भगन्दर का घरेलू उपचार | Bhagandar ka Gharelu Upchar

Bhagandar ke gharelu upchar – भगन्दर के घरेलू उपचार के बारे में जानने से पहले हमें यह जान लेना जरूरी है कि भगन्दर क्या है और कैसे होता है।

गुदा द्वार से जुड़ी हुई बिमारी भगन्दर को अंग्रेजी भाषा में फिस्टुला कहते हैं और हिन्दी में इसे बबासीर के नाम से भी जाना जाता है।

लम्बे समय तक इसका सही इलाज नहीं होता है तो यह खतरान हो जाता है।

इसलिए कभी भी भगन्दर को हल्के में नहीं लेना चाहिए। इसका इलाज आपरेशन के द्वारा ही होता है लेकिन सही तरीके का खानपान व रहनसहन हमें इस बिमारी से बचा सकता है।

यदि इसका इलाज न कराय जाय तो यह एक कैंसर का रूप ले सकता है।

इससे होने वाले कैंसर को रिक्टम कैंसर कहते हैं। हालांकि इस बात की सम्भावना कम होती है कि यह जानलेवा साबित हो मगर किसी—किसी के लिए यह जानलेवा बन जाता है।

भगन्दर गुदा और मलाशय के आस—पास के भाग में होने वाला रोग है जिसे में नाड़ी में होने वाला रोग भी कह सकते हैं।

इसमें गुदा के आसपास का मांस बड़ कर दानों का रूप ले लेता तो पीड़ादायक होता है और इसके फूटने से रक्त का प्रभाव बड़ जाता है।

फिस्टुला में गुदा व वस्ति के चारों तरफ त्वचा फैल जाती है।

इस बड़े हुए मांस का एक भाग मलाशय के भीतर और दूसरा हिस्सा बाहर की ओर होता है।

इसका समय से इलाज न कराने पर या यह रोग अधिक पुराने होने पर हमारी हड्डियों में सुराख कर देता है। जिससे हड्डियों से मवाद और रक्त निकलने लगती है।

कुछ समय बार इसी मार्ग से मल भी आने लगता है।

यह रोग जल्द समाप्त नहीं होता है और हमारे लिए काफी कष्टदायक होता है।

तो आइये आगे हम इससे प्रकार, दुष्प्रभाव व इसके इलाज के बारे में जानते हैं।

भगन्दर का घरेलू उपचार- Home remedies for Fistula

भगन्दर एक ऐसी बिमारी है जिसका समय से इलाज न कराने की स्थिति में यह बिमारी खतरना रूप ले लेती है।

इस बिमारी के लिए आपरेशन ही किया जाता है पर इसके होने से बताने के लिए हम घरेलू उपचार अपनाकर इस बिमारी से बच सकते हैं।

1. मानव शरीर में फाइबर की मात्रा को संतुलित करना

भगन्दर होने की स्थिति में कब्ज की समस्या पैदा हो जाती है। कब्ज की समस्या से बचने के लिए फाइबर युक्त भोजन करना चाहिए।

फाइबर बढ़ाने के लिए शाकाहारी भोजन बेहतर विकल्प है। भगंदर रोग के दौरान मांसाहारी भोजन नहीं खाना चाहिए।

2. गुनगुने पानी से सिकाई करें

भगंदर होने पर गुदा भाग अर्थात मल द्वारा वाले हिस्से को गुनगुने पानी से सिकाई करना इस रोग में फ़ायदेमंद हो सकता है।

नीम के पत्तों का लेप – नीम की पत्तियों को पहले उबालकर कर उससे पानी अर्थात जिस पानी में उसे उबाला गया है उसी के साथ उसे धो देना चाहिए।

पत्तियों को उबाल कर उसे घाव में लगाने से भगन्दर में लाभ होगा।

3. नीम और घी का लेप

यह लेप बहुत उपयोगी हो सकता है।

इसमें नीम की पत्ती, देशी घी और तिल बराबर मात्रा बांटकर उसे पीस लेने के पश्चात उसमे जौ का आटा मिलाकर उसका लेप बना लेना चाहिए।

