पित्त का रामबाण इलाज-Pitta Ka Ramban Ellaj

पित्त का रामबाण इलाज जानने से पहले हमें पित्त क्या है और कैसे काम करता है इसके बारे में जान लेना जरूरी है।

तो आइये पहले हम यह जानते हैं कि पित्त क्या है — वैज्ञानिक दृष्टि से देखे तो पित्त (Bile या gall) पिले या हरे रंग कर तरल पदार्थ है।

यह शरीर में भोजन के पाचन में सहायक होता है। पित्त हमारे शरीर में यकृत अर्थात लीवर में बनता व पाया जाता है और यह पित्ताशय में जमा होता रहता है।

अगर हम इसे सामान्य भाषा में बात करें तो पित्त का अभिप्राय अग्नि और जल से है। पित्त शरीर में मौजूद एक दोष है।

जो हमारे शरीर में आग, गर्मी और उर्जा को दर्शाता है। जैविक तरह से देखे तो पित्त गर्मी और पानी का मिलाजुला रूप है।

इसमें उपलब्ध गर्मी को जल नियंत्रित करके शरीर में उर्जा का प्रभाव को बढ़ाता है। हमारे शरीर में समस्त पाचन से सम्बन्धित क्रियायें पित्त के कारण ही होती है।

पित्त कफ के अणुओं को रासायनिक क्रिया द्वारा जल में घुलनशील अणुओं में बदल देता है जिससे उर्जा के उत्पादन में मदद करता है।

आगे हम इससे शरीर में होने वाले दोष और इसको कैसे पहचाने और इसका निदान अर्थात उपाय को जानेंगे।

पित्त दोष की संरचना- What is Pitta Constitution in Hindi

गर्मी या अग्नि उर्जा को दर्शाती है। शरीर में गर्मी को हम गर्माहट के तौर पर महसूस कर सकते हैं।

जब भी हम भोजन करते हैं तो हमारा शरीर गर्माहट को महसूस करता है।

कुछ समय के लिए हमारे शरीर का तापमान सामन्य से ज्यादा हो जाता है।

इसका मुख्य कारण यह होता है कि भोजन करने के बाद हमारे शरीर में उपाचय या कहें पाचन की क्रिया होने लगती है।

इस क्रिया को हम पित्त से जोड़ा कर देख सकते हैं। यह कहा जा सकता है कि पित्त में उपस्थित तत्व शरीर में पाचन की क्रिया को तेज करते हैं और इससे हमें उर्जा प्राप्त होती है और पित्त में उपस्थित जल तत्व उस उर्जा को सम्पूर्ण शरीर में पहुंचाता है।

हमारे शरीर में पित्त लगभग जगह होता है। मगर आयुर्वेद में इसके लिए विशेष स्थानों को उल्लेख है।

जिसके कारण पित्त से होने वाले विकारों का निदान करने में सहायक होता है। आयुर्वेद के अनुसार पित्त हृदय से नाभि के बीच वाले सभी हिस्सों में पाया जाता है।

जैसे — पेट, छोटी आंत, अग्न्याशय, जिगर, तिल्ली, रक्त, आंखें, त्वचा में पसीने की ग्रंथियां।

पित्त दोष के गुण – Pitta ke gun in Hindi

एक जैसे तासिर वाले भोजन पित्त को बढ़ाते हैं, जबकि विपरीत तासीर वाला भोजन पित्त को शांत रखता है।

जैसे — इरशीता स्निग्ध अर्थात थोड़ा चिपचिपा या तैलीय, ऊष्ण को गर्म से सम्बोधित करते हैं, तीक्षण को हम तेज या पेनेट्रेटिंग शक्ति कहते हैं, द्रव अर्थात तरल।

पित्त के कार्य क्या हैं – Pitta ke Karya kya hai in Hindi

पित्त का कार्य भोज्य पदार्थो को पचाने से शुरू होता है और इस पचे हुए भोजन को ऊर्जा में परिवर्तित कर उसे शरीर के समस्त हिस्सों को पहुंचाना है।

