शिलाजीत के नुकसान – Shilajit Ke Nuksan

Shilajit Ke Nuksan-शिलाजीत जिसका अर्थ होता है पहाड़ों को जीतने वाला इसके साथ इसका दूसरा अर्थ यह भी हो सकता है कि किसी भी पहाड़ जैसी समस्याओं या रोगों में इसका प्रयोग करने उससे उबरना या जीतना।

इसका प्रयोग महत्वपूर्ण रूप से यौन संबंधित बिमारियों में किया जाता है।

शिलाजीत हिमालयी क्षेत्र में मिलने वाला एक महत्वपूर्ण खनिज तत्व है।

जिसका प्रयोग भारतीय आयुर्वेदिक चिकित्सा एवं यूनानी चिकित्सा पद्धति में सबसे महत्वपूर्ण तत्व के रूप में किया जाता है।

ऐसी मान्यता है कि इसमें कई प्रकार के औषधीय गुण पाये जाते हैं जो विभिन्न प्रकार ​की शारीरिक समस्याओं के उपचार में सहायक होती है।

सदियों से शिलाजीत का प्रयोग भारतीय पारंपरिक चिकित्सा एवं आयुर्वेद चिकित्सा में एक दवा के रूप में होता रहा है। इसको कई मर्ज की एक दवा के रूप में उपयोग किया जाता है।

शिलाजीत हिमालय पर्वती की दरारों में पाया जाता है जो गर्मी के मौसम में पिघल कर बाहर निकलाता है और दिखने में तारकोल की तहर काले व भूरे रंग का होता है।

खाने में इसका स्वाद कड़वा सा होता है और इसकी तासिर को गर्म मानी जाती है।

शिलाजीत विटामिन, खनिज के साथ ही कई पोषक तत्वों का महत्वपूर्ण स्रोत भी है।

प्रमुख रूप से शिलाजीत भारत और तिब्बत के पर्वतीय क्षेत्रों में पाया जाता है।

इस लेख में हम इसके बारे में पूरी जानकारी के देंगे और शिलाजीत के नुकसान के बारे में जानेंगे।

शिलाजीत क्या है?  What is Shilajit in Hindi

शिलाजीत प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला एक खनिज पदार्थ है।

यह प्रमुख रूप से हिमालयी क्षेत्र में में पाया जाता है और भारत में यह हिंदुकुश पर्वतमाला में पाया जाता है।

यह एक दुर्लभ खनिज हैं और इसका निर्माण प्राकृतिक रूप से हजारों वर्षो में पौधों के विघटन से होता हैं।

इसकी कारण से इसे प्रकृति का अनमोल खनिज माना जाता है।

यह गाढ़ा और चिपचिपा लसलदार पदार्थ होता है। इसमें से गौमूत्र जैसी गंध आती है।

हजारों वर्षों से आयुर्वेद व चक्र संहता में इसके प्रयोग के बारे में बताया गया है। आयुर्वेद विज्ञान में शिलाजीत को शक्तिवर्धक पदार्थ के रूप में बताया गया है।

क्योंकि इसमें पाये जाने वाले तत्व पूरी तरह से शरीर को ताकत देते और इसको शरीर की सेहत सुधारने में मदद करते हैं।

शिलाजीत का प्रयोग महिला और पुरूष दोनों ही कर सकते हैं। यह दोनों के लिए लाभकारी है।

वैज्ञानिक भाषा में में इसको एस्‍फैल्‍टम पंजाबिअनम कहा जाता है और सामान्य भाषा में इसको शिलाजीत, मिनरल वैक्स कहते हैं।

संस्कृत में इसको शिलाजीत व शिलाजतु शब्दों से उच्चारित किया जाता है।

यह भारत के पर्वतीय क्षेत्रों उत्तराखण्ड, हिमांचल प्रदेश, अरूणांचल, कश्मीर के अलावा अन्य देशों जैसे चीन, नेपाल, पाकिस्तान, अफगानिस्तान विशेषकर तिब्बत में यह प्रचूर मात्रा में पाया जाता है।

