जैतून के तेल के फायदे और नुकसान-Olive Oil Benefits, Uses and Side Effects in Hindi

Jaitun Ka Tel Ke Fayde-वर्तमान समय में ऑलिव ऑयल या जैतून का तेल अधिक से अधिक लोग इस्तेमाल कर रहे हैं।

अगर आप अपनी सेहत के प्रति जागरूक हैं तथा खाने-पीने के शौकीन हैं तो आपको ऑलिव ऑयल के फायदों के बारे में पता होना चाहिए। 

जैतून का तेल किस काम आता है?

ऑलिव ऑयल सिर्फ सेहत के लिए ही नहीं बल्कि कई औषधीय गुणों से युक्त है।

इसलिए आज ही नहीं पहले से इसका प्रयोग होता रहा है।

पहले जैतून के तेल को सिर्फ खाना बनाने के लिए ही प्रयोग करते थे।

लेकिन इसके अन्य गुणों के बारे में पता चलने के  पश्चात इसका उपयोग हेल्थकेयर प्रोडक्ट, स्किन केयर, बालों के लिए और कई अन्य चीजों के लिए हो रहा है।

हम इस लेख में जैतून के तेल (ऑलिव ऑयल) से होने वाले फायदों, उसके गुणों और साथ ही उससे होने वाले नुकसान के बारे में जानेंगे।

हम इस लेख में आगे बढ़े इससे पहले हमें यह जान लेना जरूरी है कि जैतून का तेल है क्या ?

Table of Contents

जैतून (ऑलिव) क्या है?

जैतून का अंग्रेजी नाम ऑलिव है तथा वानस्पतिक नाम ओलिव एउरोपैआ है।

olive oil ko hindi me kya kehte hain-हिन्दी में जैतून, बंगाली में जौलपाई, तेलगु में जीता, कन्नड़ में ओउदल कहते हैं।

इसकी उत्पत्ति का स्थान पश्चिम एशिया में माना जाता है।

ऐसा कहा जाता है कि यूनान की पहाड़ियों  में चूनेदार चट्टानों द्वारा तैयार मिट्टी में जैतून के वृक्ष पैदा किए गए थे।

वर्तमान समय में यह भूमध्यसागर के आस-पास देशों  जैसे पुर्तगाल, टर्की, स्पेन, ट्यूनीशिया और अन्य देशों में पैदा किए जाते हैं।

आजकल जैतून की खेती व्यापारिक तौर पर की जाती है। चीन, न्यूजीलैंड, अमरीका एवं अफ्रीका के उपनिवेश में जैतून की खेती सफलतापूर्वक की जाती है।

जैतून का तेल क्या है-olive oil kya hota h?

जैतून के पेड़ से जो फल प्राप्त होता है उसमें से तेल प्राप्त किया जाता है।

इसके फल से 50 से  60 प्रतिशत तक तेल प्राप्त होता है।

इसे भली भांती कुचलकर या दबाकर जैतून का तेल प्राप्त किया जाता है।

दुनिया का सबसे अच्छा तेल है जैतून का तेल। जैतून का तेल विटामिन, एंटीऑक्सीडेंट मिनरल व अन्य कई गुणों से परिपूर्व होता है।

इन्हीं गुणों के कारण जैतून के तेल का प्रयोग कई जगहों पर किया जाता है।

जिसका विवरण हमें आगे के लेख में मिलेगा।

आगे हम जैतून के तेलों के बारे में बता रहे हैं अर्थात जैतून का तेल कितने प्रकार का होता है –

जैतून के तेल के प्रकार

जैतून का तेल कई प्रकार का होता है। खाना बनाने के लिए अलग और त्वचा व बालों में लगाने के लिए अलग प्रकार का तेल प्रयोग में लाया जाता है।

  • एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल
  • वर्जिन ऑलिव ऑयल
  • रिफाइंड ऑलिव ऑयल
  • प्योर ऑलिव ऑयल
  • लैम्पेंट ऑयल

जैतून (ऑलिव) के तेल के प्रकारों के बारे में विस्तार से जानते हैं –

एस्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल Extra Virgin Olive Oil

एस्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल सबसे अच्छा माना जाता है क्योंकि ये प्राकृतिक तरीकों से निकाला जाता है और इसमें केई मिलावट नहीं होती है।

इसमें फेनोलिक एंटी ऑक्सिडेंट ज्यादा मात्रा में होता है। इसलिए ये हल्दी होता है और इसमें सैचुरेटेड फैट भी नहीं होता है।

एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल 100 प्रतिशत शुद्ध होता है इसमें एंटीऑक्सीडेंट और मिनरल की मात्रा अन्य तेलों से ज्यादा होती है।

इसका स्मोक पॉइंट बहुत कम होता है। इस कारण यह खाना बनाने के लिए सही है या नहीं इस बारे में अलग-अलग मत है।

क्योंकि हल्की ऑच में भी खाना बनाने पर यह जल जाता है।

इस कारणवश इसको खाना बनाने की जगह टॉपिंग की तरह सलाद, सब्जियों, फलों, व अन्य खाद्य पदार्थो के साथ प्रयोग किया जाता है।