अब इस तैयार लेप को किसी साफ कपड़े में बाँध कर भगंदर के स्थान पर बांध लेना चाहिए।

4. अनार के पत्तों का प्रयोग

अनार के पत्ते को पानी में उबाल लेने के बाद उस पानी से फिस्टुला धोने से बहुत अधिक लाभ प्राप्त होता है।

5. केला और कपूर का प्रयोग

पके केले के बीच में चीरा लगा कर उस पर कपूर रखकर खाना चाहिए, इससे आराम मिलता है।

ध्यान देने वाली बात: इस केले को खाने से एक घंटे पहले और खाने के एक घंटे बाद कुछ नहीं खाना चाहिये।

6. काली मिर्च का उपयोग

काली मिर्च के प्रयोग से भगन्दर रोग में आराम मिलता है।

इसके लिए काली मिर्च और लाजवंती को पीसकर लेप बनाने और उस लेप को फिस्टुला के स्थान पर लगाने से लाभ प्राप्त होता है।

7. लहसुन का उपयोग

लहसुन जीवाणु खत्म करने की बेहतरीन दवा है।

लहसुन को पीसकर घी में अच्छी तरह भून लेना चाहिए और उसको पीस कर लेप तैयार कर भगंदर पर लगाना चाहिए इससे लाभ प्राप्त होगा।।

8. त्रिफला का उपयोग

भगन्दर में त्रिफला बहुत उपयोगी होता है। त्रिफला से हाथ धोने के बाद उसपर बिल्ली या कुत्ते की हड्डी का चूर मिलाकर भगंदर पर लगाने से आराम प्राप्त होता है।

9. मनार के दूध का प्रयोग

मनार के ताजे दूध में रुई भीगा कर रख ले, अब इस भीगी हुई रुई को किसी मिट्टी के दिये या हांडी में सरसों के तेल के साथ रखकर जलाना चाहिए।

जब रुई जलने लगे तब किसी मिट्टी के बर्तन में काजल बना ले। इस बने हुए काजल को भगंदर व उसके आस पास भी लगाने पर लाभ मिलता है।

10. चोपचीनी और मिस्री का प्रयोग

फिस्टुला का उपचार चोपचीनी व मिस्री के सहयाता से भी हो सकता है. इसके लिए आपको मिस्री को महीन या बारिक पीसकर समान मात्रा में इसमें घी मिलायें. फिर इसके छोटे—छोटे जो लगभग 20 ग्राम के हों लड्डू बना कर सुबह एवं शाम नियमित रूप से खाना चाहिए।

इस दौरान ध्यान देने योग्य यह होगा कि आपको नमक, तेल, खटाई, चाय, मसाले आदि नहीं खाने है। क्योंकि इन्हें खाने से इसका प्रभाव कम हो सकता है।

यदि उपचार के दौरान आपको भूख लग जाये तो आप सादी रोटी का सेवन कर सकते हैं।

11. शहद

फिस्टुला के उपचार में शहद व सेंधा नमक को मिलाकर लेना चाहिए व इसकी एक बत्ती तैयार करने के पश्चात इस बत्ती को फिस्टुला के नासूर में रखना चाहिए।

यदि हम इस उपाय को नियमित तौर पर अपनाते हैं तो इस विधि से अवश्य ही लाभ होगा।

12. केला और कपूर

पके हुए केला व कपूर फिस्टुला के उपचार के लिए लाभदायक होता है।

इसके लिए आपको एक पके हुए केले के बीच में चाकू से चीरा लगा कर चने के दाने के छोटे आकार का कपूर को रख दें और फिर इसको खा लेना चाहिए और इसको खाने के एक घण्टे तक कुछ भी नहीं खाना चाहिए।

