कुमारी आसव के फायदे, उपयोग एवं साइड इफेक्ट्स Baidyanath Kumari Asav No. 1 Benefits in Hindi

कुमारी आसव ( Kumari Asav No. 1  in Hindi ) उत्तम पाचन गुणों से युक्त दवा है।

इसका प्रयोग आयुर्वे​द में यकृत के रोगों के लिए किया जाता है। यह 47 प्रकार की जड़ी बुटियों व औषधिय तत्वों को मिलकर आसव निर्माण विधि से बनाई जाती है।

इसका प्रमुख घटक द्रव्य घृतकुमारी है। इसी कारण से इसका नाम कुमारी आसव पड़ा है। 

बाजार में यह विभिन्न कम्पनियों की मिलती है जैसे बैद्यनाथ कुमारी आसव, पतंजलि कुमार्यासव, डाबर कुमार्यासव आदि। यह दवा विभिन्न प्रकार की बिमारियों में प्रयोग की जाती है जैसे पाचन सम्बन्धी रोग, अस्थमा, महिलाओं के प्रजनन विकार, मूत्र विकारों, पथरी के रोग में।

इस लेख में Baidyanath Kumari Asava के बारे में जानेंगे मगर साथ ही कुमारी आसवर क्या है और इसके क्या फायदे हैं इसके बारे में बतायेंगे।

Baidyanath Kumari Asava बैद्यनाथ कुमारी आसव यह पाचन तंत्र के रोगों को ठीक करने के लिए सर्वोत्तम आयुर्वेदिक दवा है।

इसको हम बैद्यनाथ कुमारी आसव नंबर 1 के नाम से भी जानते हैं।

बैद्यनाथ कुमारी आसव पाचन से सम्बंधित किसी भी के साथ ही अन्य रोगों जैसे भूख न लगना, एसीडीटी, पेट में गैस की समस्या, अम्ल पित्त की समस्या, पेट में कीड़े होना या कृमि रोग, पेट दर्द, पेट व छाती में जलन, शरीर का वजन कम होना, अपचन, पेट के विकार, बबासीर, जल्दी थकान होना, कमजोरी बिमारियों में लाभदायक है। 

कुमारी आसव नंबर 1 क्या है ? What is Kumari Asav No. 1?

कुमारी आसव जिसे कुमार्यावास के नाम से भी जानते हैं। यह पॉली हर्बल दवा है जो लिक्विड के रूप में मिलती है। इस दवा में 5 से 10 प्रतिशत तक अल्कोहल होता है।

दवा में प्रयुक्त अल्कोहल व पानी शरीर में सक्रिय आयुर्वेदिक तत्वों को घुलने में सहायता करते हैं।

यह अल्कोहल और पानी शरीर में सक्रिय हर्बल तत्वों को घुलने करने में मदद करती है। कुमारी आसव का मुख्य तत्व एलोवेरा है।

यह दवा पेट से सम्बन्धित परेशानियों, गैस की परेशानी, बवासीर, सदी, खांसी, सांस की तकलीफ, मासिक धर्म संबंधी विकारों के अलावा मूत्र नली के विकारो के उपचार के लिए प्रयोग किया जाता है।

बैद्यनाथ कुमारी आसव पेट के पाचन तंत्र को सुचारू रूप से चलाने में मदद करती है। इसके साथ ही रोगों से लड़ने में भी मदद करता है।

पाचन तंत्र की परेशानी से कई लोगों को वजन ही नहीं बढ़ता चाहे वह कितना भी अच्छा भोजन कर लें।

इतना ही नहीं लोगों को भूख नहीं लगती, खाना खाने के बाद आसल या नीदं आने लगती है यह सभी छोटी—छोटी परेशानी पेट से संबंधित हैं।

इसी लिए इन सबका इलाज करने से पहले पेट की समस्या का इलाज करना चाहिए।

उपरोक्त समस्याओं के लिए एक रामबाण औषधि है बैद्यानाथ कुमारी आसव। यह समस्त प्रकार की पेट संबंधी हर प्रकार की समस्या को दूर करने में सक्षम है।

कुमारी आसव के घटक द्रव्य –

कुमारी आसव में 47 प्रकार के घटक होते हैं जो निम्न हैं —

दालचीनीइलायचीनागकेशरचित्रकमूलपिप्पलीमूलविडंगचव्य
गजपिप्पलीगुडलौंगशहदलौह भस्मशुण्ठीपिप्पली
मरिच (कालीमिर्च)स्वर्णमाक्षिक भस्मघृतकुमारी स्वरसधातकीपुष्पलोध्र त्वकउटीगण बीजहिंगूपत्री
शतपुष्पालालपुनर्नवासुपारीबलामूलअतिबलाअकरकराकौंच बीज
श्वेत पुनर्नवागोक्षुरआमलकीमुलेठीदंतीमूलपुष्कर्मुलदेवदारु
हरिद्रादारु हरिद्रारास्नाविभिताकीमुर्वागुडूचीहरीतकी
तेजपातधनियाँकुटकीनागरमोथाहपुषा