इस तेल का प्रयोग वे लोग करते हैं जो लोग स्पोर्टस, बॉडी-बिल्डींग करते हैं।

क्योंकि इसमें एसिड की मात्रा कम होती है और इसे सीधे कच्चा भी खाया जा सकता है।

वर्जिन ऑलिव ऑयल Virgin Olive Oil

वर्जिन ऑलिव ऑयल का प्रयोग खाना बनाने के लिए किया जाता है।

इसमें भी एसिड की मात्रा कम होती है इसी कारण यह ऑलिव ऑयल सबसे ज्यादा पापुलर भी है।

इसके निर्माण में किसी भी प्रकार के केमिकलों का  प्रयोग नहीं किया जाता है।

वर्जिन ऑलिव ऑयल में एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल की अपेक्षा ओलिक एसिडिटी लेवल अधिक रहता है।

साथ ही एक्स्ट्रा वर्जिन ऑल को टॉपिंग की तरह ही प्रयोग कर सकते हैं डीप फ्राई में इसका प्रयोग नहीं करते हैं।

मगर वर्जिन ऑलिव ऑयल का प्रयोग किया जा सकता हैं।

दोनों के स्वाद में भी अंतर होता हैं वर्जिन ऑलिव ऑयल खाना बनाने के साथ-साथ एस्क्ट्रा वर्जिन ऑयल की तरह ही शरीर के लिए फायदेमंद है

इस कारण से इसका प्रयोग सबसे अधिक किया जता है।

रिफांइड ऑलिव ऑयल Refined Olive Oil

इस ऑलिव ऑयल को खाना बनाने के लिए अच्छा माना जाता है और यह आसानी से उपलब्ध भी हो जाता है।

इसमें एक्स्ट्रा वर्जिन और वर्जिन ऑलिव ऑयल की तुलना में कुछ कम मिनरल्स और बिटामिन होते हैं।

प्योर ऑलिव ऑयल Pure Olive Oil

प्योर ऑलिव ऑयल एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल और रिफाइंड ऑलिव ऑयल का मिश्रण होता है।

इसमें पोषण तत्व अर्थात मिनरल्स् व विटामिनों की मात्रा अन्य ऑलिव ऑयल की तुलना में कम होती है।

इससे सौन्दर्य प्रसाधनों में ज्यादा प्रयोग किया जाता है।

अर्थात बालों व त्वचा में इसका प्रयोग लाभकारी होता है। इसको हम खाना बनाने के लिए भी प्रयोग कर सकते हैं।

लैम्पेंट ऑलिव ऑयल Lampent Olive Oil

लैम्पेंट ऑलिव ऑयल का प्रयोग खाना बनाने व सौन्दर्य प्रसाधनों अर्थात त्वचा व बालों के लिए नहीं किया जाता है।

इसका प्रयोग मात्र तकनीकी कार्यों एवं ईधन के लिए ही किया जाता है।

अभी हमने जैतून के तेल के प्रकारों के बारे में जाना है अब हम जैतून के तेल के फायदों के बारे में जानते हैं –

जैतून के तेल के फायदे Olive Oil Benefits in Hindi

दुनिका का सबसे अच्छा एवं कई गुणों का भण्डार है जैतून का तेल।

Jaitun ka tel kis kaam aata hai?

जैतून का तेल पीने के फायदे-शरीर, बालों, त्वचा के लिए यह लाभकारी है। चाहे शुगर कम करनी हो, कैलोस्ट्रोल को घटना हो, अपना वनज कम करना हो, बाल छड़ रहे हो, ड्रैंड्रफ हटाना हो। चहरे से पिंपल हटाने हो।

इन सभी उपायों में जैतून का तेल काम आता है। इस बारे में हम विस्तार से बतायेंगे –

शरीर की सेहत के लिए जैतून का तेल

कब्ज में ऑलिव ऑयल –

वर्तमान समय में भागदौड़ भरी जिन्दगी में हमारा सही खान-पान नहीं हो पाता है। इसकी वजह से हमें आए दिन पेट सम्बन्धी बिमारियां हो जाती हैं।

इन्हीं बिमारियों या परेशनियों में से एक कब्ज भी है। कब्ज की समस्या हो तो हमें ऑलिव ऑयल के प्रयोग से फायदा होता है।

ऑलिव ऑयल (जैतून का तेल) जठरांत्र क्षेत्र और पेट के लिए फायदेमंद होता है।

ऑलिव ऑयल पेट के पाचन तंत्र को मजबूत करता हैं इसको अपने भोजन में रोज शामिल करने से कब्ज में आराम मिलता है।

ऑलिव ऑयल (जैतून के तेल) में विटामिन ई व के, आयरन, फैटिक एसिड, ओमेगा 3 व 6 और एंटी ऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

जिस कारण इसके प्रयोग से हमारे स्वास्थ्य में सुधार आता है व पाचन तंत्र भी ठीक रहता है और कब्ज की समस्या दूर हो जाती है।

