शुगर को जड़ से खत्म करने का तरीका Sugar Ko Jad Se Khatam Karne Ka Tarika

SUGAR KO JAD SE KHATAM KARNE KA TARIKA — शुगर (डायबिटीज) को जड़ से खत्म करने का तरीका : हमारी बदलती जीवनशैली, गलत खान पान, देर से सोना, और तनाव शुगर या मधुमेह का कारण बनती है। शुगर यह लगभग सभी व्यक्तियों में कम या ज्यादा मात्रा में होता ही है।

अगर इसका लेवल सामान्य स्तर से अधिक हो तो यह घातक बिमारी का रूप ले लेता है। यह रोग युवा एवं बुर्जुगों में एक समान ही होती है। अत: इसके लिए इस पर पहले से ही ध्यान देना जरूरी है जिससे इससे बचा जा सकते।

शुगर के इलाज के लिए अंग्रेजी दवाओं व आयुर्वेद का सहारा लिया जाता है। परन्तु फिर भी सभी के मन में यह सवाल हमेशा रहता है कि शुगर को जड़ से खत्म किया जा सकता है या नहीं।

अंग्रेजी दवाओं से इलाज करने पर हाई शुगर को कंट्रोल तो किया जा सकता है पर इसको जड़ से समाप्त नहीं किया जा सकता है। दूसरी ओर आयुर्वेदिक दवा और घरेलू उपायओं को सही प्रकार से अपनाया जाय तो डायबिटीज अर्थात शुगर से छुटकारा मिल सकता है। 

इस लेख में हम शुगर को जड़ से खत्म करने के उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं।

(और अधिक जानें डायबिटीज में दालचीनी तेल के लाभ…)

शुगर क्या है? Sugar Kya Hai?

शुगर (डायबिटीज) हमारे देश में एक व्यापक समस्या है, जिसके कारण हमारे देश को डायबिटीज (मधुमेह) की विश्व राजधानी (world capital of diabetes) कहते हैं।

सामान्य तौर पर डायबिटीज के दो प्रकार की होती है –

  • टाइप 1 डायबिटीज (type 1 diabetes)
  • टाइप 2 डायबिटीज (type 2 diabetes)।

टाइप 1 डायबिटीज में शरीर इंसुलिन का उत्पादन बिल्कुल नहीं करता है और वहीं टाइप 2 डायबिटीज में शरीर पर्याप्त इंसुलिन पैदा नहीं कर पाता  है या फिर जो इंसुलिन पैदा होता भी है वह हमारे रक्त से शुगर को अवशोषित करने के लिए सही प्रकार से काम नहीं करता है।

शुगर की बिमारी से भारत में वर्तमान में कम से कम 63 मिलियन से भी अधिक लोग प्रभावित है। यह बिमारी अन्य बिमारियों जैसे हार्मोनल विकार हृदय संबंधी बीमारी (heart diseases), स्ट्रोक (strokes), यकृत से सम्बन्धी बिमारी (liver damage), गुर्दे की विफलता (kidney failure), और मोतियाबिंद (cataract) आदि को जन्म दे सकती है।

हमारे देश में यह बिमारी तेजी से फैल रही है और लोगों के जीवन के लिए खतरा बनती जा रही है। आप अपनी जीवनशैली में साधारण सा बदलाव कर शुगर (मधुमेह) की बिमारी को अपने जीवन में आने से रोक सकते हैं।

जब किसी व्यक्ति को शुगर की बिमारी होती है तो उसका शरीर पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन का उत्पादन नहीं कर पाता है या फिर इंसुलिन का सही उपयोग नहीं कर सकता है इस कारण से रक्त में ग्लूकोज जमा होने लगता है।

रक्त में शर्करा की उच्च मात्रा थकान से लेकर हृदय के रोगों तक के कई प्रकार के रोगों का कारण बन सकता है। ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के उपायों को हम नीचे विस्तार से बताने जा रहे हैं।

शुगर लेवल कितना होना चाहिए  Sugar Level Kitna Hona Chaheye

सुबह खाली पेट ब्लड टेस्ट करने पर अगर शुगर की मात्रा 70 ये 110 मिलीग्राम है तो यह नार्मल ब्लड शुगर लेवल है।

अगर शुगर का लेवल 110 से 125 मिलीग्राम के बीच है तो यह शुगर का आरम्भ हो सकता है। ऐसी स्थिति में आपको डॉक्टर से मिलना चाहिए।

वहीं अगर आपका शुगर लेवल 125 मिलीग्राम या उससे अधिक है तो आपको डॉक्टर से तुरन्त मिलना चाहिए और शुगर को नियंत्रित करने वाली दवा का सेवन करना चाहिए।

