Mustard Seeds in Hindi | सरसों के बीज के फायदे, उपयोग और नुकसान

Mustard Seeds in Hindi — सरसों के नाम से आप सभी अच्छी तरह से वाकिफ होंगे। इसका नाम लेते ही सबसे पहले आपके मन में क्या आता है क्या आप सरसों के तेल के बारे में सोच रहे हैं या फिर सरसों के साग के बारे में। जो भी हो आज हम इस लेख में आपकेा सरसों की बीज अर्थात Mustard Seeds के बारे में बताने जा रहे हैं। सरसों के भारतीय रसोई में बहुत सारे उपयोग होते हैं इसका उपयोग तड़का लगाने, रायता बनाने के साथ ही कई अन्य कामों के लिए भी किया जाता है।

क्या आपने कभी सोचा है कि सरसों हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक भी हो सकती है तो जवाब है हाँ। जब इस लेख में आपको सरसों से जुड़ी पूरी जानकारी देने जा रहे हैं जैसे — सरसों के बीज के फायदे, सरसों के बीज क्या हैं, सरसों के बीज के नुकसान, सरसों के बीज के उपयोग, सरसों के उपयोग, सरसों के बीज के फायदे, उपयोग और नुकसान राई के फायदे, सरसों क्या है? Mustard Seeds in Hindi आदि। तो आइये शुरू करते हैं इस लेख को।

Table of Contents

सरसों बीज क्या है? — What is Mustard Seed?

सरसों Cruciferae or Brassicaceae परिवार का पौधा है। इसका वैज्ञानिक नाम ब्रेसिका कैंपेस्ट्रिस (Brassica campestris) है। जिसका आकार 1 फुट से करीब 2.8 फुट तक हो सकता है। इसमें पीले रंग के फुल लगते हैं जो बाद में एक फली के रूप बदल जाती है और उसके अन्दर काले—भूरे रंग के बीज होते हैं जिन्हें ही सरसों के बीज या Mustard Seed कहते हैं। इसके बीज से तेज निकालने के अलावा इसकी पत्तियों से सब्जी अर्थात साग बनाया जाता है।

सरसों के बीज का उपयोग मसले की तरह भी किया जाता है। यह हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभकारी है। इसके बीज के साथ ही इनकी पत्तियां एवं फूल हमारे लिए फायदेमंद हैं। इसमें फेनोलिक कंपाउंड्स, ग्लूकोसिनोलेट्स और कैरोटीनॉयड के अलावा कई और फाइटोकेमिकल्स होते हैं। यह फाइटोकेमिकल्स मधुमेह, हृदय रोग, कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों से बचने में मदद करते हैं। सरसों हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद हैं। आगे के लेख में हम इसके बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करेंगे।

सरसों बीज के प्रकार – Types of Mustard Seed in Hindi

सरसों मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती है, पीली सरसों, काली सरसों एवं भूरी सरसों। इसके अतिरिक्त आप सरसों की ही तरह दिखने वाली राई कोे भी जानते होंगे जो दिखने में एवं उसके गुण भी सरसों के समान ही होती है। इतना ही नहीं उन दोनों को अंग्रेजी में मस्टर्ड (mustard) ही कहते हैं। मगर उसका स्वाद सरसों के दानों से अलग होता है जहां राई के दानों का प्रयोग अचार, सब्जी आदि में किया जाता है वहीं सरसों के दानों से तेल निकाला जाता है।

सरसों के पौष्टिक तत्व – Mustard Seed Nutritional Value in Hindi

सरसों में कई प्रकार के पोषक तत्व पाये जाते हैं जो निम्न हैं —

  • प्रोटीन 
  • कार्बोहाइड्रेट   
  • फाइबर
  • शुगर  
  • विटामिन सी
  • थायमिन     
  • राइबोफ्लेविन
  • नियासिन
  • विटामिन-बी 6
  • फोलेट 
  • कोलीन
  • विटामिन-ए
  • बीटा कैरोटिन
  • विटामिन-ई
  • विटामिन-के
  • कैल्शियम    
  • आयरन
  • मैग्नीशियम  
  • फास्फोरस    
  • पोटैशियम    
  • सोडियम     
  • जिंक 
  • मैंगनीज     
  • कॉपर 
  • सेलेनियम    
  • फैटी एसिड