कब्ज में जैतून के तेल का उपयोग

ऐसे कई तरीके हैं जिनसे आप कब्ज के लिए जैतून के तेल का उपयोग कर सकते हैं। यहां हम आपके लिए कुछ अलग तरीके बता रहे हैं।

  1. एक्ट्रावर्जिन ऑलिव ऑयल के लिए

दिन में दो बार एक्ट्रावर्जिन ऑलिव ऑयल का उपयोग करें। एक चम्मच सुबह खाली पेट लें और दूसरे चम्मच को सोने से पहले पी लें।

अगर किसी कारण वश आप खाली पेट इसे लेना भूल गये हैं तो खाना खाने के बाद भी ले सकते हैं और तब तक इसका प्रयोग करें जब तक कि कब्ज दूर न हो जाए।

  1. फलों के रस के साथ जैतून का तेल

कब्ज में इसे आप फलों के साथ भी ले सकते हैं। आप फाइबर युक्त फलों जैसे – सेब और संतरे के साथ जैतून का तेल ले सकते हैं।

सुबह-सुबह खाली पेट एक चम्मच जैतून का तेल पियें और उसके बाद फलों का सेवन करें।

अगर इससे आपको कुछ भी फायदा नहीं होता दिख रहा हो तो आप इसे रात में फाइबर युक्त सब्जियों के साथ भी ले सकते हैं।

तब तक इसका प्रयोग करें जब तक कि कब्ज दूर न हो जाए।

  1. संतरे के साथ जैतून का तेल

हर सुबह एक गिलास निचोड़ा हुआ संतरे (नारंगी) के जूस में एक चम्मच जैतून के तेल को शामिल करें और खाली पेट पीएं।

यह आपके पेट से संबंधित सभी समस्याओं को ​ठीक करने के साथ ही कब्ज को भी ठीक करेगा।

  1. नींबू के रस के साथ जैतून का तेल

आप नींबू के रस के साथ भी जैतून का तेल ले सकते हैं।

नींबू पानी के साथ मिश्रित जैतून का तेल का एक चम्मच पीएं, यह आपके कब्ज की बिमारी के लिए फायदेमंद साबित होगा।

आप इसे रात के समय भी ले सकते हैं।

  1. दूध के साथ जैतून का तेल

आप इसी तरह दूध के साथ भी जैतून का तेल ले सकते हैं।

यह उपाय उन व्यक्तियों के लिए अत्यंत फायदेमंद हो सकता है जिनको कब्ज की अत्यधिक परेशानी है।

आपको बस एक कप दूध में एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल (कच्चा जैतून का तेल) का सेवन करना होगा।

आप प्रत्येक दिन दूध में जैतून का तेल मिलाकर खाली पेट पीये हैं।

इसका उपयोग आपकी कब्ज की बिमारी को खत्म कर देगा।

वजन कम करने में जैतून के तेल का उपयोग

जिस प्रकार से हम वर्तमान समय में अपना जीवन  जी रहे हैं अर्थात हमारा खान-पान जिस तरह से है उससे हमारा वजन बढ़ता ही जा रहा है।

समय की कमी के कारण, व्यक्ति बाहर से खाना खाते हैं और कभी-कभी तो हम इतने व्यस्त हो जाते है कि खाना ही भूल जाते हैं या खाने का वक्त ही नहीं मिलता।

इस दिनचर्या के कारण हमारा वजन बढ़ जाता है। कुछ लोग अपना वजन घटाने के लिए डायटिंग भी करते हैं पर लम्बे समय तक नहीं कर पाते हैं।

ऐसी परिस्थिति में, आप अपनी पसंद की कोई चीज नहीं खा सकते हैं।

पर ऐसा हो सकता है यह कोई आश्चर्यजनक नहीं है यह जैतून के तेल की सहायता से संभव हो सकता है।

अपने पसंदीदा खाने में कुछ मात्रा में जैतून के तेल का प्रयोग करें जिससे वजन कम तो होगा ही साथ ही खाने का स्वाद भी बढ़ेगा।

अगर आपका वजन बढ़ रहा है तो आप व्यायाम के साथ-साथ जैतून के तेल का भी प्रयोग कर सकते हैं। इसे एक प्रयोग द्वारा भी परखा गया है।

मधुमेय (डायबिटीज) के लिए जैतून का तेल का उपयोग

वर्तमान समय की व्यस्त दिनचर्या व गलत खान-पान से मधुमेय रोग होना आम बात है।

यदि किसी को मधुमेय रोग हो जाए तो उसे संभलकर रहना पढ़ता है एवं अपने खान-पान व दिनचर्या का विषेश ध्यान रखना पढ़ता है।

मधुमेय में जैतून का तेल लाभकारी साबित हो सकता है।

शोध से पता चला है कि टाइप-2 मधुमेय के लिए जैतून का तेल लाभागारी है।

अगर आप मधुमेय अर्थात डायबिटीज से परेशान हैं तो अपनी खान-पान में जैतून का तेल अर्थात ऑलिव ऑयल का प्रयोग करना चाहिए।