जब यह लेवल 200 मिलीग्राम से अधिक हो जाय तो शुगर पेशाब के साथ निकलने लगती है यह एक खतरनाक स्थिति है।

खाना खाने के 2 घंटे बाद ब्लड टेस्ट करने पर यदि शुगर लेवल 110 से 140 मिलीग्राम ये बीच रहे तो यह एक सामन्य स्थिति है। वहीं दूसरी ओर अगर ब्लड शुगर लेवल 140 से 170 मिलीग्राम के बीच हो तो घबराने की आवश्यकता नहीं है यह स्थिति नियंत्रित की जा सकती है।

यदि ब्लड शुगर लेवर 200 व 300 मिलीग्रामसे अधिक हो तो तुरन्त डॉक्टर से मिलना चाहिए इस स्थिति में लापरवाही आपके लिए खतरनाक हो सकती है।

यदि ब्लड शुगर लेवल 400 मिलीग्राम या उससे अधिक हो तो यह रोग की गंभीर स्थिति है।

यदि समय से शुगर की बिमारी का उपचार न करें तो यह कई अन्य बिमारियों को जन्म देता है तो आपके लिए खतरनाक हो सकती है।

शुगर कम करने के घरेलू उपाय  Sugar Kam Karne Ke Ghrelu Upay in Hindi

करेला – 

करेला शुगर को कम करने का सबसे सरल और अच्छा उपाय है। करेला में प्लांट इंसुलिन-पॉलीपेप्टाइड-पी (plant insulin-polypeptide-P) भरपूर मात्रा में पाया जाता है। यह हाइपरग्लाइसेमिया (hyperglycemia) शर्करा के स्तर में होने वाली वृद्धि को कम करने में मदद करता है। करेले में दो अति आवश्यक यौगिक पाये जाते हैं जिन्हें मोमोर्डिसिन (momordicin) और कैरेटिन (charatin) कहा जाता है, जो रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने का जरूरी यौगिक हैं।

शुगर या मधुमेह को कम करने के लिए करेले का उपयोग सप्ताह में एक बार सब्जी या जूस के रूप में अवश्य करें। इसके लिए आप करेले के टुकड़े काटें व उसके बीजों को निकाल लें फिर ब्लेंडर में कटा हुआ करेला डालें और उसका जूस बनने तक चलाते रहें।

इस जूस का एक छोटा गिलास रोज सुबह खाली पेट पिने से आपका शुगर नियंत्रित हो जायेगा।

आम के पत्ते –

आम के पत्ते शरीर में शुगर की मात्रा को कम करने में मदद कर सकते हैं। रक्त में इंसुलिन के स्तर को सही कर डायबिटीज को नियंत्रित करने के लिए कोमल आम के पत्तों का उपयोग किया जाता है।

आम के पत्तियों में विटामिन सी, ए एवं टैनिन पाया जाता हैं, जो शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट हैं जो शुगर के शुरुआती उपचार में फायदेमंद होता है। शुगर कम करने के लिए आम के पत्तों का प्रयोग करने के लिए इन पत्तों को सुखा लें और फिर उनका बारिक पाउडर बना लें। इस पाउडर या चूर्ण को रोजाना प्रात: और रात को पानी के साथ खायें।

इसके अलावा आप आम के कुछ ताजा पत्तों को पानी में डालकर उबाल लें और इस पानी को रात भर ठंडा होने के लिए ऐसे ही  छोड़ दें और सुबह—सुबह खाली पेट इसको पिने से फायदा होता है।

आंवला –

आंवला में मिलने वाले औषधीय गुण शुगर को कम करने में मदद कर सकते हैं। आंवला में विटामिन ‘सी’ प्रचूर मात्रा में पाया जाता है यह आपके अग्न्याशय को अच्छा इन्सुलिन पैदा करने में मदद करता है ताकि रक्त शर्करा का स्तर नियंत्रित रहे।

इसके लिए 2-3 आंवले को ले और उनके बीज को निकाल कर उसे बारीक पीसकर उसका रस निकाल लें। अब इस रस की दो चम्मच मात्रा को एक गिलास पानी में मिलाकर रोज सुबह खाली पेट पिएं। यह ब्लड शुगर कम करने में फायदेमंद होगा।

इसके अलावा आप 1 बड़े चम्मच आंवले के रस को एक छोटे गिलास करेले के जूस के साथ मिलकार पियें। इसका सेवर प्रतिदिन करने से शुगर की बिमारी में लाभ होगा।

(और अधिक जानें भूमि आंवला के फायदे…)

नीम –

नीम डायबिटीज के रोग को नियंत्रित रखने में लाभदायक होता है| इसकी कड़वी पत्ती मधुमेह के लिए प्रभावी उपचार है जो हमारे देश भारत में अधिक मात्रा में पाया जाता है।

