Linga Mudra in Hindi | लिंग मुद्रा की विधि और लाभ

Linga Mudra in Hindi — लिंग मुद्रा हमारे शरीर के भीतर उपस्थित अग्नि तत्व पर ध्यान केंद्रित करती है और शरीर की गर्मी को बढ़ाने का काम करती है। आमतौर पर लिंग मुंद्रा शरीर के अन्दर की गर्मी को केंद्रित करने में मदद करती है। भारत में हिंदू धर्म में लिंग को भगवान शिव से जोड़ कर देखा जाता है और उसे भगवान शिव का ही एक रूप माना जाता है। परन्तु लिंग मुद्रा योग की अवस्था है जिसमें हाथ के अंगूठे से लिंग के समान

दिखने वाली आकृति को बनाया जाता है। योग में लिंग मुद्रा को आध्यात्म के लिए विशेष स्थान प्राप्त है। बहुत सालों पहले ऋषि—मुनि लोग ध्यान लगाने के लिए इसी मुद्रा का प्रयोग करते थे। उस समय जितना महत्व लिंग मुद्रा का था उतना ही महत्व वर्तमान समय में भी है। यह मुद्रा शरीर में में पैदा होने वाले अग्नि तत्व को संतुलित रखने में मदद करती है। यह हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी है।

इस लेख में हम आपको इसके बारे में पूरी जानकारी देंगे जैसे कि लिंग मुद्रा क्या है, लिंग मुद्रा कैसे कार्य करती है, लिंग मुद्रा को करने के तरीके, लिंग मुद्रा के लाभ एवं लिंग मुद्रा को करते समय बरती जाने वाली सावधानियां।  कार्य करती है इसलिए निरोगी रहने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को लिंग मुद्रा का अभ्यास करना चाहिए। तो आइये शुरू करते है इस लेख को — Linga Mudra in Hindi

लिंग मुद्रा क्या है – ling mudra in Hindi

लिंग मुद्रा अग्नि तत्व का प्रतीक है साथ ही इसका जुड़ाव पुरुषत्व से भी है। इसी कारण से इसे लिंग मुद्रा कहते हैं। लिंग मुद्रा हमारे शरीर में अग्नि तत्व को मजबूत बनाने का काम करती है। लिंग मुद्रा के अभ्यास से शरीर में गर्मी बढ़ जाती है इसके अभ्यास से आप खाँसी और कफ की समस्या ठीक हो जाती है। हाथ के अंगूठे को अग्नि तत्व का प्रतीक माना जाता है।

लिंग मुद्रा के अभ्यास के लिए आपको अपने हाथों की उंगलियों को आपस में फंसाकर किसी भी हाथ के अंगूठे को को सीधा रखा जाता है।  इस मुद्रा का आभ्यास गर्मी के समय कम और सर्दी के दिनों में अधिक किया जाता हे। यदि आपको अधिक सर्दी महसूस हो रही हो तो आपको शीघ्र ही लिंग मुद्रा का अभ्यास करना चाहिए। इस मुद्रा के अभ्यास से ही आपके शरीर के अंगों में गर्मी पैदेा हो जायेगी। आगे लेख में हम लिंग मुद्रा को करने की विधि के बारे में बताने जा रहे हैं — ling mudra Steps and Benefits

लिंग मुद्रा करने की विधि – How to do Ling Mudra in Hindi

किसी भी योग को करने से पहले उसके बारे में और उसको करने की विधि को अच्छे से जान लेना जरूरी होता है उसी प्रकार यदि आप लिंग मुद्रा का अभ्यास शुरू करने की सोच रहे हैं तो आपको इसको करने की विधि का पूर्ण ज्ञान होना चाहिए इससे आपके द्वारा किये गये योग मुद्रा से अधिक से अधिक लाभ प्राप्त होता है। हम आगे के लेख में आपको लिंग मुद्रा को करने की विधि के बारे में बताने जा रहे हैं।

  • आप लिंग मुद्रा को बैठकर या खड़े होकर भी कर सकते हैं।
  • योग करने से पहले आपको किसी स्वच्छ और शांत जगह पर चटाई या मैट को बिछाकर बैठ जाना चाहिए।
  • अब आप सिद्धासन या पद्मासन की स्थिति में बैठ जाये और ध्यान रखें की आपकी रीड़ की हड्डि बिल्कुल सीधी रहे।
  • अब आप अपने दोनोें हथेलियों को आपस में मिलाएं और दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में फसा लें।
  • और अपने बाएं या फिर दाएं हाथ के अंगूठे को ऊपर की ओर रखें।
  • ध्यान रहे अंगूठा आपकी दूसरे हाथ की तर्जनी उंगली के बगल से बाहर आना चाहिए।
  • अब आप यह यह सुनिश्चित करें कि आपके बायें हाथ का अंगूठा ऊपर की दिशा की ओर हो तथा दाहिने हाथ का अंगूठा सीधे रहे
  • इस मुद्रा को आप 15 मिनट तक कर सकते हैं और सामान्य रूप से आपनी सांस लेना और छोड़ना