उच्च रक्तचाप में जैतून का तेल उपयोग

अधिक काम करने से व काम के दबाव, तनाव, वजन बढ़ने और कई अलग-अलग कारणों से इन दिनों उच्च रक्तचाप के मुद्दे बुनियादी अर्थात आम हो गए हैं।

अगर हम इसमें ध्यान नहीं देंगे तो यह हमारे जीवन की दुश्मन बन जायेगी।

इसलिए, उस स्थिति में जब आपको उच्च रक्तचाप होता है, उस समय आपको अपने जीवन के तरीके को बेहतर बनाने के लिए, व्यायाम के साथ-साथ, अपने आहार में बदलाव करना चाहिए।

आपको अपने खाने के आहार में जैतून का तेल शामिल करना चाहिए।

यह उच्च रक्तचाप के खतरे को कम करता है, मानी जाने वाली सभी चीजें जैसे इसमें पॉलीफेनोल्स और मोनोसैचुरेटेड असंतृप्त वसा (फैटी एसिड) होते हैं, जो परिसंचारी तनाव को कम करने में मदद करते हैं।

इसके उपयोग के कारण, उच्च रक्तचाप के रोगियों में पल्स दवा लेने की आवश्यकता इसके अतिरिक्त कम होना पाया गया है।

आप नियमित रूप से जैतून का तेल या एक चम्मच जैतून के तेल से बना पौष्टिक भोजन खा सकते हैं।

आंखों के लिए जैतून का तेल उपयोग

हमारी आंखे हमारे लिए कितनी आवश्यक है यह हम जानते है यह हमारे शरीर का जरूरी अंग है।

जिसके बिना हमारे काम रूक जाएंगे। दुनिया को नहीं देख पाऐंगे व अपने रोजमर्रा के काम भी ठीक से नहीं कर पाऐंगे।

वर्तमान समय में कम्प्यूटर, टीवी, मोबाईल पर दिन पर काम करने से या इनमें लगे रहने से हमारी आंखों में जोर पढ़ता है जिस कारण से हमारी आंखों की रोशनी कम होती जाती है।

ऐसे वक्त से बचने के लिए हमें अपनी आंखों का ध्यान रखना चाहिए।

आप इसके लिए जैतून के तेल का प्रयोग कर सकते हैं।

इसके लिए जैतून के तेल से अपनी आंखों के आस-पास हल्के हाथ से मालिस कर सकते हैं।

इससे आंखों में रक्त संचार बढ़ेगा और आंखों को रिलेक्स महसूस होगा।

इसके साथ ही आप जैतून के तेल का खाने में भी प्रयोग कर सकते हैं।

कोलेक्ट्रॉल में जैतून का तेल का उपयोग

हमारी व्यस्त होते जीवन में बिमारियों ने भी अपनी जगह बना ली है उसी में एक है कोलेस्ट्रॉल।

कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए, आप जैतून का तेल का प्रयोग कर सकते हैं।

इसमें सैचुरेटेड और पॉलीअनसेचुरेटेड वसा होता है जो बैड फैड को कम करना है।

ये गुण इसे शरीर में रक्त कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने में सक्षम बनाते हैं।

जैतून के तेल में मोनोअनसैचुरेटेड फैट के अधिक मात्रा में होता है, जो शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल के विकास में सहायता करता।

हड्डियों के लिए जैतून के तेल का उपयोग

हड्डियों की मजबूती उम्र के साथ कम होने लगती है, इन दिनों युवा इसी तरह की परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

काफी देर तक एक सीट पर बैठे रहना और आने जाने के लिए वाहन का प्रयोग करना और कुछ दूर के लिए भी वाहन से जाना।

पैदा चलना ना के बराबर हो गया है जिस कारण हड्डीयों में दर्द हो रहा है। इस समस्या को अगर हमने समय रहते नहीं ठीक किया तो भविष्य में यह एक भयंकर बिमारी का रूप ले लेगा।

इससे दूर करने के लिए, आपको अपने खाने के आहार में जैतून का तेल शामिल करना चाहिए।

जैतून का तेल ऑस्टियोपोरोसिस से बचाने में मदद कर सकता है।

यह हड्डियों के लिए फायदेमंद है और अपने खाने में इसका प्रयोग हमारी हड्डियों को मजबूत करता है।

फिर भी अधिक लाभ के लिए, सलाद की प्लेट पर एक गार्निश के रूप में जैतून का तेल का उपयोग करें

दिमागी तनाव के लिए जैतून के तेल का उपयोग

दौड़भाग भरी जिन्दगी में हमें मानसिक तनाव होना आम बात है। थकान, तनाव, चिन्ता और कई अन्य कारण है जो हमारे दिमाग को प्रभावित करते हैं।

जिस कारण हमें तनाव अल्जाईमर जैसी बिमारी का सामना करना पढ़ता है।

ऐसे में हमें अपनी खाने में जैतून के तेल का प्रयोग करना चाहिए। जिससे इस बिमारी से बचा जा सके।