नीम बीटा कोशिकाओं में इंसुलिन रिसेप्टर संवेदनशीलता को बढ़ाने में सहायता करता है, जो रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित कर कम करता है। यह देखा गया है कि नीम शरीर द्वारा इंसुलिन की आवश्यकता को 50 से 60 प्रतिशत तक कम कर देता है।

डायबिटीज के रोगी के लिए नीम की एक छोटी गोली खाना भी बहुत अधिक फायदेमंद होता है।

मेथी –

मेथी शुगर कम करने का सबसे आसन घरेलू उपाय हैं। मेथी का प्रयोग मधुमेह को नियंत्रित करने, ग्लूकोज के स्तर में सुधार और रक्त शर्करा के स्तर को कम करने के लिए किया जाता है।

क्योंकि इसमें फाइबर की उच्च मात्रा पाई जाती है। इसे खाने से हमारा पाचन धीमा होता है, जिस कारण से ब्लड शुगर ठीक से अवशोषित होता है।

यह टाइप 1 और टाइप 2 मधुमेह दोनों को नियंत्रित करने में लाभदायक है, मेथी प्रत्येक रसोई में आसानी से मिल जाता है। इसका इस्तेमाल आयुर्वेद में कई बिमारियों के इलाज के लिए किया जाता है।

इसके आलवा यह मधुमेह को नियंत्रित करने, ग्लूकोज सहनशीलता में सुधार करने, रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित कर कम करने और ग्लूकोज के पाचन में प्रयुक्त होने वाले इंसुलिन के स्राव को बढ़ाने में मदद करता है।

इसके लिए आप मेंथी के 2 चम्मच बीजों को पानी में रात भर के लिए भिगोएँ और प्रात: इस पानी को बीजों के साथ ही खाली पेट पियें। यह डायबिटीज में फायदेमंद होता है। इसके आलवा आप प्रतिदिन ठंडे या गुनगुने पानी या दूध के साथ मेथी दानों के पाउडर का भी सेवन कर सकते हैं।

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जामुन की गुठली, गिलोय और कालमेघ –

जामुन की गुठली को सुखा कर उनका महीन पाउडर बना लें एवं गिलोय और कालमेघ की बराबर मात्रा को लेकर इन तीनों को मिलकार इसका रोज सेवन करें। इसका रोज एक चम्मच ही प्रयोग करना चाहिए। इससे शुगर लेवल को जल्दी नियंत्रित किया जा सकता है।

लहसुन के पत्ते —

लहसुन के पत्ते के प्रयोग से भी ब्लड शुगर को नियंत्रित किया जा सकता है। लहसुन  एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है और इसके साथ-साथ लहसुन रक्त को साफ करने वाला भी होता है। इसके नियमित सेवन से शुगर नियंत्रित रहता है। लहसुन उन हारमोंस को पैदा करने में सहायता करता है जो शरीर में शुगर कंट्रोल करती है|

सूरज की रोशनी अर्थात विटामिन ‘डी’ –

सूरज की रोशनी भी शुगर को कम करने में सहायक होती है। एक अध्ययन से पता चला है कि  विटामिन डी की कम मात्रा के कारण मधुमेह के रोग को बढ़ावा मिलता है। शोध से पता चला है कि विटामिन डी शरीर में इंसुलिन के उत्पादन में अहम भूमिका निभाता है।

शरीर में विटामिन डी की मात्रा जितनी कम होगी उतना ही अधिक खतरा टाइप 2 मधुमेह होने रहेगा। शुगर को कम करने के लिए और विटामिन डी की कमी से बचना चाहिए इसके लिए रोज 30 मिनट धूप में टहलें। इसके अलावा आप अपने आहार में विटामिन डी से भरपूर पदार्थो को प्रयोग कर सकते हैं। जैसे संतरा, सोया दूध, पनीर, दही और अनाज।

पानी –

पानी पीना शुगर को कम करने में मदद कर सकता है। मधुमेह से पीड़ित व्यक्तियों को निर्जलीकरण का खतरा होता है। ग्लूकोज को शरीर से निकालने के लिए गुर्दे इसे मूत्र के द्वारा बाहर निकालने का  प्रयास करते हैं परन्तु इसके लिए पानी की आवश्यकता होती है।

अत: आपका रक्त शर्करा जितना अधिक होगा आपको उतने अधिक तरल पदार्थ अर्थात पानी पीना चाहिए। इसी के कारण से अधिक प्यास लगना मधुमेह के लक्षणों में से एक है। अपने शरीर से शुगर को कम करने के लिए दिन में कम से कम 2.5 लीटर पानी पीना जरूरी है।