शुरूवाती रूप के भगन्दर में यह फायदेमंद होता है।

भगन्दर के प्रकार- Types of fistula

भगन्दर प्रमुख रुप से दो प्रकार के होते हैं।

अपूर्ण भगंदर

अपूर्ण भगंदर incomplete fistula में भगन्दर रोग का सिर्फ एक ही मुंह बन पाता है।

पूर्ण भगंदर

पूर्ण भगन्दर में इसका मुंह दो जगह बनता है। यह अपूर्ण भगन्दर से अधिक घातक है।

आइये अब इससे घरेलू उपचारों के बारे में जान लेते हैं।

भगन्दर रोग के दुष्प्रभाव- Side effects of fistula

गुदा भाग से लगा हुआ हिस्सा पीले रंग का हो जाता है। मल द्वार आस—पास बड़े आकार का दाना या फोड़ा बन जाता है जिसमे मवाद भरी होती है।

और यह मवाद कुछ—कुछ समय के अन्तराल में निकलती रहती है।

भगंदर का उचित समय पर उपचार न करने की स्थिति में यह रोग कैंसर बन सकता है।

ऐसी स्थिति में यह कुछ समय पश्चात अपना मुंह दूसरी तरफ भी बना लेता है।

दो मुख बनने पर यह अधिक कष्टदायी होता है।

किसी—किसी परिस्थिति में यह भी देखा गया है कि इसका दूसरा मुंह जांघ के किसी हिस्से पर निकल आता है तो यह परिस्थिति काफी खतरनाक रूप ले लेती है।

क्योंकि इस दूसरे मुंह से मवाद के साथ—साथ खून और दुर्गंध के साथ मल रिसने लगता है।

भगंदर अर्थात बबासिर रोग होने के बाद रोगी व्यक्ति को चलने-फिरने, कुर्सी पर या किसी भी स्थान पर बैठने व अपनी पीठ के बल आराम करने व शौचालय जाने पर अत्यधिक पीड़ा का सामना करना पड़ता है।

भगन्दर होने के कारण- Causes of fistula

भगंदर होने के कई कारण हो सकते हैं। जैसे —

  • गुदा- anal द्वार अर्थात मल द्वार की ठीक प्रकार से सफाई न करना।
  • मल द्वार को अत्यधिक खुजला देना।
  • मल द्वार के बालों को न हटाना।
  • साइकिल, बाइक चलाना या अत्यधिक समय तक बैठक कर यात्रा करते रहना।
  • कब्ज की समस्या को काफी समय हो जाना।
  • अधिक मसालेदार व तीखी चीजों का नियमित रूप से सेवन करना।
  • गुदा द्वार पर चोट लगना भी एक कारण हो सकता है।
  • किसी एक ही जगह पर बिना हिले बहुत अधिक समय तक बैठे रहना।

शोधकर्ताओं व डॉक्टरों के रिसर्च कर बताए गए इन कारणों से भगंदर रोग होने की संभावना अधिक रहती है, डॉक्टरों का यह भी कहना है की इसके अलावा भी कारण हो सकते हैं जिससे भगन्दर होने की सम्भावना बनी रहती है।

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भगन्दर के लक्षण – Fistula symptoms in Hindi

भगन्दर रोग के निम्न लक्षण होते हैं —

  • अधिक दिनों तक गुदा अर्थात मलद्वार के आस—पास दर्द और सूजन रहना।
  • बैठते, उठते व खांसते समय गुदा (anal) में दर्द होने पर भगन्दर होने की सम्भावना हो सकती है।
  • गूदा के पास फुंसी या फोड़ा होना
  • बाहर जाते समय अर्थात लैट्रिन करते समय दर्द होना।
  • बदबूदार मल या मल में मवाद या खून का निकलना।
  • किसी भी समय लैट्रिन लग जाना।
  • भगन्दर होने पर उसके द्वारा होने वाले इन्फेक्शन के कारण अधिक बुखार और ठंड लगना भगन्दर के लक्षण फिशर के सामान भी हो सकते हैं।