कुमारी आसव के फायदे –Benefits of Kumari Asav

कुमारी आसव का प्रयोग विभिन्न रोगों के इलाज के लिए किया जाता है उनमें से कुछ के बारे में हम यहां बताने जा रहे है –

  • पाचन तंत्र व पाचन से सम्बन्धी सभी बिमारियों में इसका उपयोग किया जाता है। यह दवा बेहद असरदार पाचक गुणों से युक्त है। इसके अलावा यह पेट के फूलने, पेट के कीड़े व पेट में होने वाले दर्द में भी लाभदायक है।
  • इस दवा का प्रयोग महिलाओं के प्रजनन सम्बन्धी तकलीफ किया जाता है।
  • कुमारी आसव महिलाओं के मासिक धर्म में रूकावट डालने वाले रोग में लाभदायक होती है। इस दवा के प्रयोग से जिन महिलाओं का मासिक धर्म बिल्कुल बन्द हो गया हो या किसी कारणवश कुछ समय से बन्द हो को लाभ होता है।
  • कुमारी आसव में घृतकुमारी का प्रयोग होने के कारण यह बल वर्द्धक एवं रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने वाली दवा बन जाती है अत: इसके प्रयोग से यह हमारी रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है जिस कारण से हमें छोटे—मोटे रोग होने का खतरा कम हो जाता है। इसके अलावा इसके प्रयोग से शरीर के अन्दरूनी घावों में भी लाभ होता है। |
  • इस दवा के प्रयोग से कमजोर जठराग्नि की​ स्थिति बेहत होती है जिस कारण अरुचि एवं अजीर्ण जैसी परेशानियों में फायदा होता है।
  • यह सिरप श्वास एवं क्षय रोग के आलवा यकृत के रोगों में भी फायदेमंद हैं।
  • अगर आप किसी प्रकार की मूत्र विकारों से परेशान है तो इसके प्रयोग से आपकी यह समस्या समाप्त हो सकती है।
  • इतना ही नहीं यह दव पत्थरी (अश्मरी) जैसी बिमारी में भी काफी फायदेमंद है।
  • कुमारी आसव के प्रयोग से वीर्यविकारों में भी लाभ होता है।

कुमारी आसव की सेवन विधि

इसका सेवन 20 से 30 ml की मात्रा में पानी की बराबर मात्रा को मिलाकर सुबह व शाम को करना चाहिए। पर ध्यान दें कि इसका प्रयोग भोजन के पश्चात ही करें।

किसी भी दवा का प्रयोग करने से पहले चिकित्सक की सलाह को लेना उचित रहता है।

कुमारी आसव के साइड इफेक्ट्स-Side Effects of Kumari Asav

वैसे तो इस दवा के कोई साइड इफेक्ट्स नहीं है। परन्तु इसका प्रयोग डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए। अगर उचित मात्रा में इसका प्रयोग करें तो इसका शरीर में कोई भी बुरा प्रभाव नहीं पढ़ता है।

बैद्यनाथ कुमारी आसव  के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न –FAQs of Kumari Asav No. 1

अपने स्वास्थ्य में सुधार के लिए मुझे Baidyanath Kumariasava का उपयोग कितने वक्त तक करना ठीक रहेगा और क्या मुझे इसकी लत लग सकती है?

चिकित्सकों के अनुसार स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिए लिए इसका प्रयोग कुछ ​ही समय तक करना उचित रहता है।

पर प्रत्येक व्यक्ति के प्रयोग की आवश्यता अलग—अलग होती है अत: इसके प्रयोग से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

नहीं इसके प्रयोग से आपको लत नहीं लगेगी। परन्तु डॉक्टर की सलाह के अनुसार निश्चित अवधि तक ही इसका प्रयोग करें।

Baidyanath Kumariasava को खाली पेट लेना ठीक होगा?

इसकस प्रयोग खाली पेट नहीं करना चाहिए। भोजन के पश्चात ही इस दवा को बराबर पानी की मात्रा के साथ लेना चाहिए। फिर भी अपने डॉक्टर से इस बारे में सलाह कर लें।

Baidyanath Kumariasava को कितनी मात्रा व कितने बार लेना चाहिए?

Baidyanath Kumariasava को दिन में दो बार अर्थात सुबह व शाम को लेना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति की आवश्यकता अलग—अलग होती है अत: इसकी मात्रा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लेना चाहिए।

Baidyanath Kumariasava का उपयोग क्या गर्भवती महिलायें कर सकती है?

प्रत्येक महिला की स्थिति भिन्न हो सकती है अत: इसके लिए डॉक्टर से पूछकर ही इसका सेवन करा ठीक रहता है।

Baidyanath Kumariasava का उपयोग स्तनपान कराने वाली महिलायें कर सकती हैं?

इस स्थिति में बारे में डॉक्टर से सलाह करना ही उचित होगा।

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