खेचरी मुद्रा के लाभ – Khechari Mudra Benefits

Khechari Mudra Benefits-खेचरी मुद्रा को मृत्यु में विजय अर्थात दीर्घायु के लिए जाना जाता है।

हठयोग में इसे अमृतपान कहा जाता है। इसे सभी मुद्राओं में सबसे उत्तम मुद्रा का स्थान प्राप्त है।

खेचरी मुद्रा को योगी एवं साधुओं की चेतना को उच्च स्तर तक पहुंचाने में मददगार होता है।

ऐसा कहा जाता है खेची मुद्रा को जो लोग सिद्ध कर लेते हैं उन्हें अमृत स्राव का आनन्द प्राप्त होता है।

इसकी अमृत स्राव से लम्बी उम्र का वरदान मिलता है।

इसको करने में कई वर्ष लग सकते हैं।

यह सयम उस व्यक्ति की योग्यता पर निर्भर करता है कि वह कितनी जल्दी इस क्रिया को सिद्ध करता है। इस योग अर्थात मुद्रा को अपनी जीभ के द्वारा किया जाता है।

इस क्रिया में जीभ को लम्बा करने का अभ्यास किया जाता है।

जिन लोगों की जीभ छोटे आकार की होती है उन्हें इसके लिए काफी संघर्ष करना पड़ता है इसकी के उलट लम्बी जीभ वाले व्यक्ति इसे आसानी से कर पाते है।

शारीरिक और मानसिक रोगों को दूर करने के लिए इस मुद्रा का प्रयोग किया जाता है।

यह मुद्रा उन साधुओं व लोगों के लिए ज्यादा लाभकारी होती है जो साधना में रत रहते हैं।

इस मुद्रा को करने से पहले किसी जानकार की शरण में चले जाना चाहिए। खुद इसका प्रयोग नहीं करना चाहिए।

कई योगाचार्य शरीर के भीतरी कुंडलिनीओं को जागृत करने के लिए इस खेचरी मुद्रा का नियमित अभ्यास करने की सलाह देते हैं। इसके जरिये प्राणायाम में आसानी होती है।

आगे के लेख में हम खेचरी मुद्रा के बारे में जानेंगे और इसके होने वाले लाभ Khechari Mudra Benefits के बारे में बात करेंगे।

खेचरी मुद्रा के फायदे-Khechari Mudra Benefits

  • खेचरी मुद्रा के नियमित अभ्यास से आलस्य, प्यास, बेहोसी और भूख पर आसानी से काबू पाया जा सकता है।
  • जो योगी इसका नियमित अभ्यास करता है उसे क्षय और कम उम्र में मृत्यु से मुक्ति मिलती है।
  • इसको करने से व्यक्ति की रोगों से लड़ने की क्षमता अर्थात रोग प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है।
  • बबासीर के रोगियों के लिए यह मुद्रा अति विशेष है। उनको इस मुद्रा के नियमित प्रयोग से लाभ होता है।
  • इस मु्द्रा का नियमित अभ्यास करने से प्रणायाम को सिद्ध करने और समाधि लगाने में मदद मिलती है।
  • खेचरी मुद्रा के रोग अभ्यास करने से भूख न लगने की बिमारी ठीक हो जाती है और प्यास भी ज्यादा नहीं लगती। इसका मुख्य कारण इस क्रिया को करते समय हमारे मुंह में पैदा होने वाली लार की ज्यादा मात्रा।
  • योगाचार्यो के अनुसार इस क्रिया को नियिमत तौर पर करने से हमारी कुण्डलीशक्ति जागृत हो जाती है।
  • इस मुद्रा के नियमित अभ्यास से साधक को अपनी सांसों में नियंत्रण आ जाता है।
  • ऐसा माना जाता है कि इस क्रिया को करने से सुन्दर शरीर प्राप्त होता है व शरीर जल्दी बुढ़ा भी नहीं होता है।

खेचरी मुद्रा करने की विधि

  • खेचरी मुद्रा को करने से पहले आपको उत्कटासन की अवस्था में बैठना होता है।
  • अब अपनी जीभ को घूमाकर फोल्ड करें और मुंह की ऊपर सतह की ओर से पीछे की ओर ले जाने की कोशिश करे।
  • जिन लोगों की जीभ छोटी होती है वह आरम्भ में कठारे भाग को ही स्पर्श कर पायेंगे। जैसे जैसे आपका अभ्यास बढ़ेगा उससे आप की जीभ अन्दरर की ओर जायेगी और मुलायम जगह को स्पर्श करने लगेगी। और जिनकी जीभ लम्बी होती है वह शुरूवात में ही मुलायम जगह को स्पर्श कर सकते हैं।
  • शुरूवात में इसे ज्यादा नहीं करना चाहिए अगर इसको करते वक्त आपको दर्द का अहसास होता है तो तुरन्त पहल जैसी अवस्था में आ जाय और कुछ समय पश्चात फिर से कोशिश करें।
  • प्रात: एवं सायंकाल दोनो समय आपको अपनी जीभ को गले के अन्दर की ओर ले जाना का अभ्यास करते रहना चाहिए।
  • इस मुद्रा का अभ्यास लगातार करना चाहिए तभी आप अपनी जीभ को अलिजिह्वा uvula तक पहुंचा पाऐंगे। जब यह इसको स्पर्श करने लगेगी तो उसके पश्चात यह हमारे दिमांग से जुड़ी हुई नर्व को छूने लगेगी।
  • इस क्रिया का लगातार अभ्यास करने आपकी जीभ इतनी लम्बी हो जायेगी यह आपके सिर तक पहुंच जाय तो समझ लेना चाहिए कि यह आसन आपके लिए सिद्ध हो गया है।
  • जब आपकी जीभ अन्दर की ओर लेते हैं तो इससे इड़ा-पिंगला और सुषुम्ना नाड़ी के द्वारा बंद हो जाते हैं जिससे ब्रह्म रंध्र से लार टपकने लगती है। इसी लार को हठयोग में अमृतपान कहा जाता है।
  • यह योग बहुत कठिन है। मगर ध्यान देना चाहिए कि इसमें कोई जल्दीबाजी न करें। इसका अभ्यास करते रहे इसको सिद्ध होने में 6 माह से 12 माह तक का समय लग सकता है। यह उस व्यक्ति की योग्यता व लगन पर निर्भरत करता है जो यह मुद्रा कर रहा है। इस क्रिया को अपने मन से न करें किसी अच्छे योगाचार्य की देखरेख में ही इसे करना अच्छा रहता है।

खेचरी मुद्रा में ध्यान रखने योग्य बातें

खेचरी मुद्रा को करते समय कुछ सावधानियां करनी आवश्यक है। नहीं तो इसके गलत प्रभाव पड़ सकते हैं।

  • खेचरी मुद्रा को करने से पहले किसी अच्छे योगाचार्य या प्रशिक्षक से शिक्षा लेनी चाहिए।
  • इसे अपने ही मन से नहीं करना चाहिए नहीं तो इसके गलत परिणाम हो सकते हैं।
  • यह ध्यान दें की जब आप इस क्रिया को कर रहे हों और आपकी नाम के उपर से कोई कड़वा सा पदार्थ निकलने लगे तो इसे उसकी समय बंद कर देना उचित होता है।

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