भगन्दर के लक्षण को अनदेखा करना भारी भी पड़ सकता है। उपरोक्त दिये गये लक्षणों के होने पर तुरंत अपने डाक्टर से बात कर भगन्दर का इलाज प्रारम्भ कर देना चाहिए।

भगन्दर का इलाज- bhagandar treatment in hindi

भगन्दर का उपचार मुख्य रुप से चार प्रकार से हो सकता है।

इन 4 उपायों में हैं –

  • भगन्दर का घरेलू उपचार (Home remedies for Fistula)
  • भगंदर का डाक्टर द्वारा इलाज (medical treatment for fistula)
  • भगंदर का होम्योपैथिक में इलाज- (fistula treatment in homeopath)

भगंदर का आयुर्वेदिक में इलाज- (fistula treatment in Ayurveda)

हम इस लेख में भगन्दर के घरेलू उपायों के बारे में बता रहें हैं तो आइए भगन्दर का घरेलू उपचार- Home remedies for Fistula क्या है? यह देखते हैं।

अगर एनल फिस्टुला (भगंदर) का समय पर इलाज ना किया जाए तो क्या होगा?

एनल फिस्टुला, जिसे भगंदर भी कहते हैं, एक रोग है जिसमें एनल क्षेत्र (गुदा) में एक या एक से अधिक गहराई में जलने वाले गलेरियों की विकास होती है। यह आमतौर पर एनल से पानी, मल या मुंहासे के रस की रूपरेखा तक जाने की एक पथ होती है।

यदि एनल फिस्टुला का समय पर इलाज नहीं किया जाता है, तो यह कुछ समस्याओं का कारण बन सकता है:

  1. इंफेक्शन और तकलीफ़: एनल फिस्टुला इंफेक्शन की आसानी से वजह बन सकती है, जो दर्द, सूजन, और तकलीफ़ का कारण बन सकता है।
  2. जीवन गुणवत्ता का प्रभाव: यदि भगंदर विकसित होता रहता है और समय पर उपचार नहीं किया जाता है, तो यह आपके जीवन गुणवत्ता पर असर डाल सकता है, चाहे वो दर्द या तकलीफ़ की वजह से हो।
  3. समस्याएँ बढ़ना: यदि इलाज नहीं किया जाता है, तो एनल फिस्टुला में समस्याएँ बढ़ सकती हैं, और उन्हें ठीक करना भी मुश्किल हो सकता है।
  4. कॉम्प्लीकेशन्स: अगर एनल फिस्टुला से संक्रमण और समस्याएँ बढ़ती हैं, तो यह कई कॉम्प्लीकेशन्स का कारण बन सकता है, जिनमें स्थूल गुदा के क्षेत्र में असंतुलन, गुदा में छिद्र स्थापित होने की समस्या आदि शामिल हो सकती है।

इसलिए, यदि आपको लगता है कि आपको एनल फिस्टुला हो सकती है, तो सर्जिकल सलाह और उपचार के बारे में तुरंत चिकित्सक से सलाह लेना चाहिए। यदि आपको पहले से ही एनल फिस्टुला है और उसका समय पर इलाज नहीं किया गया है, तो आपको जल्दी से जाँच और उपचार करवाना चाहिए ताकि संभावित समस्याओं को बचा जा सके।

Conclusion-निष्कर्ष

यह एक खतरनाक रोग है। इसके लिए हमें अपने रहन—सहन के साथ ही खान—पान को भी ठीक करना होगा। और एक ही स्थान पर ज्यादा देर नहीं बैठना चाहिए।

अगर आपको भगन्दर रोग होने की आशंका हो रही हो तो तुरन्त इन उपायों को अपनायें। किसी कारणवश इन उपायों से आपको फायदा नहीं हो रहा है तो अपने डाक्टर से सलाह लें।

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