लिंग मुद्रा के फायदे – Benefits of Linga Mudra

जिस प्रकार अन्य योग मुद्राओं के हमारे लिए बहुत से लाभ है उसी प्रकार लिंग मुद्रा भी हमारे लिए फायदेमंद है। यह मुद्रा श्वसन क्रिया से जुड़े स्वास्थ्य लाभ के लिए जानी जाती है। यह हमारे श्वास से जुड़ी बिमारियों के उपचार में मदद करती है और इन रोगों को होने से रोकती है। गले में होने वाली खरास, कफ एवं बलगम के अतिरिक्त भी इस योग के बहुत से लाभ हैं जिनका विवरण हम नीचे देने जा रहे हैं, तो आइये जानते हैं लिंग मुद्रा के कुछ महत्वपूर्ण फायदे —

1. प्रतिरक्षा तंत्र के लिए लिंग मुद्रा योग करने के फायदे

अक्सर जब भी मौसम बदलता है तो कुछ आम बिमारियां जैसे सर्दी—जुखाम, बुखार, सरदर्द एवं खांसी का होना आम बात है। मगर अगर आप लिंग मुद्रा का नियमित अभ्यास करते हैं तो आपका प्रतिरक्षा तंत्र (Immune System) मजबूत हो जाता है जिससे आपको इन समस्याओं के होने का कोई भी खतरा नहीं रहता है। क्योंकि अगर आपकी रोग प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है तो अक्सर होने वाले यह रोग आपको नहीं होते हैं। इसके साथ ही यह यह मुद्रा आपके फेफड़ों को भी मजबूती प्रदान करती है जिससे कफ या बलगम बनने की परेशानी से भी आपको मुक्ति मिल जाती है। यह मुद्रा आपकी सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होती है।

2. सर्दी—जुखाम में लिंग मुद्रा के फायदे —

लिंग मुद्रा शरीर में गरमाहट पैदा करता है जिससे  सर्दी—जुखाम, खांसी, अस्थमा, कफ और साइनस जैसी बिमारियो को कम करने में मदद मिलती है। इतना ही नहीं इस मुद्रा को सर्दियों में करने से शरीर में इतनी गर्मी पैदा हो जाती है कि पसीना आने लगता है। अगर आपको अक्सर हल्की सी सर्दी रहती है तो आप इस मुद्रा का प्रयोग कर उससे मुक्ति पा सकते हैं। लिंग मुद्रा गले में जमा कफ को गलाने में सहायता करती है जिससे आपको राहत मिली है। यदि आपको अक्सर सर्दी के कारण होने वाला बुखार, सर्दी और खांसी की समस्या रहती है तो यह मुद्रा आपके लिए फायदेमंद हो सकती है। अगर आप इस मुद्रा का नियमित अभ्यास करते हैं तो आपकी इन समस्याओं को ठीक होने में मदद मिल सकती है।

3. अस्थमा के उपचार में लिंग मुद्रा के फायदे —

जिस प्रकार लिंग मुद्रा बदलते मौसम के कारण होने वाले रोगों को दूर करने में फायदेमंद होती है उसी प्रकार यह अस्थमा के उपचार में भी लाभदायक है। यह मुद्रा सांस से संबंधित बिमारियों के साथ ही अस्थमा से होने वाली परेशानी को ठीक करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अगर आप प्रतिदिन लिंग मुद्रा का अभ्यास करते हैं तो आपके गले में जमा कफ से मुक्ति मिलती है और इससे होने वाली खांसी भी नहीं होती है।

4. वजन घटाने में लिंग मुद्रा के फायदे —

अगर आप बढ़ते वजन से परेशान हैं तो आपके लिए यह मुद्रा फायदेमंद हो सकती है। अगर आप लिंग मुद्रा का दिन में तीन बार 15—15 मिनट तक नियमित अभ्यास करते हैं तो यह आपके वजन घटाने में मदद करती है। अगर आप इस मुद्रा का प्रयोग करते हैं तो जब से इस मुद्रा का अभ्यास शुरू करते हैं तो आप पूरे दिन कम से कम आठ से दस गिलास पानी अवश्य पिये। इसके अतिरिक्त आपको ठंडे तासिर वाले भोजन जैसे चावल, केला, दही एवं सिटरस फल अर्थात खट्टे फलों का सेवन शुरू करना चाहिए। यह सभी लिंग मुद्रा के साथ मिलकर आपके शरीर में जमा अतिरिक्त कैलोरी को घटाने में मदद करते हैं और आपके बढ़ते वजन को नियंत्रित कर आपको मोटापे से मुक्ति दिलाती है।