पित्त जटिल अणुओं के पचाने को नियंत्रित करता है।

इस सम्पूर्ण क्रिया के दौरान ऊर्जा निकलती है जो हमारे शरीर के लिए आवश्यक है।

साथ ही पित्त कोशिकीय गतिविधियां, मानसिक गतिविधियां, पित्त शरीर के तापमान का रखरखाव करता है।

साथ ही पित्त हमारी भूख और प्यास के लिए जिम्मेदार है।

पित्त त्वचा की चमक व उसकी रंगत को भी नियंत्रित करता है। यह आंखों की क्षमता को भी बढ़ाता है।

पित्त के प्रकार – Pitta ke prakar in Hindi

पित्त के प्रकार हमारे शरीर में पित्त 5 प्रकार के होते हैं —

  1. पचाका पित्त (PACHAKA PITTA)
  2. रंजक पित्त (RANJAKA PITTA)
  3. साधक पिट्टा (Sadhaka Pitta)
  4. आलोचक पिट्टा (ALOCHAKA PITTA)
  5. भ्राजक पित्त (BHARAJAKA PITTA)

पित्त के लक्षण – Pitta ke Lakshan

शरीर में होने वाली कई बिमारियों के लिए पित्त भी जिम्मेदार होते हैं पर इनके पहचानना जरूरी है इसके लिए इसके लक्षणों को जानन लेते हैं—

  • यदि हमारा पित्त बढ़ गय हो तो हम अपनी नाड़ी को देख कर पता कर सकते हैं इसके लिए हम अपने हाथ की नाड़ी में तीन उंगलियों को रखते हैं तो बीच वाची उंगली में नाड़ी का ज्यादा स्पंदन महसूस होता है।
  • पित्त के बढ़ने से हमारे शरीर में गर्मी बढ़ जाती है और शरीर में कीटाणु तेजी से बढ़कर इन्फेक्शन हमारे शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
  • पित्त के बढ़ने से शरीर में गर्मी ज्यादा होने लगती है ऐसे स्थिति में हमें पसीना ज्यादा आता है और चेरा भी पीला पढ़ जाता है।
  • इसमें हमें सर्दी लग जाती है और नाक बहने लगती है और साथ ही कफ वाली खांसी भी शुरू हो जाती है।
  • पित्त की समस्या होने पर हमारे बाल जल्द सफेद हो जाते हैं और पित्त की गर्मी बढ़ने से किडनी खराब होने की सम्भावना रहती है।
  • मुंह व पसीने से बदबु आ सकती है। अगर पित्त संतुलित अवस्था में होता है तो हमारे मुंह व पसीने से बदबु नहीं आती है।
  • पित्त के कारण हमें माइग्रेशन हो सकता है। पेट की समस्यायें उत्पन्न होने लगती हैं। हमें चिड़चिड़ापन महसुर होता है।
  • अक्सर गलत खान—पान, ज्यादा तैलीय, मसालेदार, मिर्च वाले खाने से हमें पित्त की बिमारी होती है। उपरोक्त हमने पित्त क्या है और इसके लक्षणों के बारे में जाना अब हम पित्त के से होने वाली बिमारियों और उसके इलाज के बारे में जानेंगे।

पित्त के रामबाण इलाज — Pitta ke Ramban Elaj

कुटकी

अगर हमारी शरीर में पित्त होने के साथ ही बुखार व जलन हो रही हो तो इसके लिए हमें कुटकी का पूर्ण 0.66 ग्राम से 1.21 ग्राम तक लेना चाहिए।

अगर यह पित्त बुखार पहले से आ रहा हो तो इसके लिए कुटकी की मात्रा को 3 ग्राम से 4.3 ग्राम तक बढ़ा कर शहद के साथ सुबह व सायं को लेना इस बिमारी में फायदेमंद होगी।