सरसों बीज के फायदे – Benefits of Mustard Seed in Hindi

1. वजन कम करने के लिए सरसों  —

यदि आप अपने बढ़ते वजन से परेशान हैं तो आपके लिए सरसों के बीज के फायदेमंद हो सकते हैं। यदि मोैटापा अधिक बढ़ जाता है तो यह कई बिमारियों को पैदा करता है। इसकी कारण से आपका वजन नियंत्रित रहना चाहिए और इसके लिए आपको सरसों का उपयोग अवश्य ही करना चाहिए। एक रिसर्च से पता चला है कि सरसों के बीज से तैयार तेल वजन घटाने में सहायता कर सकता है। क्योंकि सरसों के तेल में डायसेलिग्लिसरॉल (Diacylglycerol) पाया जाता है जो वजन घटाने में मदद करता है। दूसरी ओर डॉक्टर यह सलाह देते हैं कि सरसों के बीज का सेवन करना चाहिए क्योंकि यह पाचन को बेहतर करता हैं और आपके मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने में मदद करता है। इससे आपका वजन कम होने में मदद मिलती है।

2. मधुमेह में सरसों के बीज के फायदे —

यदि आपके शरीर में खून में ग्लूकोज के स्तर में बढ़ोत्तरी होती है तो यह मधुमेह के रोग को निमंत्रण दे सकता है। यदि आपने मधुमेह की समस्या से बचना है तो आपके लिए सरसों मददगार साबित हो सकता है। एक शोध में पता चला है कि काले सरसों के बीज में हाइपोग्लाइसेमिक और एंटीडायबिटिक गुण होता है जो रक्त में मौजूद शर्कर के स्तर को कम करने में मदद करता है। सरसों टाइप 2 प्रकार की डायबिटीज के रोग में फायदेमंद होती है।

3. कैंसर में सरसों के बीज  —

कैंसर के रोग को बढ़ाने वाली कोशिकाओं को नियंत्रित करने में सरसों फायदेमंद होती है क्योंकि इसमें ऐसे  गुण पाए जाते हैं जो कैंसर को फैलने से रोकती है। एक शोध से पता चला है कि सरसों में एंटीकार्सिनोजेनिक गुण होता है जो कैंसर को बढ़ने से रोकता है। इसके अलावा सरसों के तेल में ओमेगा-3 पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड पाया जाता है जो कोलन कैंसर के खतरे को कम करता है। मगर यह ध्यान रहे कि कैंसर एक खतरनाक बिमारी है अत: आपको इसके सम्पूर्ण उपचार के लिए डॉक्टर को अवश्य दिखान चाहिए और डॉक्टर की अनुमति के अनुसार ही सरसों का प्रयोग करना चाहिए।

4. कोलेस्ट्रॉल में सरसों के बीज के फायदे —

यदि आप कोलेस्ट्रॉल से परेशान हैं तो आपके लिए सरसों फायदेमंद हो सकता है। यह आपके कोलेस्ट्रॉल को   नियंत्रण करने में मदद करता है। एक शोध के अनुसार सरसों में डायसेलिग्लिसरॉल (diacylglycerol) पाया जाता है जो कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद करता है। यदि आप सरसों का सेवन करते हैं तो आपके शरीर में बेड कोलेस्ट्रॉल कम होता है और गुड कोलेस्ट्रॉल में वृद्धि हुई होती है। इसलिए कह सकते हैं कि सरसों एवं सरसों का तेल कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद करता है।

5. रक्तचाप में सरसों के बीज —

सरसों रक्तचाप को नियंत्रित रखने के लिए फायदेमंद हो सकते हैं। एक शोध के अनुसार सरसों के बीज में मेथनॉल अर्क होता है जो एक एंटीहाइपरटेंशन गुण होता है। यदि आप एक सीमित मात्रा में सरसों के बीजों का सेवन करते हैं तो यह आपके रक्तचाप को नियंत्रित रखने में मदद कर सकती है।

6. सर्दी एवं बुखार में सरसों के फायदे —  

यदि आप सर्दी एवं बुखार से पीड़ित रहते हैं तो आपके लिए सरसों फायदेमंद हो सकती है। यह पीले बुखार (Yellow Fever) के लिए बहुत ही लाभदायक हैं इसके लिए आपको मरीज के पैरों गर्म पानी जिसमें कि सरसों को मिलाया गया हो उससे धो लें इससे उसे आराम मिलेगा। एक शोध में यह भी पाया गया है कि सरसों में सर्दी, जुकाम एवं फ्लू जैसी बिमारियों से लड़ने वाले गुण पाये जाते हैं। जिससे की आप इन बिमारियों से बच सकते हैं।