खान-पान में इसका प्रयोग किया जा सकता है साथ ही इसकी मालिश भी की जा सकती है।

यूनिवर्सिटी ऑफ नवरा और लास पालमास डी ग्रैन कैनरिया के स्पेनिश वैज्ञानिकों के अनुसार, जैतून के तेल के प्रयोग से मनोवैज्ञानिक बीमारी से बचा सकता है।

प्रयोग में 12,059 लोगों को शामिल किया गया। जो इस प्रोजेक्ट का एक हिस्सा थे।

विश्लेषकों ने इन लोगों का 6 साल से अधिक समय तक अध्ययन किया और जीवन के कारकों पर जानकारी जमा की, उदाहरण के लिए, चिकित्सीय इतिहास के अनुसार आहार।

परीक्षा की शुरुआत के दौरान इन लोगों में से किसी ने भी मनमुटाव का अनुभव नहीं किया था, इसका मुख्य कारण इनके भोजन में जैतून के तेल के प्रयोग को माना गया।

शरीर की सूजन में जैतून के तेल का उपयोग

गलत खान पान एवं दिनचर्या के कारण हमारे शरीर में सूजन की बिमारी लग जाती है।

यह अकेली बिमारी नहीं है इसके कारण हमें कई तरह की अन्य बिमारी लगने का खतरा रहता है।

इसलिए अपने खाने में जैतून के तेल का प्रयोग कर हम इसका खतरा कम कर सकते हैं।

सूजन की वजह से होने वाले गठिया की बिमारी में भी यह फायदे मंद होता है।

जैतून के तेल में एन्टीइंफ्लेमेटरी गुण होता है जिस कारण हमारे शरीर में सूजन कम होता है।

हृदय के लिए जैतून के तेल का उपयोग

तनाव भरी जीवन में हृदय रोग होना आम बात हो गयी है।

वर्तमान समय में युवा लोगों में भी इस बिमारी का विस्तार हो रहा है।

हमें अपने हृदय/दिल की बेहतरी के लिए सोचना जरूरी हो गया है।

हम अपने खानपान में किन चीजों व कैसे तेल का प्रयोग कर रहे हैं इसका ध्यान रखना जरूरी हो गया है।

क्योंकि हमारा खान-पान ही है जो हमें स्वथ्य रखने में मदद करता है।

सही खाना पकाने का तेल चुनें।

सभी तेलों में वसा होता हैं, और इसमें डूबे हुए वसा, पॉलीअनसेचुरेटेड वसा और मोनोअनसैचुरेटेड वसा के कुछ संगठन होंगे।

इस तरह, जबकि किसी भी तेल का एक बड़ा चम्मच लगभग 120 कैलोरी देगा, इन कैलोरी की प्रकृति में वृद्धि नहीं होती है।

विशेषज्ञों ने कहा, कुछ प्रकार के वसा, उदाहरण के लिए, कोरोनरी बीमारी के लिए हमारे खतरे का निर्माण कर सकते हैं, जबकि अन्य एक रक्षात्मक लाभ दे सकते हैं।

मक्खन , वसा , नारियल तेल और हाइड्रोजनीकृत तेलों में संतृप्त वसा पाया जा सकता है।

वसा आपके रक्त प्रवाह में एलडीएल कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ा सकता है।

असंतृप्त वसा, जो जैतून का तेल है, एचडीएल अच्छे कोलेस्ट्रॉल स्तरों के साथ मदद कर सकता है।

अतिरिक्त वर्जिन जैतून का तेल मोनोअनसैचुरेटेड असंतृप्त वसा का एक अविश्वसनीय स्रोत है और कोरोनरी बीमारी के लिए किसी के खतरे को कम करने में मदद करता है।

कैंचर से बचाव में जैतून के तेल का उपयोग

Jaitun ka tel peene se kya hota hai-जैतून का तेल विशेषकर कैंसर की रोकथाम करने वाले एजेंटों को देने में सहायक होता है। 

जो लाल रक्त कणिकाओं को नुकसान से बचा सकता हैं – आम तौर पर यह नुकसान कोरोनरी बीमारी, दिल की बीमारियों और स्ट्रोक को रोक सकता है।

जैतून के तेल के नियमित सेवन से कैंसर की कोशिकाओं को खत्म करने में फायदा मिलता है।

त्वचा के लिए जैतून के तेल का उपयोग

ऑलिव ऑयल त्वचा से जुड़े सभी बिमारियों से राहत दिलाने में सहायक है।

यह सूखी त्वचा वाले व्यक्तियों के लिए एक असाधारण वस्तु है।

जैतून के तेल के सामान्य उपयोग से त्वचा को ठीक कर सकते है।

जैतून के तेल में बिटामिन ए, डी, ई और के पाये जाते हैं जो हमारी त्वचा के लिए फायदे मंद होते हैं।

क्या करें- प्रतिदिन पूरे शरीर और शरीर पर जैतून के तेल की मालिश करें। और इसे 15 मिनट के लिए छोड़ दें इसके पश्चात साफ पानी से धो लें।

फटी ऐड़ी के लिए जैतून का तेल –

अपने हील्स अर्थात फटी हुई ऐड़ी को एक्सफोलिएट करें और ऑलिव ऑयल की सहायता से ठीक करें।

