसमें शहर मिलाकर दिन में दो बार पिएँ। इससे फायदा होगा।

हल्दी वाला दूध का प्रयोग –

हल्दी में एंटीबायोटिक गुण पाये जाते हैं। हल्दी के दूध के प्रयोग से गले के संक्रमण, जुकाम और यहां तक की खांसी का भी इलाज किया जा सकता है। इसके अलावा हल्दी वाला दूध शरीर की रोग प्रति​रोधकता क्षमता को बढ़ाता है।

सेब के सिरके से गले के संक्रमण का उपचार –

सेब के सिरके में अम्लीय गुण होता है जो गले के बैक्टीरिया को खत्म करने में मदद करता है। वहीं अगर आपको जुकाम के कारण गले में संक्रमण हुआ है तो भी सेब के सिरके की मदद से जुकाम को ठीक किया जा सकता है।

लहसुन –

लहसुन में बैक्टीरिया को मारने वाले गुण पाये जाते हैं। इसके अतिरिक्त यह संक्रमण पैदा करने वाले अन्य रोगाणुओं के साथ भी लड़ते हैं। इसके लिए लहसुन की एक कली को अपने मुंह में दांतों और गाल के बीच रखकर उसे धीरे—धीरे चबाते हुए चूसते रहें। इससे गले के संक्रमण में फायदा होता है।

शहद का प्रयोग –

शहर के प्रयोग से गले में सूजन व जलन को कम करने में सहायता मिलती है। इसके अतिरिक्त  शहद जुकाम के लिए भी फायदेमंद है।

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