भूमि आंवला के फायदे-Bhumi Amla Ke Fayde

भूमि आंवला (bhumi amla) या भुई आंवला के वृक्ष के बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी होती है। क्या आप इसके बारे में जानते हैं नहीं तो हम आपको इस लेख में इसके बारे में बताने जा रहे हैं।

भूमि आंवला या कहें भुई आंवला (bhumi amla) एक आयुर्वेदिक जड़ी—बूटी दवा है। भूमि आंवला के फल बिल्कुल आंवले जैसे ही दिखाई देते हैं। इस पौधा आकार में बहुत छोटा होता है।

इसलिए इसे भूमि आंवला या भुई आंवला कहा जाता है। इसका वृक्ष बरसात के मौसम में आपने आप उठा जाते हैं और छायादार एवं नमी वाले स्थान में यह पूरे वर्ष पाये जाते हैं। इस पौधें को पूरा उखाड़कर व सुखा कर प्रयोग किया जाता है।

आयुर्वेद विज्ञान के अनुसार भुई आंवला का प्रयोग कई बीमारियों के ईलाज में किया जाता है। इसका प्रयोग भूख की कमी, और कामोत्तेजना बढ़ाने में किया जाता है।

इसके आलवा भूमि आंवले का प्रयोग कई अन्य बिमारियों में भी किया जाता है। इसको आसानी से जड़ी—बूटी की दुकान या आयुर्वेदिक दवा की दुकान से लिया जा सकता है। इस लेख में हम आपको इसके बारे में पूरी देंगे।

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भूमि आंवला क्या है? What is Bhui Amla in Hindi

भूमि आंवला या भुई आंवला (bhumi amla) के पौधेें बरसात के मौसम में उत्पन्न होते हैं और इनका आकार छोटा होता है। और शरद ऋतु में फलने—फूलने लगते हैं।

इसके पश्चात गर्मी के मौसम में यह सूख जाते हैं। इसका फल आंवले के फल की तरह गोल होते हैं पर इनका आकार उसकी अपेक्षा छोटा होता है।

भुई आंवला स्वाद में मीठा और कसैला होता है। खांसी, खुजली, अधिक प्यास लगना, कफ और बुखार आदि में भूमि आंवला लाभदायक होता है।

इसके अलावा यह लीवर के रोगों के लिए यह रामबाण दवा के रूप में कार्य करता है। इसका लेप घाव को जल्द ठीक कर देता है। कुष्ट रोगों में यह फायदेमंद है।

भूमि आंवला के तीन प्रजातियां पायी जाती हैं —

1. Phyllanthus urinariaLinn-

इसका पौधा शाखाओं से युक्त, सीधा होता है। इसके पत्ते चपट और छोटे होते हैं। इसके पत्ते आंवले के पत्तों के समान दिखाई देते हैं। लेकिन इनका आकार उनकी पेक्षा छोटे व चमकीले होते हैं। इसका फल गोलाकार होता है। यह फल शाखाओं में एक कतार में निकले हुये होते हैं।

2. Phyllanthus maderaspatensis L —

यह पौधा जमीन पर फैलता है और यह आकार में सीधा होता है। इसके तने, शाखाएं व फल का रंग लाल होता है। इसके पत्ते आंवले की तरह चिकने और चमकीले हरे रंग के होते हैं। इसके फूल गोल आकार के होते हैं। इसका प्रयोग कफ की बिमारी, पेशाब से संबंधित रोग, भूख कम लगने व कामोत्तेजना को बढ़ाने में किया जाता है।

3. Phyllanthus niruri L —

चिकित्सा व वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सिर्फ Phyllanthus urinaria Linn. का ही प्रयोग करना उचित होता है।

भूमि आंवला के अन्य नाम

भूमि आंवला का वैज्ञानिक नाम फाइलैन्थस यूरीनेरिया (Phyllanthus urinaria Linn., Syn-Diasperus urinaria (Linn.) Kuntze, है, और इसका कुल यूफॉर्बिएसी (Euphorbiaceae) है। इसे अलग—अलग देश या क्षेत्र में अलग—अलग नामों से जाना जाता है।

हिन्दी में में इसे भूमि आंवला, भुई आंवला, भुरि आंवला, लाल भुइऔ आंवला, हजारमणी और संस्कृत में इसे ताली, भूम्यामलकी, तामलकी, बहुफला, बहुवीर्या, भूधात्री नामों से जाना जाता है । अंग्रेजी में इसे लीफफ्लावर (Leafflower), चैम्बरबिटर (Chamber bitter), स्टोनब्रेकर (Stonebreaker) कहते हैं।