क्या करें- गर्म नींबू का पानी लें और इसे जैतून के तेल में मिलाएं। इसे अल्के हाथों से अपनी एड़ी पर लगायें।

इससे आपकी त्वचा में नमी और चिकनाई आएगी। बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए आप मोजे पहन सकते हैं।

किल मुहासों के लिए जैतून का तेल –

बढ़ते प्रदूषण के कारण हमारी त्वचा में किल मुहासे (पिंपल) निकल जाते हैं।

जिससे हमारे चेहरे में दाग लगा जाता है। इससे बचने के लिए हम कई तरह के कैमिकलों से युक्त क्रीम व फेसवास का प्रयोग करते हैं।

जिससे कभी-कभी हमारी त्वचा और खराब हो जाती है।

ऐसी स्थिति में हमें जैतून अर्थात ऑलिव ऑल का प्रयोग करना चाहिए। जिसमें बिटामीन ई होता है जो हमारी त्वचा के लिए फायदेमंद होता है।

इसे प्रयोग से किल मुहासों व पिंपल से बचा जा सकता है। हम किल मुहासों से बचने के लिए जैतून के तेल का फेस पैक बना सकते हैं।

किल मुहासों से बचाव के लिए जैतून के तेल का फेस पैक

इसके लिए हमें दही, शहद, जैतून का तेल चाहिए। हमें एक तिहाई कम दही में एक चौथाई कम शहद के साथ  दो चम्मच जैतून के तेल का अच्छी तरह मिला लेना चाहिए।

जब यह मिश्रण गाड़ा हो जाए तो समझे यह तैयार हो चुका है।

अब आप इसे हमने चेहरे में लगा कर 15 मिनट तक छोड़ दें व गुनगुने पानी से धो लें इसे आप हफ्ते में दो या तीन बार प्रयोग कर सकते हैं।

जिससे किल मुहासों से छुटकारा मिल जाएगा।

जैतून तेल के जीवाणुरोधी प्रभाव

जैतून के तेल में जीवाणुरोधी गुण पाए गए हैं।

जैसा कि यह हो सकता है, त्वचा पर सूक्ष्म जीवों को नियंत्रित करने की जैतून के तेल की क्षमता पर कई जांच की गई हैं।

एक छोटी सी परीक्षा ने त्वचा पर स्टैफिलोकोकस ऑरियस सूक्ष्मजीवों पर जैतून का तेल और नारियल तेल के उपयोग के प्रभावों पर एक ग्रंथि लिया।

परिणामों में पाया गया कि दोनों तेलों ने जीवाणुरोधी गुण प्रदर्शित किए, फिर भी सूक्ष्मजीवों के निपटान में कच्चे नारियल का तेल उत्तरोत्तर व्यवहार्य था।

किसी भी मामले में, जैतून का तेल त्वचा के जीवाणु संक्रमण के उपचार के लिए उपयोग किया जा सकता है।

यह वैसे ही पैरों के अल्सर वाले व्यक्तियों में सुधार कर सकता है जैसे कि टाईप 2 मधुमेह द्वारा लाया गया।

झुर्रियों के लिए जैतून का तेल

बढ़ती उम्र के साथ हमारे चेहरे में झुर्रियां आ जाती है।

पर वर्तमान समय में हमारे आस-पास इतना प्रदूषण है कि इसके कारण ही हम अपनी उम्र से पहले ही ज्यादा उम्र के नजर आने लगते हैं।

इसके लिए हम जैतून के तेल का प्रयोग कर सकते हैं। जैतून का तेल हमारे चेहरे के लिए फायदेमंद होता है।

झुर्रियों के जैतून के तेल को तैयार करने की विधि

इसके लिए हमें एक चम्मच नींबू का रस, थोड़ा सा समुद्री नमक, तीन चम्मच जैतून का तेल लेकर इसको आपस में मिलाना है और झुर्रियों वाली जगह पर लगाकर कुछ देर में गुनगुने पानी से इसे धो सकते हैं।

इसको लगातार कुछ समय तक करने से झुर्रियों को कम करने में मदद मिलेगी।

मेकअप हटाने के लिए जैतून का तेल

मेकअप करना हर महिला एवं युवति को पसंद है।

मगर रात को सोने से पहले किसी भी तरह का किया गया मेकअप निकालना जरूरी होता है।

कई बार महिलाएं बाजार में मिलने वाला केमिकल युक्त मेकअप हटाने के लिए बनाया गया क्रिम या लोशन का प्रयोग करते हैं।

जिससे मेकअप तो हट जाता है पर आपके चेहरे में इसका बुआ प्रभाव पड़ता है।

इसलिए हमें केमिकलयुक्त की जगह जैतून के तेल का प्रयोग करना चाहिए।

जैतून के तेल को मेकअप निकलाने के लिए प्रयोग करने की विधि

इसके लिए एक साफ्ट रूई में जैतून का तेल लें और उससे हल्के हाथों से अपने चेहरे को साफ करें। इससे अपनी आंखों के नीचे व ऊपर लगे मेकअप को भी हटा सकते हैं।

