अर्शोघ्नी वटी के फायदे व नुकसान- Arshoghni Vati Uses, Benefits and Side Effects in Hindi

Arshoghni Vati Uses, Benefits and Side Effects in Hindi-अर्शोघ्नी वटी एक आयुर्वेदिक औषधि है। इसका प्रयोग कई प्रकार की बिमारी के इलाज में किया जाता है परन्तु प्रमुख रूप से भगन्दर एवं बवासीर के इलाज में इसका प्रयोग होता है।

विशेष बात यह है कि यह दोनों प्रकार के बबासीर में लाभदायक है। अगर आपको भी बबासीर या भगन्दर की परेशानी है तो आप इस आयुर्वेदिक अर्शोघ्नी वटी का प्रयोग कर सकते हैं।  इसको हम Brahmi Vati के नाम से भी जानते हैं।

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अर्शोघ्नी वटी का परिचय Arshoghni Vati Reviews in Hindi

अर्शोघ्नी वटी arshoghni vati एक आयुर्वेदिक औषधि है। इस औषधि का प्रयोग कई प्रकार के रोगों के इलाज में होता है। आयुर्वेद में अर्शोघ्नी वटी को एक बेहद उपयोगी दवा माना गया है।

इस वटी के प्रयोग से कई प्रकार के रोगों में लाभ प्राप्त किया जा सकता है। कई वर्षो से आयुर्वेदाचार्य इस वटी का प्रयोग लोगों के इलाज में करते आ रहे हैं।

मुख्य रूप से अर्शोघ्नी वटी का प्रयोग बवासीर के इलाज के लिए किया जाता है। इसका प्रयोग पाइल्स के आकार को नियंत्रित कर कम करने के लिए किया जाता है। यह दोनों प्रकार के बवासीर बादी बवासीर और खूनी बवासीर में लाभदायक है।

इस दवा का प्रयोग कुछ माह तक किया जा सकता है।

अर्शोघ्नी वटी के घटक Composition of Arshoghni Vati

इसमें पाये जाने वाले घटक ​निम्न हैं —

  • निम्बफल Azadirachta indica — बीज  — 24 ग्राम
  • महानिम्ब/बकायन के फल की मींगी Azadirachta indica — बीज  — 24 ग्राम
  • खून — खराबा  Daemenorops draco Blume. — निर्यास —  24 ग्राम
  • तृणकान्तमणि पिष्टी Trinakanta Pishti — 48 ग्राम
  • शुद्ध रसौंत Berberis aristata DC — Solid Ext. — 3 ग्राम

अशोघ्नी वटी को बनाने की विधि — सबसे पहले निम्बोली व बकायन के बीजों को अच्छी तरह से पीसे लेते हैं। अब इस तैयार पाउडर के साथ बचे हुये अन्य पदार्थो को मिला लिया जाता है और इस मिश्रण से 2 रत्ती की गोलियां बनाकर सुखा लेते हैं। इस प्रकार यह वटी तैयार की जा सकती है।

अर्शोघ्नी वटी के फायदे Arshoghni Vati Benefits and Uses

आयुर्वेद चिकित्सा में अर्शोघ्नी वटी Arshoghni Vati के कई फायदे बताये गये हैं जिनमें से कुछ के बारे में हम इस लेख में बताने जा रहे है :

बवासीर में अर्शोघ्नी वटी के फायदे  Arshoghni Vati Benefits in Piles

विशेष रूप से इस औषधि का उपयोग बवासीर (Piles) के उपचार के लिए किया जाता है। इस वटी के द्वारा दोनों प्रकार की बवासीर का उपचार होता हैं जो है खूनी बवासीर व बादी बवासीर।

बवासीर के रोग में व्यक्ति को मल त्याग करते समय बहुत अधिक दर्द को सहन करना पड़ता है और मल के साथ खून आने की भी समस्या रहती है। जिससे शरीर में रक्त की कमी हो जाती है।