शिलाजीत के नुकसान Shilajit ke nuksan in hindi

  • वैसे तो यह माना गया है कि शिलाजीत प्राकृतिक रूप से प्राप्त होता है। फिर भी इसके अधिक मात्रा व अनियमित सेवन से कई प्रकार से स्वास्थ्य व शरीर को नुकसान हो सकते हैं।
  • इसमें आयरन की प्रचूर मात्रा में पायी जाती है। इसके अधिक प्रयोग से आयरन की अधिकता से वाले रोग हो सकते हैं। इसका प्रयोग एलर्जी का कारण बन सकता है क्योंकि हर दवा का प्रयोग अलग—अलग व्यक्ति में अलग—अलग असर दिखाता है।
  • महिलाओं को गर्भावस्था (Pregnancy) में इसका प्रयोग करने से पहले डॉक्टर से पूछ लेना चाहिए। इसके अलावा  शिलाजीत की खाये जाने वाली मात्रा के बारे में डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।
  • यह ध्यान देने वाली बात है कि सिर्फ अच्छी वेरायटी की शिलाजीत का ही प्रयोग करना उचित रहता है। नहीं तो इससे नुकसान हो सकते हैं।
  • शिलाजीत की तासीर गर्म होती है जिसके कारण इसके अधिक सेवन से सिरदर्द जैसी समस्या पैदा हो सकती है।
  • अशुद्ध रूप में शिलाजीत का प्रयोग करना आपके लिए हानिकारक हो सकता है। इसके सेवन से आपको नशा हो सकता है क्योंकि इसमें माइकोटॉक्सिन और फ्री रेडिकल्स (एक विषैला पदार्थ) पाया जाता है जो नशे के लिए जिम्मेदार होता है।
  • शिलाजीत में कई प्रकार के रोगों के उपचार की क्षमता होती है। विशेषकर इसका प्रयोग सेक्स संबंधी समस्याओं में किया जाता है।
  • इसका प्रयोग परंपरागत रूप से यौन दुर्बलता को ठीक करने व यौन शक्ति को बढ़ाने में किया जाता है। इतना ही नहीं इसका प्रयोग बांझपन को दूर करने में ही किया जाता है। इसका मुख्य कारण इसका प्राकृतिक दवा का होना है।
  • शिलाजीत का प्रयोग कभी भी गर्म मौसम में ना करें क्योंकि इसकी गर्म तासिर आपको नुकसान पहुंचा सकती है।
  • गर्म मौसम में इसका प्रयोग करने से आपका वीर्य पतला हो सकता है और इसके कारण आपको कई यौन सम्बन्धी बिमारियां होने का खतरा रहता है।
  • शिलाजीत के अधिक प्रयोग से शरीर में अत्यधिक गर्मी पैदा हो जाती है। जिससे हाथ व पैरों में अधिक गर्मी महसूस होती है। इसके साथ ही पेशाब में वृद्धि या कमी की समस्या भी पैदा हो सकती है।
  • शिलाजीत का प्रयोग डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करें वह भी अधिक से अधिक 1 महिने तक सूक्ष्म मात्रा में अधिक मात्रा व ज्यादा समय तक इसका प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है।
  • ​शिलाजीत का प्रयोग अकेले ना करें इसका प्रयोग दूध के साथ करें अन्यथा इससे आपको नुकसान हो सकता है।

उपर हमने इससे होने वाले नुकसान के बारे में जाना अब इसके उपयोग व इसके फायदों के बारे में भी जान लेते हैं।

शिलाजीत का उपयोग  How to Use Shilajit in Hindi

शिलाजीत का प्रयोग अकेले नहीं होता है यहां हम शिलाजीत को उपयोग करने के कुछ उपाय आपको बता रहे हैं जो आपके लिए लाभकारी होंगे।

  • शिलाजीत का प्रयोग दूध के करना इसके उच्च परिणाम दिलाता है।
  • शिलाजीत के चूर्ण का प्रयोग इलाइची के दाने और शहद के साथ मिलाकर किया जा सकता है।
  • शिलाजीत का सेवन घी के साथ भी कर सकते हैं।
  • शिलाजीत का प्रयोग बेहतर स्वास्थ्य के लिए प्रतिदिन रात को सोने से पहले 270-490 मिलीग्राम तक किया जा सकता है।  
  • शिलाजीत की यह मात्रा प्रत्येक व्यक्ति की शारीरिक क्षमता के अनुरूप अधिक या कम हो सकती है।

आपको इसकी कितनी मात्रा का सेवन करना चाहिए इसके लिए डॉक्टर से सलाह करना बेहतर है।

शिलाजीत के फायदे Benefits of Shilajit in Hindi

दिमाग तेज करने में शिलाजीत के फायदे

शिलाजीत के प्रयोग से आप अपने दिमाग को को तेज कर सकते हैं।

दरअसल शिलाजीत मस्तिष्क से सम्बन्धित बिमारियों में काफी लाभदायक होता है और यह दिमाग की क्षमता को भी बढ़ाता है।

लाजीत हमारी स्मरण शक्ति को तेज करता है।

यह दिमाग को पोषित करने के साथ ही इसको तनाव से दूर रखकर हमारी एकाग्रता को बढ़ाता है।

इसका कारण इसमें पाये जाने वाले फुलविक एसिड (fulvic acid) एक एन्टीऑक्सडेंट है जो हमारे मस्तिष्क को स्वस्थ एवं इसकी शक्ति को बनाए रखने में मदद करता है।

इसके साथ ही इसमे पाये जाने वाला ताऊ प्रोटीन (Tau protein) हमारे दिमाग की सूजन को कम करता है।

और अल्जाइमर के रोग में लाभ पहुंचा सकता है। शिलाजीत का नियमित रूप से सेवन करने पर दिमांग मस्तिष्क की कार्यक्षमता तेज हो सकती है

एनीमिया में शिलाजीत के लाभ

जब किसी कारण से हमारे शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं अर्थात खून की कमी हो जाती है तो ऐसीर स्थिति में हमें एनीमिया होने का खतरा बढ़ जाता है।

इससे हमारे शरीर में बहुत थकान सी होने लगती है और सांस लेने में भी परेशानी होती है।