इसके पश्चात इसे हल्के गुनगुने पानी से धो ले।

जैतून के तेल से मेकअप तो हटेगा ही साथ ही आपकी त्वचा भी मुलायम हो जाएगी।

बालों के लिए जैतून के तेल के फायदे-jaitun ka tel for hair in hindi

हर एक की ख्वाहिस होती है कि अपने बालों को सिल्की रखे। खास कर महिलाओं व युवतियों में बालों के प्रति क्रेज कुछ ज्यादा ही होता है।

अपने बालों को लम्बा रखना उन्हें भाता है।

इसके लिए वह कई प्रकार के सैम्पू, तेल व कन्डीसनर का प्रयोग करते हैं।

मगर जैसा वह चाहते हैं वैसा फिर भी नहीं हो पाता है। इनको बदलते -बदलते उनकी जेब और बालों की हाल खराब हो जाती है।

अगर हम इसके लिए जैतून के तेल का प्रयोग करते तो वह काफी फायदते मंद होता है।

जैतून का तेल अपने आप में ही काफी है मगर अगर इसका प्रयोग अन्य चीजों के साथ किया जाय तो इसके गुणों में और भी वृद्धि होती है और इसका असर भी ज्यादा होता है।

बालों को लम्बा करने के लिए जैतून का तेल

दो चम्मच शहद के साथ एक अण्डे के पीले भाग को मिलाकर एक कप जैतून के तेल में डालना है।

इसको सही तरह से मिलाकर बालों में लगाना है कुछ देर तक लगे रहने देना है जब तक वह सूख न जाए। फिर इसे गुनगुने पानी से साफ कर धो लेना है।

रूसी में जैतून के तेल

रूसी या डेंड्रफ हर किसी को कम या ज्यादा होता ही है। इसके लिए हम कई प्रकार के सैम्पू का प्रयोग करते हैं।

यह केमिकल युक्त सैम्पू कुछ वक्त तक ही इसे हटाते हैं और कुछ समय बाद रूसी फिर से वापस आ जाती है।

हमें अपने आस पास की प्राकृतिक चीजों में ध्यान देना चाहिए जो हमारे लिए फायदेमंद तो है पर हमें नुकसान नहीं पहुंचाती ।

ऐसा ही एक तेल है जो कई गुणों से युक्त है जैतून का तेल। इसके लिए आप ऑलिव ऑयल (जेतून का तेल) का प्रयोग कर अपने बालों में लगा सकते हैं।

जिससे रूसी से आराम मिलेगा व इसके कम करने में मदद मिलेगी।

रूसी के लिए जैतून के तेल का प्रयोग

दो चम्मच जैतून के तेल में अण्डे के सफेद हिस्से को अच्छी तरह से मिला देना है।

अब इसे बालों में लगाकर सावर कैप से ढक देना है। करीब 15 मिनट तक रहने देने के बाद इसे धो देना है मगर ध्यान रहे इसमें हमें गर्म पानी का  प्रयोग नहीं करना है।

धोने के लिए शैम्पू का प्रयोग कर सकते है।

अगर आपको अण्डे से एलर्जी है तो आप जैतून के तेल को बादाम के तेल के साथ मिलाकर सोने से पहले अच्छी तरह से बालों में लगा सकते हैं।

और अगली सुबह धो दें।

जैतून के तेल के नुकसान

जिस चीज के फायदे हैं ते उसके नुकसान भी हैं।

  • जिनकी त्वचा काफी शुष्क है तो उनको जैतून के तेल का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  • तेलीय त्वचा वालों के लिए जैतून का तेल नुकसानदेय हो सकता है। उनको इसके प्रयोग से कील मुहासे हो सकते हैं। अतः आप अपनी त्वचा में जैतून के तेल का प्रयोग न करें।
  • इसके प्रयोग से किसी-किसी को लो-ब्लड प्रेसर की समस्या हो सकती है।
  • इसके प्रयोग से ब्लड शुगर कम हो सकता है। अतः जिनको डायबटिज की बिमारी है उनको इसका प्रयोग सीमित मात्रा में करना चाहिए व अपना ब्लड शुगर को चैक करना चाहिए।
  • अत्यधिक मात्रा में इसके प्रयोग से पेट की समस्या हो सकती है।
  • एलर्जी की समस्या हो सकती है।
  • लो ब्लड प्रेसर की समस्या हो सकती है।
  • बच्चों को स्तनपान कराने वाली महिला व गर्भवर्ती महिलाओं को इसके प्रयोग से पहले अपने डाक्टर से सलाह कर लेनी चाहिए
  • ऑलिव ऑयल कैलोरी से भरपूर होता है अतः जिनको हृदय सम्बन्धी बिमारी है उनको इसका प्रयोग सावधानी से करना चाहिए।
  • जैतून के तेल को खुले घाव में नहीं लगाना चाहिए।

Jaitun ka tel kisse banta hai-जैतून का तेल किससे बनता है?