खूनी बवासीर नाम से ही पता चल रहा है कि इस प्रकार के बवासीर में रक्त अर्थात खून आता होगा। इस प्रकार के बवासीर में जब रोगी मल त्याग करता है तो मल के साथ रक्त भी आता है। जबकि दूसरी तरह के बवासीर बादी बवासीर में खून नहीं आता।

बवासीर के रोग में व्यक्ति के गुदा मार्ग में मस्से हो जाते हैं या कहे शरीर का मांस बाहर की ओर निकल जाता है जो मस्से का रूप ले लेता है।

और इन मस्सों में मवाद भर जाती है। जिसके कारण रोगी को मल त्याग करते समय अत्यधिक पीड़ा का अनुभव होता है। और कभी—कभी मस्सों के फूट जाने से मवाद और रक्त भी बाहर निकलता है।

अगर बवासीर का वक्त रहते उपचार न किया जाय तो यह रोग भगंदर का रूप ले लेती है। परन्तु अर्शोघ्नी वटी के नियमित उपयोग से बवासीर की बीमारी में अत्यधिक फायदा होता है।

क्योंकि इस वटी के प्रयोग से बवासीर के कारण बने मस्से सूख जाते हैं जिससे मल त्याग करते समय दर्द, जलन, खुजली नहीं होती है। साथ ही बवासीर से जुड़ी हुई अन्य समस्यायें भी समाप्त हो जाती हैं।

(और अ​धिक पढ़े : भगन्दर या बवासीर ka gharelu upchar)

कब्ज में अर्शोघ्नी वटी के फायदे Arshoghni Vati Benefits in Constipation

कब्ज की समस्या से कई लोग परेशान रहते हैं और वे लोग अपने पेट को साफ करने के लिए कई प्रकार के उपायों को अपनाते हैं पर फिर भी उनको कुछ ज्यादा फायदा नहीं होता है।

इसका सीधा और आसान उपाया है अर्शोघ्नी वटी। इस वटी का प्रयोग बवासीर के अलावा कब्ज के इलाज में भी किया जा सकता हैं इसके प्रयोग से कब्ज की समस्या में लाभ होता है।

अगर किसी व्यक्ति को अक्सर कब्ज की परेशानी रहती है तो उसे अर्शोघ्नी वटी के साथ-साथ पंचसकार चूर्ण का उपयोग करना चाहिए। क्योंकि पंचसकार चूर्ण के प्रयोग से बड़ी आंत का शुद्धीकरण होता है तथा पाचन तंत्र स्वस्थ होता है।

इस कारण से हमारा कब्ज तो समाप्त होता ही है और बवासीर की समस्या से भी निजात मिलती है।

(और ​अधिक पढ़े :कब्ज का रामबाण इलाज…)

इन सबके अलावा यह अन्य बिमारियों में भी फायदेमंद है जैसे —

  • खून साफ करना।
  • गुदा क्षेत्र में होने वाले इन्फेक्सन को दूर करना।
  • गैर से निजात पाने में मदद करना।
  • पित्त दोष व वात दोष को कम करने में मदद करना क्योंकि इस वटी की तासीर ठण्डी होती है।
  • यह बवासीर में होने वाली ब्लीडिंग को रोकता है।

अर्शोघ्नी वटी की खुराक Doses of Arshoghni Vati

  • इस दवा का प्रयोग दिन में दो बार किया जा सकता है। जिसमें 125 से 250 मिलीग्राम  की 1 से 2 गोली ली जा सकती है।
  • पूरे दिन में 6 से अधिक गोलियों या 750 मिलीग्राम से ज्यादा का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • इसको ठण्डे पानी के साथ लिया जा सकता है।
  • हर बिमारी में इसका प्रयोग अलग—अलग प्रकार से होता है अत: प्रयोग से पहले डॉक्टर से सलाह ले लेनी चाहिए।

अर्शोघ्नी वटी के नुकसान Arshoghni Vati Side Effects

अर्शोघ्नी वटी के प्रयोग से होने वाले कोई भी दुष्प्रभाव का कोई पता नहीं है और नहीं देखा गया है। परन्तु यदि आप इसका सेवन गलत प्रकार से या अधिक मात्रा में करते हैं तो इसके कुछ दुष्प्रभाव हो सकते हैं।