कनाडा Kannada में इसे केम्पूकीरानेल्ली (Kempukiranelli), नेपाल में भुई आंवला (Bhui anwala), कन्थड (Kanthad), गुजराती में इसे भोंएआवली (Bhoen awali), तमिल में Tamil – शिवाप्पुनेल्ली (Shivappunelli), बंगाली में भुई आमला (Bhui amla), हजारमनी (Hazarmani) मराठी में भुई आंवला कहा जाता है।

भूमि आंवला या भुई आंवला के फायदे-Bhumi Amla Ke Fayde

भूमि आंवला के गुणों का पूरा फायदा प्राप्त करने के लिए इसके औषधीय गुणों व प्रयोग विधि के साथ ही इसकी सही मात्रा व विधि के बारे में सही जानकारी होनी आवश्यक है। इसके बारे में हम आपको यहां पूरी जानकारी देने जा रहे हैं —

सांस की बीमारी में भूमि आंवला के लाभ –

सांस की बिमारियों में भूमि आंवला काफी लाभदायक होता है।

  • इसके लिए भुई आंवला की 10 ग्राम जड़ को पानी के साथ पीस लें। अब इसमें 1 चम्मच मिश्री या फिर आप शहद को भी मिल सकते हैं। इस तैयार मिश्रण को पिलाने या फिर नाक के रास्ते देने से सांस से जुड़ी बिमारियों में लाभ होता है।
  • भूमि आंवला के 50 ग्राम पंचांग को आधे लीटर पानी में उबाल लें जब तक यह एक चौथाई भाग तक न रह जाय। इस तैयार काढ़े की एक चम्मच मात्रा को दिन में दो बार पीने से सांस के रोगों में फायदा होता है।

घाव सुखाने में भूमि आंवला का प्रयोग —

  • भूमि आंवला के रस को सीधे घाव पर लगाने पर घाव पूरी तरह से ठीक हो जाता है। इसक लिए आप निम्न विधियों को अपना सकते हैं।
  • भूमि आंवला या भुई आंवला के पत्तों का काढ़ा तैयार कर इससे घाव को साफ करने से भी घाव में लाभ होता है और वह तेजी से ठीक होता है।
  • भूमि आंवला पंचांग को चावल के साथ पीसकर इस तैयार लेप को घाव पर लगाने से घाव की सूजन ठीक होती है।
  • भूमि आंवला के कोमल पत्तों को अच्छी तरह से पीसकर तैयार लेप को घाव पर लगाने से घाव जल्दी ठीक हो जाता है।

खुजली में भूमि आंवला के लाभ —

  • भूमि आंवला के पत्तों को अच्छी तरह से पीस लें। अब इस तैयार मिश्रण पर नमक मिला लें इस लेप को जिस स्थान पर खुजली होती है उस स्थान पर लगाए इसको लगाने से खुजली में लाभ होता है।
  • अगर आपके किसी भाग में चोट लगी हो तो आप वहां भूमि आंवला के पत्तों को पीस कर लगा सकते हैं। इससे दर्द कम होता है।

भूमि आंवले के आंखों के रोगों में फायदे —

  • भूमि आवंला (Bhumi Amla) को सेंधा नमक के साथ तांबे के बर्तन में पानी डाले और इसको आपस में घिसे। घिसने से जो लेप तैयार होगा उसको आंखों में लगाने से आंखोें के रोग में फायदा होता है। 

डायबिटीज में भूमि आंवला के फायदे —

  • 15 ग्राम भुई आंवला चूर्ण या पाउडर में 18 से 20 काली मिर्च को पीस कर मिला लें। इस तैयार मिश्रण को  दिन में दो तीन बार सुबह व शाम को सेवन करने से डायबिटीज में फायदा होता है।
  • 2 चम्मच देसी घी में लगभग 20 मिली भूमि आंवले के रस को मिलकर दिन में दो समय खान से  डायबिटीज में लाभ होता है।

मुंह के छालों में भूमि आंवला के लाभ —

  • भुई आंवले लगभग 50 ग्राम पत्ते ले लें। इन पत्तों को 200 मिली पानी में मिलाकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े का कुल्ला करने से मुंह के छालों में लाभ होता है।