जैतून का तेल जैतून के फलों से बनता है। जैतून पेड़ जो भारत, मध्य पूर्व, और दक्षिण यूरोप में पाया जाता है।

जैतून के फलों को मसलकर उनसे तेल निकाला जाता है। इसमें ताजा फलों को पानी में डालकर उनसे तेल निकालने की प्रक्रिया होती है, जिसे ‘कोल्ड प्रेसिंग’ कहते हैं। यह प्रक्रिया तापमान को कम रखती है ताकि तेल की गुणवत्ता कम न हो जाए। इसके बाद तेल को छान कर शीशी में भरा जाता है।

Jaitun ka tel ki malish ke fayde-जैतून के तेल की मालिश के फायदे

जैतून के तेल में विटामिन ई और एंटीऑक्सिडेंट होते हैं जो त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। जैतून के तेल की मालिश करने से त्वचा में नमी आती है जो त्वचा को मुलायम और चमकदार बनाती है। इसके अलावा, जैतून के तेल की मालिश से त्वचा के रूखेपन, झुर्रियां, दाग-धब्बे और अन्य समस्याओं से राहत मिलती है।

जैतून तेल की मालिश के फायदे बच्चों के लिए

  • शिशुओं के लिए फायदेमंद: जैतून के तेल की मालिश शिशुओं के लिए बहुत फायदेमंद होती है। यह मदद करता है उनकी त्वचा को मुलायम, चमकदार और स्वस्थ बनाए रखने में। जैतून के तेल की मालिश से उनके बाल मजबूत होते हैं और उनके शरीर के दर्द को कम किया जा सकता है।
  • दांतों के लिए फायदेमंद: जैतून के तेल की मालिश से शिशुओं के दांत मजबूत होते हैं और उनके मुंह के संक्रमण से रक्षा की जा सकती है। इससे उन्हें दांतों के संबंधित समस्याओं से राहत मिलती है।
  • पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद: जैतून के तेल की मालिश से शिशुओं के पाचन तंत्र को सही तरीके से काम करने में मदद मिलती है। यह उनकी गुटनों को राहत देता है और उन्हें कब्ज से बचाता है।

नाभि में जैतून का तेल लगाने से क्या होता है?

नाभि में जैतून के तेल को लगाने के कुछ लोग मानते हैं कि इससे कुछ स्वास्थ्य लाभ होते हैं। हालांकि, इस बात की कोई वैज्ञानिक रूप से सत्यता नहीं है और यह एक ऐसी आधारभूत दवा नहीं है जो किसी भी बीमारी को ठीक कर सकती है।

कुछ लोग मानते हैं कि नाभि में जैतून के तेल को लगाने से पेट में गैस कम होती है और पाचन तंत्र को सही तरीके से काम करने में मदद मिलती है। इसके अलावा, इससे त्वचा को मुलायम बनाने का दावा भी किया जाता है।

हालांकि, यदि आप नाभि में जैतून के तेल को लगाना चाहते हैं, तो इसे ध्यान से करें और सावधानी बरतें। इसे अधिक मात्रा में लगाने से नुकसान हो सकते हैं। अगर आपके पास किसी बीमारी के लिए किसी दवा की जरूरत हो तो उससे पहले अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर लें।

विशेष :-

यदि आप खाने के बाद या जैतून के तेल को लगाने के मद्देनजर किसी भी प्रकार की अतिसंवेदनशीलता, उत्तेजना या बेचेनी महसूस करते हैं, तो इसे जल्दी से उपयोग करना छोड़ दें और अपने प्राथमिक चिकित्सक से पूछें।

इसी तरह, यदि आपकी त्वचा नाजुक है, तो जल्द ही आप किसी चीज से प्रतिकूल रूप से प्रभावित होते हैं या आप किसी भी प्रकार की दवा ले रहे हैं, इस परिस्थिति में इस तेल का उपयोग करने से पहले विशेषज्ञ से सलाह लें।

किसी भी चीज का अत्यधिक उपयोग असुरक्षित हो सकता है।

यह मानक अतिरिक्त रूप से जैतून के तेल पर लागू होता है, फिर भी इस आधार पर आशंकित नहीं होना चाहिए कि जैतून के तेल के कई फायदे हैं।

जब भी उचित रूप से जैतूल के तेल कर प्रयोग किया जाता है, तो यह शरीर के लिए एक फायदेमंद होता है।

हर चीज के कुछ फायदों के साथ नुकसान तो है मगर हम उसके अनगिनत फायदों को छोड़कर कुछ नुकसान की ओर नहीं जा सकते।

जैतून के तेल के गुणों के सामने यह कुछ परेशानियों को दरकिनार किया जा सकता है। इसका प्रयोग सावधानी से कर हम इन समस्याओं से बच सकते है।

अतः हमें जैतून के तेल का प्रयोग अपने स्वास्थ्य को सही करने के लिए करना ही चाहिए।

जैतून के तेल से होने वाले फायदों व नुकसान के बारे में हमें जरूर बताऐं ।

हमारे कमेंट बाक्स में जरूरी लिखें। धन्यवाद।

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