इससे आपके पेट में ऐंठन, दर्द हो सकता है। इसके अलावा सिर दर्द जैसी समस्या भी हो सकती है। अत: इस दवा का प्रयोग डॉक्टर से सलाह के साथ निश्चित मात्रा में ही करना उचित होता है।

अर्शोघ्नी वटी से संबंधित प्रश्न Some important questions regarding Arshoghni Vati Brahmi Vati

क्या जल्द लाभ के लिए अर्शोघ्नी वटी (Arshoghni Vati) की अधिक मात्रा ली जा सकती है ?

नहीं। अर्शोघ्नी वटी को डॉक्टर की सलाह के साथ एक निश्चित मात्रा व अवधि तक ही लेना चाहिए।

क्या अर्शोघ्नी वटी (Arshoghni Vati) का प्रयोग शराब के साथ कर सकते हैं ?

नहीं। अगर आप इस वटी का प्रयोग कर रहे हैं तो आपको शराब का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इस दवा को सिर्फ ठण्डे ताजे पानी के साथ ही लिया जा सकता है।

क्या अर्शोघ्नी वटी (Arshoghni Vati) का प्रयोग गाड़ी चलाते समय कर सकते हैं ?

इस वटी का प्रयोग गाड़ी चलाते समय किया जा सकता है। ऐसा कोई भी उदाहरण उपलब्ध नहीं है जिसमें इसका कोई नुकसान गाड़ी चलाते समय हुआ हो।

क्या अर्शोघ्नी वटी (Arshoghni Vati) के लगातार प्रयोग से इसके आधी हो सकते हैं?

नहीं। अर्शोघ्नी वटी को लेने से आप इसके आधी नहीं होंगे या इसकी लत नहीं लगेगी। फिर भी इसकी मात्रा व समय सीमा के लिए डॉक्टर से सलाह अवश्य करें।

अर्शोघ्नी वटी (Arshoghni Vati) की कितनी मात्रा ली जा सकती है ?

अर्शोघ्नी वटी की एक खुराक 125 से 250 मिलीग्राम तक हो सकती है। अत: दिन में दो समय ही इसकी खुराक लेना फायदेमंद हैं। अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से सम्पर्क करें।

क्या गर्भावस्था के दौरान अर्शोघ्नी वटी (Arshoghni Vati) को खाया जा सकता है?

नहीं। गर्भावस्था के दौरान इस वटी का प्रयोग करना फायदेमंद नहीं होता है। वटी (Brahmi Vati) को लेना सुरक्षित नहीं हो सकता है ।

क्या स्तनपान के दौरान अर्शोघ्नी वटी (Arshoghni Vati) ली जा सकती है?

इस वटी को स्तनपान के दौरान लिया जा सकता है परन्तु फिर भी इसका सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य कर लें।

क्या अर्शोघ्नी वटी (Arshoghni Vati) में शुगर की मात्रा पायी जाती है ?

नहीं इस वटी में शुगर या चीनी की मात्रा नहीं पाई जाती है। अगर आपको मधुमेह है तो भी आप इस वटी का प्रयोग कर सके हैं। फिर भी अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से सलाह कर लेनी चाहिए।

गुदा रोगों के इलाज के लिए अर्शोघ्नी वटी (Arshoghni Vati) का प्रयोग किया जा सकता है ?

अर्शोघ्नी वटी का प्रयोग ही गुदा एवं पेट से सम्बन्धी रोगों के लिए किया जाता है जैसे बवासीर, भगंदर, कब्ज आदि।

अर्शोघ्नी वटी कैसे प्राप्त करें Arshoghni Vati Price

अर्शोघ्नी वटी को बनाने वाली कई बड़ी कम्पनीयां है जैसे बैद्यनाथ, पतंजली, डाबर व झन्डु। आप इनको किसी भी दवा के स्टारे से प्राप्त कर सके हैं या फिर आनलाइन भी मगाया जा सकता है। इसका मूल्य अलग—अलग कम्पनी में अलग-अलग हो सकता है।

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