भूमि आंवला के खांसी में फायदे —

  • भूमि आंवला (Bhumi Amla) के 50 ग्राम चूर्ण को आधे लीटर पानी के साथ गर्म कर उबाल लेना चाहिए जब इसकी मात्रा एक चौथाई रह जाय तो इस  तैयार काढ़े का दिन में दो बार एक—एक चम्मच सेवन करने से खांसी में लाभ होता है।
  • भूमि आंवला, सारिवा, पिप्पली, लाल चन्दन और अतीस आदि द्रव्यों से बने घी का सेवन करने से भी खांसी में लाभ होता है।

भूमि आंवला के आंतों के रोग में लाभ —

  • भूमि आंवला को छाया में सुखा लें फिर इसको कूट लें। इस कूटे भुई आंवला को पानी में अच्छी तरह से पका लें ध्यान रहे 10 ग्राम मात्रा को 400 मिली पानी में पकायें मात्रा का विशेष ध्यान रखें। जब इसकी मात्रा एक चौथाई रह जाय तो इसको छान लें। इस तैयार मिश्रण को सुबह खाली पेट और रात को खाना खाने के एक घण्टे बाद लें। ऐसा करने से आंतों से सम्बन्धित रोगों में फायदा होता है। अल्सर में यह दवा बहुत ही फायदेमंद होती है।

पेट के रोगों में भूमि आंवला के लाभ —

  • भुई आंवला के पत्तों को पानी के साथ उबालकर उसे छान लें। इस तैयार मिश्रण को थोड़ी—थोड़ी मात्रा में पीने से पेट दर्द व अन्य रोगों में लाभ होता है।
  • भूमि आंवला की जड़ व इसके पत्तों के काढ़े के प्रयोग से भी लाभ होता है।

भूमि आंवला के बुखार में फायदे —

  • भूमि आंवला (bhumi amla) के पत्तों लें, इन पत्ते की मात्रा की एक चौथाई काली मिर्च लें। इन दोनों को  पीस कर एक महीन मिश्रण बना लें। अब इस मिश्रण की छोटी—छोटी गोलियां बनाकर दिन में दो बार 2—2 गोली लें। अगर आपको तेज बुखार है तो इसको लेने से बुखार में लाभ होगा।
  • घी में भुई आंवला, सारिवा,पिप्पली, लाल चन्दन, व अतीस को पका लें। इसका प्रयोग करने से भी बुखार में लाभ होता है।

मूत्र रोग में भूमि आंवल के लाभ —

  • 10 मिली भूमि आंवला के रस में जीरा व चीनी को मिलाकर मिश्रण तैया करें। इस मिश्रण को पीने से  पेशाब में जलन सहित अन्य मूत्र से जुड़ी हुई बिमारियों में भी लाभ होता है।
  • 10 मिली भूमि आंवले के रस में लगभग 10 ग्राम गाय के घी को मिलाकर पीने से पेशाब के रुक-रुक कर आने की समस्या से निजात मिलती है।

भूमि आंवला अन्य फायदे —Bhumi Amla Ke Anya Fayde

  • लीवर में सूजन हो या उसका आकार बढ़ गया है तो यह उसके लिए बहुत असरदार दवा है।
  • पीलिया होने पर छाछ में इसकी पत्तियों के पेस्ट को मिलाकर पीने से लाभ होता है।
  • किडनी के इन्फेक्शन में यह बहुत फायदेमंद है। यह किडनी को स्वस्थ रखने में मदद करता है। भूमि आवंला डाइयूरेटिक है जिससे यूरिन ज्यादा बनती है इस कारण से शरीर की पूरी सफाई हो जाती है।
  • यह  हेपेटाइटिस B और C के लिए बहुत ही फायदेमंद दवा है। क्योंकि इसमें एन्टीवायरल गुण पाये जाते हैं।
  • ब्रेस्ट में सूजन या गांठ होने पर इसके पत्तों के पेस्ट को छाती में लगाने से लाभ होता है।

भूमि आंवले का प्रयोग —

भूमि आंवला बाजार में रस, चूर्ण, काढ़े के रूप में आसानी से मिल जाता है। साबुत रूप में भी मिल जाता है। यह अलग—अलग कम्पनी के पैकेट के रूप में मिलता है जैसे — पतंजली, बैद्यनाथ आदि। इसका प्रयोग कैसे व कितीन मात्रा में किया जाय यह आगे दिया है। 

  • भूमि आंवला का रस (Bhumi amla juice) – 10-15 मिली
  • भूमि आंवला चूर्ण (Patanjali bhumi amla powder) – 3-6 ग्राम
  • भूमि आंवला का काढ़ा – 10-30 मिली

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