5. शारीरिक ऊर्जा को बढ़ाने में लिंग मुद्रा के फायदे –

जब भी अधिक कार्य करने से आपका शरीर और दिमाग बहुत थक जाता है तो लिंग मुद्रा के अभ्यास से आपके शरीर और मन की थकान दूर हो जाती है और आपके शरीर में एक नई उर्जा का संचार होने लगता है।

6. हृदय के रोगों में लिंग मुद्रा के फायदे —

आज कल सिर्फ बढ़ती उम्र वालों को ही नहीं कम उम्र के लोगों में भी ब्लड प्रेशर की समस्या होने लगी है। ऐसी अवस्था में आपके लिए नियमित लिंग मुद्रा का अभ्यास करना फायदेमंद हो सकता है। इस मुद्रा को करने से रक्तचाप अर्थात ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है जिससे हृदय से जुड़े रोग होने का खतरा कम हो जाता है और आपका स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है।

7. लिंग मुद्रा के अन्य फायदे —

  • लिंग मुद्रा फेफड़ों के लिए बहुत फायदेमंद है। यह फेफड़ो को मजबूती प्रदान करती है।
  • लिंग मुद्रा को करने से शरीर में स्फूर्ति एवं उत्साह बना रहता है।
  • यदि आप इसका नियमित अभ्यास करते है तो आपकी अतिरिक्त कैलोरी और फैट बर्न होने लगता है।
  • यह मुद्रा व्यक्ति को शांत व आकर्षक बनाने में मदद करती है।
  • सर्दी के कारण होने वाले बुखार से मुक्ति मिलती है।
  • यह मुद्रा छाती में होने वाली जलन से भी मुक्ति दिलाती है।
  • यदि इस मुद्रा को महिलायें करती है तो उनके मासिक धर्म से जुड़ी अनियमितता ठीक हो जाती है।
  • लिंग मुद्रा श्वसन तंत्र को मजबूत बनाती है।

लिंग मुद्रा करने का समय व अवधि — Time and duration of doing Ling Mudra

अगर आप लिंग मुद्रा का अभ्यास प्रतिदिनि नियमित रूप से करते हैं तो आपको इसके अच्छे परिणाम मिल सकते है। इसका अभ्यास आप कभी भी कर सकते हैं। परन्तु यह कितनी देर करना चाहिए इसका ज्ञान होना जरूरी है क्योंकि यह मुद्रा शरीर में गर्मी को पैदा करती है और इसके अधिक होने से आपको नुकसान हो सकता है। अत: आपको इसको करने का सही ज्ञान होना जरूरी है। आप इस मुद्रा का अभ्यास सुबह और शाम के समय कर सकते है इस समय इसका अभ्यास करना आपके लिए फायेदमंद हो सकता है।  इस मुद्रा का अभ्यास आपको प्रात: और शाम को 15—15 मिनट तक करना चाहिएं गर्मी के मौसम में आप इस समय कम कर सकते है। ठण्ड के मौसम में यदि आपको अधिक ठण्ड लग रही है तो आप इस मुद्रा का अभ्यास कर सकते हैं।

लिंग मुद्रा करते समय बरती जाने वाली सावधानियां – Precautions for Ling Mudra

लिंग मुद्रा को आप किसी भी समय कर सकते हैं पर इसको बहुत अधिक समय तक नहीं करना चाहिए यह आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है क्योंकि अधिक देर तक करने से आपके शरीर में अधिक गर्मी उत्पन्न हो जायेगी जो आपको नुकसान पहुंचा सकती है। इससे जुड़ी कुछ और सावधानियां है जो निम्न हैं —

  • आपको लिंग मुद्रा का अभ्यास खाली पेट ही करना चाहिए।
  • अगर आपको उच्च रक्तचाप का रोग है तो आपको यह मुद्रा नहीं करनी चाहिए।
  • यदि आपके पेट में ट्यूमर की समस्या है तो आपको इस मुद्रा को नहीं करना चाहिए इससे ट्यूमर को नुकसान हो सकता है।
  • पित्त दोष से पीड़ित व्यक्ति को इस मुद्रा से दूर ही रहना चाहिए।
  • यह ध्यान रहे जब भी आप लिंग मुद्रा का अभ्यास कर रहे हो हमेशा आपके बायां हाथ का अंगूठा ही ऊपर हो।
  • इस मुद्रा को करते समय आपका ध्यान नहीं भटकना चाहिए।
  • गर्मी के मौसम में इस मुद्रा का अभ्यास अधिक देर तक न करें।

हमने इस लेख Linga Mudra in Hindi में आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी है। हमें आशा है कि आपके लिए यह पूरी जानकारी बहुत ही फायेदमंद होगी और आप इसके फायदों को जनकर इस मुद्रा का अभ्यास जरूर करें। मगर करने से पहले इससे जुड़ी सावधानियों को अवश्य सही प्रकार से पढ़ लें। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा तो आप इस लेख ”लिंग मुद्रा की विधि और लाभ” को अपने दोस्तों के साथ अवश्य शेयर करें।

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