7. त्वचा के लिए सरसों के बीज के लाभ —

सरसों के बीज में विटामिन सी पाया जाता है जो त्वचा में होने वाली परेशानियों की रोकथाम में मदद कर सकती है। सरसों में पाया जाने वाला एस्कॉर्बिक एसिड (विटामिन सी) को कई प्रकार के सौंदर्य उत्पादों में उपयोग किया जाता है इतना ही नहीं इसका प्रयोग एंटी-एजिंग उत्पाद अर्थात बढ़ती उम्र में होने वाली एजिंग की समस्या से बचाने वाले उत्पाद भी हैं।

8. माइग्रेन की समस्या में सरसों के बीज —

यदि आप माइग्रेन की समस्या से पीड़ित हैं तो सरसों आपके सिर में होने वाले वाली असहनीय दर्द से लड़ने में मदद कर सकती है। एक शोध के अनुसार सरसों के बीज में पाया जाने वाला राइबोफ्लेविनन (Riboflavin)  विटामिन माइग्रेन के खतरे को कम करने में मदद कर सकता है। अभी इस बात को पूरी तरह से माना नहीं गया है क्योंकि इस पर अभी रिसर्च चल रही है। अत: आपको यदि माइग्रेन की समस्या है तो आप सरसों के प्रयोग के साथ ही इसका उपचार किसी अच्छे डॉक्टर से करायें।

सरसों का उपयोग – How to Use Mustard Seed

सरसों में पाये जाने वाले पौष्टिक तत्वों के कारण यह हमारे लिए बहुत ही लाभकारी सिद्ध हो सकती है। अत: आगे में आपको यह बताने जा रहे है कि आप सरसों के तेल एवं सरसों के बीज का उपयोग कैसे—कैसे कर सकते हैं — 

  • आप भुने हुए चनों के साथ सरसों के बीजों या उसके तेल का प्रयोग कर सकते हैं।
  • सरसों के बीज एवं सरसों के तेल को सब्जी या दाल में छौंका लगाने के लिए प्रयोग किया जा सकता है।
  • आप सरसों के तेल को सलाद में डालकर प्रयोग कर सकते हैं।
  • सरसों के तेल को आप सब्जी, ब्रेड, पापड़ एवं अन्य तल कर खाई जाने वाली सामग्री को तलने के लिए प्रयोग कर सकते हैं।
  • यदि आपको त्वचा पर खुजली या लाल चकत्ते आ गये हो तो आप वहां पर सरसों के तेल को लगा सकते हैं।
  • आप सरसों के तेल को बालों में लगाने के प्रयोग कर सकते हैं यह बालों के लिए बहुत ही लाभकारी होता है। इसके अतिरिक्त आप शरीर की मालिश करने में भी सरसों के तेल का प्रयोग कर सकते हैं।

सरसों के नुकसान – Side Effects of Mustard Seed

यदि आप सरसों का प्रयोग एक नियंत्रित मात्रा में करते हैं तो यह आपके लिए बहुत ही लाभकारी हो सकती हैं किन्तु यदि आप इसका प्रयोग अधिक मात्रा में करते हैं तो यह आपके लिए खतरनाक शाबित हो सकती है। नीचे सरसों के कुछ नुकसान आपको बताने जा रहे हैं —

  • आपको कभी भी सरसों के तेल को एक बार तलने के लिए प्रयोग कर दिया हो तो दूबारा प्रयोग न करें यह आपके लिए खतरनाक हो सकता है। यह लंग कैंसर के खतरे को पैदा कर सकता है।
  • यदि आप सरसों के तेल का अधिक समय तक शरीर में ही लगा छोड़ देते हैं तो यह त्वचा में जलन कर सकता है।
  • एक शोध से पता चला है कि यदि आप सरसों के तेल का अधिक सेवन करते हैं तो इसका असर आपकी प्रतिरोध क्षमता पर पड़ता है और आपकी प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है।
  • यदि आप विटामिन ई के किसी प्रकार के सप्लीमेंट का अधिक प्रयोग करते हैं तो यह आपके दिमाग के लिए खतरनाक हो सकता है दिमाग की नशों में अधिक रक्त बहने का खतरा रहता है। इसकी कारण से आपको सरसों के तेल का प्रयोग एक निश्चित मात्रा में करना चाहिए क्योंकि सरसों के तेल में विटामिन-ई की प्रचूर मात्रा पाई जाती है। मगर यह माना जाता है कि भोजन के माध्यम से शरीर को मिलने वाला विटामिन—ई किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचाता मगर फिर भी आपको सावधानी बरतनी चाहिए।
  • यदि आप सरसों के तेल का अधिक सेवन करते हैं तो आपके हृदय के लिए सरसों के तेल में पाया जाने वाला इरुसिक एसिड खतरनाक शाबित हो सकता है।

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