छोटी इलायची

छोटी इलायची पित्त की बिमारी में फायदमंद होती है इसके लिए हमें इसकी 0.60 ग्राम मात्रा दोनो समय लेनी चाहिए।

जीरा

पेट में जलन होना, उल्टी होना, हमेशा पेट में दर्द रहना, खट्टी डकारें आना, भोजन पचने में परेशानी होना, यह सभी लक्षण पित्त के वाले रोगों के लक्षण हैं।

इसके लिए हमें अपने किचन में ही रखे जीरे का प्रयोग कर सकते हैं।

इसके लिए सबसे पहले आधे कप उबले पानी में आधे चम्मच के बराबर जीरे को डाल लें।

उसके बाद जब यह पानी ठण्डा हो जाये तो उस पानी को पी लेना चाहिए और उसमें बचे जीर को खा लेना चाहिए उसे फैंकना नहीं चाहिए।

अगर हम लगातार इस विधि का प्रयोग करेंगे तो पित्त से होने वाले सभी बिमारियों से हमें निजात मिल जायेगी।

अमरबेल

अमरबेल का एक चम्मच रस सुबह और शाम को लेने से कब्ज और लीवर की बिमारियों को ठीक करता है और हमारे शरीर में बढ़ रही पित्त की मात्रा का नियंत्रित रखता है।

गुड़हल

हमारे शरीर में बढ़ने वाले पित्त से हमें सिर दर्द, उल्टी, जलन, जी मचलना औद होता है तो इसके लिए हम गुड़हल की 10 से 15 कलियों को पीस कर पीने से हमें लाभ होगा।

सागोन

सागोन पेड़ की छाल के चूर्ण से हमें पित्त की बिमारियों में लाभ होता है।

केला

हमारे शरीर में बढ़ रहे पित्त को रोकने में केले के पेड़ का रस काफी लाभदायक है। इसके लिए हमें केले के पेड़ का रस 20 से 42 मिलीगलीटर की मात्रा में दोनों समय अर्थात सुबह और शाम को लेना चाहिए।

मुनक्का

मुनक्का हमारे घर पर आसानी से मिल जाना है यह पित्त से होने वाली बिमारियों में काफी फायदेमंद होता है। पित्त से होने वाली जल को दूर करता है।

कागजी नींबू

सुबह एवं शाम को कागजी नींबू का पानी पीने से शरीर में पित्त को बढ़ने से रोका जा सकता है।

कोकम का शरबत

इसके इलाज के के लिए कोकम का शर्बत काफी फायदेमंद होता है। इसका दोनों समय सेवन पित्त को बढ़ने से रोकता है और इसकी गर्म तासिर को कम करता है (कोकम शरबत के फायदे)।

आलूबूखारे

पित्त से होने वाली बिमिारियों में आलूबुखारे का काढ़ा 22 से 38 मिलीलीटर सुबह व शाम को पीने से पित्त से होने वाली बिमारियों में फायदा होता है।

इमली

पित्त के रोग व इससे होने वाली जलन को सही करने के लिए इमली के कोमल पत्तों व फूलों की सब्जी बनाकर खाना चाहिए। इमली के शर्बत को मिश्री के साथ बनाकर पीने से सीने की जल में फायदा होता है। मगर ध्यान दें इमली को न खायें इससे पित्त का रोग बढ़ सकता है।

लीची

लीची का सेवन पित्त के रोगों में फायदेमंद होता है।

तुलसी

पित्त होने पर हमें तुलसी के बीजों का सेवन आवले के मुरब्बे के साथ रोज करना चाहिए इससे पित्त की बिमारी में हमें फायदा होता है। पित्त होने की स्थिति में अगर आपको इन सभी उपायों से भी कुछ फायदा नहीं हो रहा हो या इसका कोई साइडइफैक्ट हो रहा हो तो शीघ्र ही आपको नजदीकी किसी डाक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

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