एनिमिया के कारण खून हमारे शरीर के भागों में आक्सीजन नहीं पहुंचा पाता है।

जिससे शरीर के उन हिस्सों में जहां आक्सीजन की कमी हो जाती है यह उस भाग के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

ऐसी स्थिति में शिलाजीत के नियमित उपयोग से इस स्थिति से बचा जा सकता है।

इसका मुख्य कारण होता है शिलाजीत में पाये जाने वाली आयरन की प्रचूर मात्रा। यह एनीमिया व रक्त की कमी से बचाता है।

मधुमेह में शिलाजीत के फायदे  –

वर्तमान समय में हमारी बुजुर्गो के साथ ही बड़ी मात्रा में युवा पीढ़ी भी डायबिटीज या मधुमेह से ग्रसित हैं।

इसका मुख्य कारण हमारा गलत खानपान और हमारा रहन सहन है।

परन्तु इससे आसानी से बचा जा सकता है इसके लिए हमें शिलाजीत के घरेलू उपाय अपनाने चाहिए।

शिलाजीत में एंटी-डायबिटिक गुण होते हैं जो ब्लड ग्लूकोज के स्तर में सुधार करने में मदद करते हैं।

शिलाजीत का नियमित रूप से प्रयोग करने से उनके रक्त शर्करा में कमी आती है व शुगर लेवल नियंत्रित रहता है।

इसके कारण मधुमेह अर्थात डायबिटिज में लाभ होता है। इस कारण से शिलाजीत को मधुमेह का विनाशक भी कहा जाता है।

हाई ब्लडप्रेसर में शिलाजीत के फायदे  –

हमारे शरीर में हाई कोलेस्ट्रॉल लेवल रक्त प्रवाह में बाधा बन सकता है ऐसा होने से हाई ब्लड प्रेशर की समस्या पैदा हो सकती है और दिल का दौरा होने के सम्भावना बढ़ जाती है।

हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से ग्रसित व्यक्ति को शिलाजीत के प्रयोग से लाभ हो सकता है।

क्योंकि शिलाजीत में पोटैशियम की उच्च मात्रा मिलती है।

वैज्ञानिकों के अनुसार पोटैशियम ब्लड प्रेशर के खतरने को कम सकता है।

शिलाजीत के प्रयोग करने से यह हमारे खून में पैदा होने वाले बैड कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित कर गुड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को एक निश्चित स्तर तक बनाये रखने में मदद करता है।

जिससे यह कोलेस्ट्रॉल के बिमारी में लाभदायक होने के साथ ही हमारे हृदय के लिए भी फायदेमंद है।

गठिया में शिलाजीत के लाभ

अगर आप गठिया की समस्या से ग्रसित हैं तो आपके जोड़ों में सूजन के साथ ही इसमें असहनीय दर्द भी होता।

इस प्रकार के रोग में शिलाजीत का प्रयोग करना फायदेमंद हो सकता है।

वैसे तो यह रोग ज्यादा आयु वाले लोगों में होती है पर आजकल कम आयुवर्ग से ही यह होने लगी है।

इससे निजात पाने के लिए शिलाजीत का प्रयोग किया जा सकता है इसमें पाये जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट जोड़ों के दर्द को कम करके गठिया में लाभ पहुंचाता है।

इसके नियमि प्रयोग करने से जोड़ों में रक्त प्रभाव बढ़ता इस कारण से गठिया में लाभ होता है।

मूत्र विकारों में शिलाजीत के

अगर आपको कोई मूत्राशय अर्थात यूरीन सम्बन्धी परेशानी है जैसे मूत्र में जलन एवं उसमें पैदा होने वाली पथरी आदि में शिलाजती का प्रयोग करना बहुत लाभदायक होता है।

यौन विकारों में शिलाजीत के फायदे

शिलाजीत यौन शक्ति को बढ़ाने के लिए एक उत्तम टॉनिक है।

मनुष्य इसका प्रयोग प्राचीन काल से करता आ रहा है।

कई ​किताबों में इसका उल्लेख मिलता है। यह महिलाओं व पुरूष के लिए समान रूप से लाभदायक होता है।

और दोनों में यौन इच्छा को व इसकी क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है।

यह बांझपन को भी दूर करने में सहायक है।

पुरुषों द्वारा इसके प्रयोग करने से उनके शुक्राणु स्वस्थ बने रहत है।

यह गर्भावस्था के लिए भी लाभदायक होता है।

यौन शक्ति बढ़ाने में शिलाजीत के फायदे

प्राचीन काल से ही शिलाजीत के प्रयोग से हमारे शरीर की कमजोरी दूर होती है और अपने को जवान बनाये रखा जा सकता है।

इस कारण से ही शिलाजीत को ऊर्जा एवं शक्ति का दूसरा नाम कहा जाता है।

इसके प्रयोग से यह हमारे शरीर को यौवन और फुर्ती से परिपूर्ण कर देता है।

यह यौन शक्ति को बढ़ाकर यौन शक्ति को बढ़ाता है।

Leave a Comment

Copy link
Powered by Social Snap