दालचीनी –

दालचीनी मधुमेह को नियंत्रित करने में मदद करती है और इंसुलिन की गतिविधि को उत्तेजित करके शरीर में रक्त शर्करा के स्तर को कम रखने में मदद करती है।

दालचीनी शुगर कम करने का एक अच्छा उपाय है। दालचीनी सभी गुणों से समृद्ध है इसमें बायोएक्टिव यौगिकों जैसे कि सिनैमिक एसिड (cinnamic acid) और सिनामाल्डिहाइड (cinnamaldehyde) प्रचूर मात्रा में पाये जाते हैं यह मधुमेह रोगियों के स्वास्थ्य में सुधार करता है। यह मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए जाना जाता है।

(और अधिक जानें दालचीनी के चमत्कारी फायदे …)

नियमित व्यायाम एवं योग करें –

नियमित व्यायाम करने से वजन तो कम होता ही है साथ ही इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाने में मदद मिलती है। व्यायाम करने में हमें ऊर्जा की आवश्यकता होती है और वह गुलुकोज से अर्थात शर्करा से मिलती है और हमारे शरीर में पाई जाने वाले अतिरिक्त शर्करा को उपयोग व्यायाम में हो जाता हैं जिससे ब्लड शुगर नियंत्रण हो जाता है।

अत: इसे परिणामों के लिए आपको नियमित रूप से अपने शुगर स्तर की जाँच करवानी चाहिए। व्यायाम जैसे वजन उठाना, तेज चलना, दौड़ना, साइकिल चलाना, लंबी पैदल यात्रा और तैराकी शामिल हैं।

तुलसी के पत्ते –

इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ाने के लिए तुलसी की पत्तियों में पाया जाने वाला एंटीऑक्सिडेंट और आवश्यक तेलों का मिश्रण सहायक होात है। सामान्य तौर पर ये यौगिक, जैसे यूजेनॉल (eugenol), मिथाइल यूजेनॉल (methyl eugenol) और कैरोफाइलीन (caryophyllene) अग्नाशयी बीटा कोशिकाओं की सहायता करते हैं, जो इंसुलिन के निर्माण करने के लिए जिम्मेदार होते हैं।

तुलसी के पत्ते का एक अन्य लाभ यह भी है कि पत्तियों में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट ऑक्सीडेटिव हमें होने वाले तनाव के दुष्परिणामों को कम करने में मदद करता है। यह देखा गया है कि तुलसी इंसुलिन उत्पादन को बढ़ाता है और ग्लूकोज के स्तर में तेजी से कम करता है।

अगर आप अपने शर्करा के स्तर को कम करना चाहते हैं तो इसके लिए दो से तीन तुलसी के पत्ते या फिर एक चम्मच तुलसी के पत्ती के रस को खाली पेट लेना चाहिए।

(और अधिक जानें तुलसी केे फायदे …)

मखाने —

यदि आपको शुगर की समस्या है तो आपके लिए मखाने बहुत फायदेमंद हो सकते हैं। क्योंकि मखानों में कई प्रकार के पोषक तत्व पाये जाते हैं जो हमें स्वस्थ्य बनाये रखने के लिए आवश्यक होते हैं। यह शुगर को जड़ से खत्म करने में मदद कर सकती है। इसके लिए आपको नियमित खाली पेट कम से कम 5—6 मखानों को आना चाहिए। ऐसा करने से आपके खून में शुगर को लेवल कम होने लगता है। जिससे डायबिटीज नियंत्रित हो जाती है।

(और अधिक जानें तालमखाना के फायदे …)

करीपत्ता —

यदि आपको डायबिटीज की परेशानी अभी शुरू ही हुई है और आप करेले के रस को पीने में असमर्थ हैं तो आपको ​दिन में

 कम से कम तीन बार करीपत्ते को खाना चाहिए। इसको खाने से आपकी शुगर कंट्रोल में आ जायेगी।

(और अधिक पढ़ेे करी पत्ता खाने के फायदे …)

पुदीना —

अक्सर पुदीने का प्रयोग चटनी बनाने के लिए किया जाता है। मगर क्या आप जानते हैं कि पुदीना आपके शुगर को भी कंट्रोल करने के साथ ही उसे खत्म भी कर सकता है। इसके लिए आपको कुछ पु​दीने की पत्तियों को लेकर उसमें लहसुन, अदरक, अनारदाना खट्टा वाला प्रयोग करना है इन तीनों को आपस में मिलाकट अच्छे से पीसे लें और चटनी बना लें। आप इस चटनी का प्रयोग अपने भोजन के साथ भी कर सकते हो। यह आपके मधुमेह / शुगर को ठीक करने में सहातया करती है।

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